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Sunday, March 28, 2021

कलिमा ए तौहीद (Kalima e Tauheed)

 

कलिमा ए तौहीद

शेख़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा ज़हीर अमनपुरी हफ़िज़ल्लाह

ला इलाहा इल्लल्लाह दीने इस्लाम की असास, ईमान व कुफ़्र में फ़र्क़ और निजात का राज़ है, यह वो मज़बूत कड़ा है, जिसे थामने वाला राहे हक़ से कभी नहीं भटक सकता, यह कलिमा ए शहादत हक़ और दावते हक़ है, जिस पर ज़मीन व आसमान का निज़ाम क़ायम है और हिसाब व किताब का अमल इसी पर निर्भर है। यह तमाम इंसानों की फ़ितरत भी है और तमाम नबियों की विरासत भी, यही अज़ाबे क़ब्र से निजात की वजह और जन्नत की कुंजी है, अल्लाह तआला तक पहुँचने के लिए इसी मज़बूत सहारे की ज़रुरत है, इसी से ख़ुश बख़्त और बदनसीब में फ़र्क़ किया जाता है। यह इंसानों पर अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है, यह अल्लाह तआला का बन्दों पर हक़ है, यह अल्लाह के अलावा तमाम माबूदों की नफ़ी करता है, ख़ुद अल्लाह तआला ने इसकी गवाही दी और फ़रिशतों और अहले इल्म ने इसकी तौसीक़ की।

फ़रमाने बारी तआला है:

شَهِدَ اللّٰهُ اَنَّهٗ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ١ۙ وَ الْمَلٰٓىِٕكَةُ وَ اُولُوا الْعِلْمِ قَآىِٕمًۢا بِالْقِسْطِ١ؕ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ الْعَزِیْزُ الْحَكِیْمُؕ۝۱۸

“अल्लाह तआला, उसके फ़रिशतों और इन्साफ़ वाले अहले इल्म ने गवाही दी है कि अल्लाह के सिवा कोई इलाह नहीं, वही ग़ालिब हिकमत वाला है।” (आले इमरान:18)

तमाम रसूलों को अल्लाह तआला ने इसी कलिमे के साथ भेजा है, फ़रमाया:

وَ مَاۤ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَّسُوْلٍ اِلَّا نُوْحِیْۤ اِلَیْهِ اَنَّهٗ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّاۤ اَنَا فَاعْبُدُوْنِ۝۲۵

“हमने आपसे पहले जितने रसूल भेजे सबकी तरफ़ यह वही की कि मेरे सिवा कोई इलाह नहीं, तो सिर्फ़ मेरी इबादत करो।” (अल-अम्बिया:25)

हाफ़िज़ इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाह अलैह (751हि) मोमिन दे दिल में इस कलिमे के असर का ज़िक्र करते हुए लिखते हैं:

من رَسَخَت هذه الكلمةُ في قلبه بحقيقتها التي هي حقيقتها واتَّصَف قلبُه بها وانْصَبَغَ بها بصبغة اللَّه التي لا أحسن صبغةً منها، فعرف حقيقة الإلهيَّة التي يُثْبتها قلبه للَّه ويَشهد بها لسانُه وتُصَدِّقها جوارحه، ونَفَى تلك الحقيقة ولوازمها عن كل ما سوى اللَّه، وواطأ قلبُه لسانَه في هذا النفي والإثبات، وانقادتْ جوارحُه لمن شهد له بالوحدانية طائعةً سالكةً سبلَ ربه ذُللًا غير ناكبةٍ عنها ولا باغيةٍ سواها بدلًا، كما لا يبتغي القلبُ سوى معبوده الحق بدلًا؛ فلا ريب أنَّ هذه الكلمة مِنْ هذا القلب على هذا اللسان لا تزال تُؤتي ثمرها من العمل الصالح الصاعِدِ [إلى اللَّه كل وقت؛ فهذ  الكلمة الطيبة هي التي رفعت هذا العمل الصالح الصاعد إلى الربِّ تعالى ، وهذه الكلمة الطيبة تُثمرُ كَلِمًا  كثيرًا طيِّبًا يقارنه  عملٌ صالح فيرفعُ العملُ الصَّالحُ الكلمَ الطيب، كما قال تعالى: {إِلَيْهِ يَصْعَدُ الْكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالْعَمَلُ الصَّالِحُ يَرْفَعُهُ (فاطر: 10) فأخبر سبحانه  أن العمل الصالح يرفع الكلم الطيب، وأخبر أن الكلمة الطيبة تُثْمر لقائلها عملًا صالحًا كل وقت.

“जिस शख़्स के दिल में यह कलिमा हक़ीक़तन रासिख़ हो जाये, उसका दिल, इस कलिमे की हक़ीक़त को जानने वाला और अल्लाह के इस रंग में रंगा जाये, जिससे अच्छा कोई और रंग नहीं हो सकता, वो ज़ाते इलाही को जानने वाला हो जायेगा, जो दिल को अल्लाह के लिए पुख़्ता कर देती है, उसकी ज़बान इसकी गवाही देने लगती है और जिस्म के हिस्से इसकी तसदीक़ शुरू कर देते हैं। यह हक़ीक़त और उसके लाज़िमात अल्लाह के सिवा हर चीज़ की नफ़ी करते हैं, फिर दिल इस नफ़ी और मानने में ज़बान का साथ देता है और जिस्म के हिस्से उस ज़ात के लिए फ़रमाबरदार हो जाते हैं, जिसके लिए तौहीद की गवाही दी होती है, उसके सिवा किसी की ज़रुरत नहीं रहती, यक़ीनन इस दिल व ज़बान से जारी होने वाला यह कलिमा नेक आमाल की सूरत में हर वक़्त फल देता रहता है, यही कलिमा इस नेक अमल को अल्लाह की तरफ़ बुलंद करता है, फ़रमाने बारी तआला है: यह (कलिमा) इस नेक अमल को अल्लाह की तरफ़ बुलंद करता है और अपने कहने वाले को हर वक़्त नेक अमल की तरफ़ शौक़ पैदा करता रहता है। ख़ुलासा यह कि जब मोमिन कलिमा ए तौहीद के माने व मफ़हूम को जानते हुए इसकी गवाही देता है, इसके तक़ाज़ो को पूरा करता है, उसका दिल, ज़बान और जिस्म के हिस्से उसकी तौसीक़ करते हैं, तो फिर यही कलिमा गवाही देने वाले के नेक अमल को बुलंद करता है, इस अमल की जड़ मज़बूत और रासिख़ होकर इसके दिल में होती है और इसकी शाख़ें आसमानों तक पहुँच जाती हैं और यह हर वक़्त नेक अमल की सूरत में फल देता रहता है।” (ऐलामुल मोक़िईन:1/172-173)

कआब अहबार रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं:

“अल्लाह तआला ने कलाम का चुनाव किया, तो अल्लाह के नज़दीक पसंदीदा कलाम ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ ठहरा, यह कलिमा इख़लास है, जो यह कलिमा पढ़ेगा, अल्लाह तआला उसके लिए बदले में बीस नेकियाँ लिख देगा और उसकी बीस बुराइयाँ मिटा देगा और जो ‘अल्लाहुअकबर’  कहेगा, अल्लाह तआला इसके बदले उसके लिए बीस नेकियाँ लिखेगा और बीस बुराइयाँ मिटा देगा, क्यूंकि यह अल्लाह तआला की ताज़ीम पर मबनी कलिमे हैं और जो शख़्स ‘सुबहानल्लाह’ कहेगा, उसके लिए अल्लाह तआला बीस नेकियाँ लिख देगा और बीस बुराइयाँ मिटा देगा और ‘अल्हम्दुल्लिल्लाह’ कहेगा तो यह अल्लाह की सना है और सना हम्द ही होती है, उसके लिए अल्लाह तआला तीस नेकियाँ लिख देगा और तीस बुराइयाँ मिटा देगा।” (अमअलुल यौम वल लैल लिननसाई: 843, इसकी सनद हसन है)

क़तादा रहमतुल्लाह {{اَلَا لِلّٰهِ الدِّیْنُ الْخَالِصُ}} (अज़-ज़ुमर:3) अलैह की तफ़सीर में फ़रमाते हैं:

“इससे मुराद ला इलाहा इल्लल्लाह की गवाही है।” (तफ़सीर अब्दुर्रज्ज़ाक़:3/171, इसकी सनद सहीह है)

इस आयत की तफ़सीर में अल्लामा मुहम्मद अमीन शिनक़ीती रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

أَمَرَ اللَّهُ جَلَّ وَعَلَا نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ. فِي هَذِهِ الْآيَةِ الْكَرِيمَةِ، أَنْ يَعْبُدَهُ فِي حَالِ كَوْنِهِ، مُخْلِصًا لَهُ الدِّينَ، أَيْ مُخْلِصًا لَهُ فِي عِبَادَتِهِ، مِنْ جَمِيعِ أَنْوَاعِ الشِّرْكِ صَغِيَرِهَا وَكَبِيرِهَا، كَمَا هُوَ وَاضِحٌ مِنْ لَفْظِ الْآيَةِ. وَالْإِخْلَاصُ، إِفْرَادُ الْمَعْبُودِ بِالْقَصْدِ، فِي كُلِّ مَا أَمَرَ بِالتَّقَرُّبِ بِهِ إِلَيْهِ، وَمَا تَضَمَّنَتْهُ هَذِهِ الْآيَةُ الْكَرِيمَةُ، مِنْ كَوْنِ الْإِخْلَاصِ فِي الْعِبَادَةِ لِلَّهِ وَحْدَهُ، لَا بُدَّ مِنْهُ، جَاءَ فِي آيَاتٍ مُتَعَدِّدَةٍ، وَقَدْ بَيَّنَ جَلَّ وَعَلَا، أَنَّهُ مَا أَمَرَ بِعِبَادَةٍ، إِلَّا عِبَادَةً يُخْلِصُ لَهُ الْعَابِدُ فِيهَا وَقَوْلُهُ تَعَالَى فِي هَذِهِ الْآيَةِ الْكَرِيمَةِ: أَلَا لِلَّهِ الدِّينُ الْخَالِصُ أَيِ: التَّوْحِيدُ الصَّافِي مِنْ شَوَائِبِ الشِّرْكِ، أَيْ: هُوَ الْمُسْتَحِقُّ لِذَلِكَ وَحْدَهُ، وَهُوَ الَّذِي أَمَرَ بِهِ. وَقَوْلُ مِنْ قَالَ مِنَ الْعُلَمَاءِ: إِنَّ الْمُرَادَ بِالدِّينِ الْخَالِصِ كَلِمَةُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مُوَافِقٌ لِمَا ذَكَرْنَاهُ. وَالْعِلْمُ عِنْدَ اللَّهِ تَعَالَ

इस आयते करीमा में अल्लाह तआला ने अपने नबी को हुक्म दिया है कि वो ख़ालिस उसकी इबादत करें, यानी उसकी इबादत को शिर्क की तमाम क़िस्मों से पाक करें, चाहे शिर्के असग़र हो या अकबर, यही मुराद आयत से वाज़ेह है।”

इख़लास यह है कि अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करने के लिए इबादत की जितनी भी सूरतें हैं, उनमें अल्लाह को लाशारीक कर दिया जाये, मालूम हुआ कि इख़लास ज़रूरी चीज़ है, बहुत सी आयतों में इसकी ताकीद है, अल्लाह का फ़रमान है कि उसने सिर्फ़ ऐसी इबादत का हुक्म दिया है, जो आबिद की तरफ़ से ख़ालिस उसी के लिए हो। इस आयते करीमा में फ़रमाने बारी तआला: से मुराद वो तौहीद है, जो शिर्क की मिलावट से भी पाक हो, यानी सिर्फ़ वही उसका मुसतहक़ है और इसी का उसने हुक्म दिया है, जिन उलमा ने इस आयत में ‘अद-दीनुल ख़ालिस’ से मुराद ला इलाह इल्लल्लाह लिया है, हमारी बात उनके मुआफ़िक़ है, वल्लाहु आलम।” (अज़वाउल बयान:7/42)

अम्र बिन मैमून रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि फ़रमाने बारे तआला: {{وَ اَلْزَمَهُمْ كَلِمَةَ التَّقْوٰى}} (अल-फ़तह:26) “अल्लाह ने उन मुसलमानों को तक़वे का कलिमा अता कर दिया।, में ‘“कलिमतुत तक़वा”’ की तफ़सीर ला इलाहा इल्लल्लाह है। (तफ़सीरे तबरी:31585, हुलियतुल औलिया:4/194, इसकी सनद सहीह है)

क़तादा बिन दिआमा रहमतुल्लाह अलैह से भी यही तफ़सीर मनक़ूल है। (तफ़सीर अब्दुर्रज्ज़ाक़:3/229, इसकी सनद सहीह है)

इमाम मुजाहिद रहमतुल्लाह अलैह भी यही कहते है। (तफ़सीरे तबरी:31588, इसकी सनद सहीह है)

हसन बसरी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

لا إله إلا الله ثَمَنُ الجنَّة

“ला इलाहा इल्लल्लाह जन्नत की क़ीमत है।” (मुसन्न्फ़ इब्ने अबी शैबा:13/529, इसकी सनद सहीह है)

इस आयत की तफ़सीर में अल्लामा शिनक़ीती रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं:

इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने इस कलिमे तौहीद को दो तरह से अपनी औलाद में बाक़ी रखा; एक तो इस तरह कि अपनी औलाद को इसकी वसीयत की, वो पुश्त दर पुश्त एक दुसरे को यही वसीयत करते आये, जैसा कि इस आयते मुबारका में अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया है:

وَ مَنْ یَّرْغَبُ عَنْ مِّلَّةِ اِبْرٰهٖمَ اِلَّا مَنْ سَفِهَ نَفْسَهٗ١ؕ وَ لَقَدِ اصْطَفَیْنٰهُ فِی الدُّنْیَا١ۚ وَ اِنَّهٗ فِی الْاٰخِرَةِ لَمِنَ الصّٰلِحِیْنَ۝۱۳۰ِذْ قَالَ لَهٗ رَبُّهٗۤ اَسْلِمْ١ۙ قَالَ اَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعٰلَمِیْنَ۝۱۳۱وَ وَصّٰى بِهَاۤ اِبْرٰهٖمُ بَنِیْهِ وَ یَعْقُوْبُ١ؕ یٰبَنِیَّ اِنَّ اللّٰهَ اصْطَفٰى لَكُمُ الدِّیْنَ

कौन है, जो इब्राहीम के दीन से मुंह मोड़े, सिवाए उसके जिसने अपने आपको बेवक़ूफ़ बना लिया हो, हमने उनको दुनिया में चुन लिया था और आख़िरत में भी नेकोकारों में से होंगे, उस वक़्त को याद करो, जब उनको रब ने फ़रमाया: फ़रमाबरदार हो जाओ, तो कहने लगे: मैं जहानों के रब के लिए फ़रमांबरदार हो गया हूँ और इब्राहीम ने इस बात की अपने बीटों को वसीयत की, फिर याक़ूब ने भी कि बेशक अल्लाह तआला ने तुम्हारे लिए दीन (तौहीद) को चुन लिया है।”(अल-बक़रा: 130-132) दुसरे इस तरह कि आप अलैहिस्सलाम ने अल्लाह से अपनी औलाद के ईमान व इस्लाह के लिए dua की थी, अल्लाह तआला ने इसे यूं बयान किया है:

وَ اِذِ ابْتَلٰۤى اِبْرٰهٖمَ رَبُّهٗ بِكَلِمٰتٍ فَاَتَمَّهُنَّ١ؕ قَالَ اِنِّیْ جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ اِمَامًا١ؕ قَالَ وَ مِنْ ذُرِّیَّتِیْ

जब इब्राहीम को उसके रब ने कुछ अवामिर व नवाही से आज़माया, आपने उनको पूरा कर दिखाया, अल्लाह ने फ़रमाया: मैं तुजे लोगों के लिए इमाम बनाऊँगा, उसने कहा; मेरी औलाद से भी (इमाम बना दे)।”(अल-बक़रा: 124) अल्लाह तआला ने इसके बाद आने वाले तमाम नबियों को उनकी औलाद से पैदा किया, जैसा कि सूरह अनकबूत में फ़रमाया:

وَ وَهَبْنَا لَهٗۤ اِسْحٰقَ وَ یَعْقُوْبَ وَ جَعَلْنَا فِیْ ذُرِّیَّتِهِ النُّبُوَّةَ وَ الْكِتٰبَ

हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब अता किये और नबूवत और किताब उनकी औलाद में जारी कर दी।”(अनकबूत:27) सूरह ज़ुख़रुफ़ की इस आयत में अल्लाह ने बयान कर दिया है कि उसने इब्राहीम अलैहिस्सलाम की इस दुआ को उनकी तमाम औलाद के बारे में क़ुबूल नहीं किया और इस कलिमे तौहीद को उनकी तमाम औलाद में बाक़ी नहीं रखा, क्यूंकि कुफ्फ़ारे मक्का जिन्होंने हमार नबी को झुटलाया था, वो भी बिलइत्तिफ़ाक़ इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पुश्त से थे। (अज़वाउल बयान7/231-232)

इमाम क़तादा रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाने इलाही: {{ كَانَ النَّاسُ اُمَّةً وَّاحِدَةً۫}} लोग पहले एक ही ग्रोह थेकी तफ़सीर में फ़रमाते हैं:

كَانُوا عَلَى الْهُدَى جَمِيعًا , فَاخْتَلَفُوا , فَبَعَثَ اللَّهُ النَّبِيِّينَ مُبَشِّرِينَ وَمُنْذِرِينَ , وَكَانَ أَوَّلَ نَبِيٍّ بُعِثَ نُوحٌ عَلَيْهِ السَّلَامُ

सब लोग हिदायत पर थे, फिर उनमें इख़्तिलाफ़ हो गया, तो अल्लाह ने ख़ुशख़बरी देने वाले और डराने वाले नबी भेजे और पहले नबी जो मबऊस हुए नूह अलैहिस्सलाम थे(तफ़सीर अब्दुर्रज्ज़ाक़: 1/82, इसकी सनद सहीह है)

इमाम अली बिन हुसैन रहमतुल्लाह अलैह अपने बेटे को यह दुआ सिखाते थे:

آمَنْتُ بِاللَّهِ وَكَفَرْتُ بِالطَّاغُوتِ

मैं अल्लाह पर ईमान लाया और ताग़ूत को का कुफ़्र किया।”””” (मुसन्नफ़इब्ने अबी शैबा:1/342, इसकी सनद हसन है)

अबू वाइल शक़ीक़ बिन सलमा रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं: फ़रमाने बारी तआला:

{{مَنْ جَآءَ بِالْحَسَنَةِ}} जो कोई नेकी लाएगा(अल-अनआम:160) में नेकी से मुराद ला इलाहा इल्लल्लाह है।” (अद-दुआ लिततबरानी:1529, तफ़सीर तबरी:1458, इसकी सनद हसन है)।

अता बिन अबी रिबाह रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

{{مَنْ جَآءَ بِالسَّیِّئَةِ}} में ‘हसअनह’ से मुराद कलिमा ए इख़लास ला इलाहा इल्लल्लाहऔर में ‘सय्यिअह’ से मुराद शिर्क है।” (तफ़सीर तबरी:14289, इसकी सनद सहीह है)

ज़ैद बिन असलम रहमतुल्लाह अलैह ने भी यही तफ़सीर की है।” (अद-दुआ लिततबरानी1533, इसकी सनद सहीह है)

मुहम्मद बिन सिरीन रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

फ़रमाने इलाही:

اِلَّا مَنْ اَتَى اللّٰهَ بِقَلْبٍ سَلِیْمٍؕ۝۸۹

मगर जो अल्लाह ने पास सलामत दिल ले कर आये(अश-शुअरा:89) में दिल की सलामती से मुराद ला इलाहा इल्लल्लाह की गवाही है।” (अद-दुआ लिततबरानी:1587, इसकी सनद सहीह है)

ज़्यादातर लोग ला इलाहा इल्लल्लाह कहते हैं, लेकिन वो इख़लास, यक़ीने कामिल और हाज़िरे क़ल्ब जो इससे हासिल होने चाहिए, उन्हें नसीब नहीं होती, इसकी वजह यह है कि वो महज़ सुन सुना कर, देखा देखी और एक आदत के तौर पर इसका इक़रार करते हैं, लिहाज़ा ज़रूरी है कि हम इस कलिमे की असल रूह और इसके तक़ाज़े व शर्तों को बयान कर दें, ताकि इससे हक़ीक़ी फ़ायदे हासिल हो सकें क्यूंकि सिर्फ़ अलफ़ाज़ को रट लेना फ़ायदेमंद नहीं।”

हाफ़िज़ हकअमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

لَيْسَ الْمُرَادُ مِنْ ذَلِكَ عَدَّ أَلْفَاظِهَا وَحِفْظَهَا فَكَمْ مِنْ عَامِّيٍّ اجْتَمَعَتْ فِيهِ وَالْتَزَمَهَا وَلَوْ قِيلَ لَهُ: أُعْدُدْهَا لَمْ يُحْسِنْ ذَلِكَ, وَكَمْ حَافِظٍ لِأَلْفَاظِهَا يَجْرِي فِيهَا كَالسَّهْمِ وَتَرَاهُ يَقَعُ كَثِيرًا فِيمَا يُنَاقِضُهَا

कलिमा पढ़ने से मुराद इसके अलफ़ाज़ की गिनती और रट लेना नहीं होता, कितने ही अनपढ़ लोग हैं, जिन्होंने कलिमा पढ़ा और फिर इसके तक़ाज़े भी पूरे किये, लेकिन अगर उनसे कहा जाए कि इसके अलफ़ाज़ को शुमार करो तो न कर सकेंगे, इसके विपरीत कितने ही पढ़े लिखे ऐसे हैं कि पानी की तरह रवानी से पढ़ते हैं लेकिन उनके ज़्यादातर काम कलिमे के ख़िलाफ़ होते हैं(मआरिजुल क़ुबूल:1/333)

हाफ़िज़ इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाह अलैह (हि751) लिखते हैं:

رُوحُ هَذِهِ الْكَلِمَةِ وَسِرُّهَا: إِفْرَادُ الرَّبِّ - جَلَّ ثَنَاؤُهُ، وَتَقَدَّسَتْ أَسْمَاؤُهُ، وَتَبَارَكَ اسْمُهُ، وَتَعَالَى جَدُّهُ، وَلَا إِلَهَ غَيْرُهُ - بِالْمَحَبَّةِ وَالْإِجْلَالِ وَالتَّعْظِيمِ وَالْخَوْفِ وَالرَّجَاءِ وَتَوَابِعِ ذَلِكَ: مِنَ التَّوَكُّلِ وَالْإِنَابَةِ وَالرَّغْبَةِ وَالرَّهْبَةِ، فَلَا يُحَبُّ سِوَاهُ، وَكُلُّ مَا كَانَ يُحَبُّ غَيْرَهُ فَإِنَّمَا يُحَبُّ تَبَعًا لِمَحَبَّتِهِ، وَكَوْنِهِ وَسِيلَةً إِلَى زِيَادَةِ مَحَبَّتِهِ، وَلَا يُخَافُ سِوَاهُ، وَلَا يُرْجَى سِوَاهُ، وَلَا يُتَوَكَّلُ إِلَّا عَلَيْهِ، وَلَا يُرْغَبُ إِلَّا إِلَيْهِ، وَلَا يُرْهَبُ إِلَّا مِنْهُ، وَلَا يُحْلَفُ إِلَّا بِاسْمِهِ، وَلَا يُنْظَرُ إِلَّا لَهُ، وَلَا يُتَابُ إِلَّا إِلَيْهِ، وَلَا يُطَاعُ إِلَّا أَمْرُهُ، وَلَا يُتَحَسَّبُ إِلَّا بِهِ، وَلَا يُسْتَغَاثُ فِي الشَّدَائِدِ إِلَّا بِهِ، وَلَا يُلْتَجَأُ إِلَّا إِلَيْهِ، وَلَا يُسْجَدُ إِلَّا لَهُ، وَلَا يُذْبَحُ إِلَّا لَهُ وَبِاسْمِهِ، وَيَجْتَمِعُ ذَلِكَ فِي حَرْفٍ وَاحِدٍ، وَهُوَ: أَنْ لَا يُعْبَدَ إِلَّا إِيَّاهُ بِجَمِيعِ أَنْوَاعِ الْعِبَادَةِ، فَهَذَا هُوَ تَحْقِيقُ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَلِهَذَا حَرَّمَ اللَّهُ عَلَى النَّارِ مَنْ شَهِدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ حَقِيقَةَ الشَّهَادَةِ، وَمُحَالٌ أَنْ يَدْخُلَ النَّارَ مَنْ تَحَقَّقَ بِحَقِيقَةِ هَذِهِ الشَّهَادَةِ وَقَامَ بِهَا، كَمَا قَالَ تَعَالَى: {وَالَّذِينَ هُمْ بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ} سُورَةُ الْمَعَارِجِ: 33} فَيَكُونُ قَائِمًا بِشَهَادَتِهِ فِي ظَاهِرِهِ وَبَاطِنِهِ، فِي قَلْبِهِ وَقَالَبِهِ

इस कलिमे की असल रूह और हक़ीक़त यह है कि अल्लाह तबारक व तआला को मुहब्बत, ताज़ीम, इकराम, ख़ौफ़, रिजा, तवक्कुल, रुजूअ, रग़बत, हैबत आदि में अकेला माना जाए, यानी उसके सिवा किसी से मुहब्बत न की जाये, अगर उसके अलावा किसी से मुहब्बत हो भी, तो उसकी मुहब्बत के ताबेअ बना कर या उसकी मुहब्बत का ज़रिया समझ कर और उसके सिवा किसी से ख़ौफ़ न रखा जाए, न किसी से उम्मीद रखी जाए, नज़र दी जाए तो उसकी, रुजूअ किया जाए तो उसकी तरफ़, बात मानी जाये तो उसकी, सवाब की उम्मीद की जाये, तो उससे, मुसीबतों में मदद मांगी जाये तो उससे, फ़रयाद की जाये तो उसी से, सजदा किया जाये तो उसी को, ज़िबह कियह जाए तो उसे के लिए और उसी के नाम पर इन सब बातों को एक ही जुमले यूं कहा जा सकता है कि इबादत की कोई भी क़िस्म उसके अलावा किसी के लिए भी न रखी जाए।” यह है ला इलाहा इल्लल्लाह का असल मतलब, यही वजह है कि यह गवाही देने वाले पर आग हराम हो जाती है और जिसने हक़ीक़तन य ह कालिमा पद लिया और उइड पर डटा रहा, उसका आग में दाख़िल होना नामुमकिन है, फ़रमाने इलाही है: वो लोग (जहन्नम से बच जायेंगें) जो अपनी गवाही पर क़ायम रहते हैं।”यानी वो इस गवाही को अपने ज़ाहिर व बातिन और क़ल्ब व क़ालिब पर क़ायम कर लेते हैं(अल-जवाबुल काफ़ी, पेज नंबर 290)

कालिमा ए इख़लास के फ़ज़ीलत के बारे में हदीसें बयान करने के बाद हाफ़िज़ इब्ने रजब रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं:

इस बारे में दो तरह की हदीसें औई हैं, एक तो यह कि जो तौहीद व रिसालत की गवाही देता है, जन्नत में दाख़िल हो जाएगा, इससे रोका नहीं जाएगा, यह तो वाज़ेह है, जबकि दूसरी हदीसों में यह है कि वो आग पर हराम हो जाएगा, कुछ उलमा ने इसे हमेशा रहने पर महमूल किया है, यानी वो हमेशा आग में नही रहेगा, अक्सर उलमा का कहना है कि इन हदीसों की मुराद यह है कि ला इलाहा इल्लल्लाह जन्नत में दाख़ले और आग से निजात का सबब है, लेकिन इसके कुछ तक़ाज़े हैं और यह तब ही अपना काम करेगा, जब उसके तक़ाज़े पूरे हों और ख़िलाफ़ न हों, कभी कभी शर्तें पूरी न होने या रुकावट की मौजूदगी की वजह से यह नाकाम हो जाता है, हसन बसरी और वहब बिन मुनब्बा रहमतुल्लाह अलैहिमा का यही क़ल है और यही बात राजेह है”। (कलिमतुल इख़लास व तहक़ीक़ मअना हा लिब्ने रजब पेज नंबर 12-13)

लिहाज़ा कालिमा ए इख़लास की निम्नलिखित शर्तें हैं:

1.   माना व मफ़हूम का इल्म।”

2.  कामिल यक़ीन।”

3.  ”क़ुबूल।”

4.  इताअत।”

5.  सिद्क़।”

6.  इख़लास।”

7.  मुहब्बत।”

जब कलिमा पढ़ने वाले में यह सब शर्तें मौजूद होंगी तो यह कलिमा फ़ायदेमंद और निजात व कामयाबी की वजह बनेगा।”

हिन्दी तर्जुमा: मुहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

 

Friday, March 19, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-*  وَعَن أنس قَالَ: بَيْنَمَا نَحْنُ فِي الْمَسْجِدِ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ جَاءَ أَعْرَابِيٌّ فَقَامَ يَبُولُ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَهْ مَه قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تَزْرِمُوهُ دَعُوهُ» فَتَرَكُوهُ حَتَّى بَالَ ثُمَّ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ  صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعَاهُ فَقَالَ لَهُ: «إِنَّ هَذِهِ الْمَسَاجِدَ لَا تصلح لشَيْء من هَذَا الْبَوْل وَلَا القذر إِنَّمَا هِيَ لذكر الله عز وَجل وَالصَّلَاةِ وَقِرَاءَةِ الْقُرْآنِ» أَوْ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَأمر رَجُلًا مِنَ الْقَوْمِ فَجَاءَ بِدَلْوٍ مِنْ مَاءٍ فسنه عَلَيْهِ

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मस्जिद में बैठे हुए थे कि इसी दौरान एक देहाती आया और वो खड़ा होकर मस्जिद में पेशाब करने लगा। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सहाबा ने कहा रुक जा रुक जा जबकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “इसका पेशाब न रोको इसे कुछ न कहो छोड़ दो”। तो उन्होंने इसे छोड़ दिया यहाँ तक कि उसने पेशाब कर लिया फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे बुलाकर फ़रमाया: “यह जो मस्जिदें हैं, यह पेशाब और गंदगी आदि के लिए नहीं | यह तो अल्लाह के ज़िक्र नमाज़ और क़ुरआन की क़िराअत के लिए है या फिर जैसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया रावी बयान करते हैं, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन लोगो में से किसी शख़्स को हुक्म फ़रमाया तो वो पानी का डोल ले आया तो आपने वो इस (पेशाब) पर बहा दिया।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (मुझे नहीं मिली), मुस्लिम (661), मिशकातुल मसाबीह (492)]*

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Thursday, March 18, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا شَرِبَ الْكَلْبُ فِي إِنَاء أحدكُم فليغسله سبع مَرَّات»
وَفِى رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: «طَهُورُ إِنَاءِ أَحَدِكُمْ إِذَا وَلَغَ فِيهِ الْكَلْبُ أَنْ يَغْسِلَهُ سَبْعَ مَرَّاتٍ أولَاهُنَّ بِالتُّرَابِ»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब कुत्ता तुम्हारे किसी शख़्स के बर्तन में से पी ले तो उसे सात मर्तबा धो”। बुखा़री, मुस्लिम।
और मुस्लिम की रिवायत में है: “जब कुत्ता तुम्हारे किसी शख़्स के बर्तन में मुंह डाल दे तो उस बर्तन की पाकीज़गी इस तरह हासिल होगी कि उसे सात मर्तबा धोया जाए उनमें से पहली मर्तबा मिट्टी से साफ़ किया जाए”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (172), मुस्लिम (650,651), मिशकातुल मसाबीह (490)]*

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Tuesday, March 16, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن كَبْشَة بنت كَعْب بن مَالك وَكَانَتْ تَحْتَ ابْنِ أَبِي قَتَادَةَ: أَنَّ أَبَا قَتَادَة دخل فَسَكَبَتْ لَهُ وَضُوءًا فَجَاءَتْ هِرَّةٌ تَشْرَبُ مِنْهُ فَأَصْغَى لَهَا الْإِنَاءَ حَتَّى شَرِبَتْ قَالَتْ كَبْشَةُ فَرَآنِي أَنْظُرُ إِلَيْهِ فَقَالَ أَتَعْجَبِينَ يَا ابْنَةَ أخي فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّهَا لَيست بِنَجس إِنَّهَا من الطوافين عَلَيْكُم والطوافات» . رَوَاهُ مَالِكٌ وَأَحْمَدُ وَالتِّرْمِذِيُّ
وَأَبُو دَاوُدَ وَالنَّسَائِيُّ وَابْنُ مَاجَهْ وَالدَّارِمِيُّ

🍁 *तर्जुमा :-* अबू क़तादा के बेटे की बीवी कब्शह बिन्ते कअब बिन मालिक से रिवायत है कि अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अन्हु उनके पास तशरीफ़ लाए तो उसने उनके वुज़ू के लिए बर्तन में पानी डाला, इतने में एक बिल्ली आकर उससे पीने लगी तो उन्होंने उसके लिए बर्तन झुका दिया यहाँ तक कि उसने पी लिया, कब्शह बयान करती हैं, उन्होंने मुझे देखा कि मैं उनकी तरफ़ देख रही हूँ, तो उन्होंने ने फ़रमाया: भतीजी! क्या तुम तअज्जुब करती हो? वो बयान करती हैं, मैंने कहा: जी हाँ, उन्होंने कहा: कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “यह नजिस नहीं, बिल्ली तो उन जानवरों में से है जो तुम्हारे बीच घूमती फिरती हैं”। 

📚 *[इसकी सनद सहीह है, मोअत्ता इमाम मालिक (41), मुसनद अहमद (22950), तिरमिज़ी (92), अबू दावुद (75), नसाई (341), इब्ने माजा (367), दारमी (736) मिशकातुल मसाबीह (482)]*

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Monday, March 15, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: سَأَلَ رَجُلٌ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَرْكَبُ الْبَحْرَ وَنَحْمِلُ مَعَنَا الْقَلِيلَ مِنَ الْمَاءِ فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا أفنتوضأ من مَاء الْبَحْرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ الْحِلُّ مَيْتَتُهُ» . رَوَاهُ مَالك وَالتِّرْمِذِيّ وَالنَّسَائِيّ وَابْن مَاجَه والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, किसी आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, हम समुंदरी सफ़र करते हैं और थोड़ा पानी अपने साथ ले जाते हैं, अगर हम इससे वुज़ू करते हैं तो फिर प्यासे रह जाते हैं, तो क्या हम समुन्दर के पानी से वुज़ू कर लिया करें? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “उसका पानी पाक है और उसका मुरदार हलाल है”।

📚 *[इसकी सनद सहीह है, मोअत्ता इमाम मालिक (40), तिरमिज़ी (69), नसाई (59), इब्ने माजा (386), दारमी (735), अबू दावूद (83), मिशकातुल मसाबीह (479)]*

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Sunday, March 14, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا يَبُولَنَّ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ الَّذِي لَا يجْرِي ثمَّ يغْتَسل فِيهِ»
وَفِى رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ قَالَ: «لَا يَغْتَسِلُ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ وَهُوَ جُنُبٌ» . قَالُوا: كَيْفَ يَفْعَلُ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ؟ قَالَ: يَتَنَاوَلُهُ تَنَاوُلًا

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुममें से कोई शख़्स खड़े पानी में जोकि बहता ना हो, पेशाब ना करे, फिर वो उसमें ग़ुस्ल करे”। और मुस्लिम की रिवायत में है: “तुममें से कोई शख़्स खड़े पानी में जनाबत का ग़ुस्ल ना करे”। लोगो ने पूछा: अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु वो कैसे करे? फ़रमाया: वो वहाँ से पानी लें और (दूसरी जगह पर ग़ुस्ल करें)।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (239), मुस्लिम (657,658), मिशकातुल मसाबीह (474)]*

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Saturday, March 13, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن يعلى: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَجُلًا يَغْتَسِلُ بِالْبَرَازِ فَصَعِدَ الْمِنْبَرَ فَحَمِدَ الله وَأثْنى عَلَيْهِ وَقَالَ: «إِن الله عز وَجل حييّ حييّ ستير يحب الْحيَاء والستر فَإِذَا اغْتَسَلَ أَحَدُكُمْ فَلْيَسْتَتِرْ» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَالنَّسَائِيُّ وَفِي رِوَايَتِهِ قَالَ: «إِنَّ اللَّهَ سِتِّيرٌ فَإِذَا أَرَادَ أَحَدُكُمْ أَنْ يَغْتَسِلَ فَلْيَتَوَارَ بِشَيْءٍ»

🍁 *तर्जुमा :-* यअला रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किसी शख़्स को खुले मैदान में (नंगे) ग़ुस्ल करते हुए देखा, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मिम्बर पर तशरीफ़ लाए और अल्लाह की हम्द ओ सना बयान की, फिर फ़रमाया: “बेशक अल्लाह हयादार, पर्दा-पोशी करने वाला है, वो हयादारी और पर्दा-पोशी को पसंद करता है, तो जब तुममे से कोई नहाए तो वो पर्दा करे”। अबू दावूद, नसाई।
और नसाई की एक रिवायत में है: “बेशक अल्लाह पर्दा-पोशी करने वाला है, तो जब तुममें से कोई ग़ुस्ल करना चाहे तो वह किसी चीज़ से पर्दा करले।

📚 *[सहीह, अबू दावूद (4012), नसाई (406), मिशकातुल मसाबीह (447)]*

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Wednesday, March 10, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: كُنْتُ أَغْتَسِلُ أَنَا وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ إِنَاءٍ بيني وَبَينه وَاحِد فَيُبَادِرُنِي حَتَّى أَقُولَ دَعْ لِي دَعْ لِي قَالَت وهما جنبان 

🍁 *तर्जुमा :-* मुआज़ह बयान करती हैं, आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया: मैं और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बर्तन से, जो कि हमारे बीच होता था, ग़ुस्ल किया करते थे, आप मुझसे जल्दी पानी लेते थे यहाँ तक कि मैं कहती: मेरे लिए (पानी) रहने दें, मेरे लिए रहने दें, जबकि वो दोनों जुनुबी होते थे।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (250), मुस्लिम (732), मिशकातुल मसाबीह (440)]*

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Monday, March 8, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَتْ قُلْتُ: يَا رَسُولَ الله إِنِّي امْرَأَة أَشد ضفر رَأْسِي فأنقضه لغسل الْجَنَابَة قَالَ «لَا إِنَّمَا يَكْفِيكِ أَنْ تَحْثِي عَلَى رَأْسِكِ ثَلَاثَ حَثَيَاتٍ ثُمَّ تُفِيضِينَ عَلَيْكِ الْمَاءَ فَتَطْهُرِينَ» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, मैंने कहा: अल्लाह के रसूल! मैं एक ऐसी औरत हूँ कि मैं अपने सर के बालो को मज़बूत गूंधती हूँ, तो क्या मैं जनाबत के ग़ुस्ल के लिए इसे खोल दिया करूँ? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नहीं, तुम्हारे लिए यही काफी है कि तुम अपने सर पर तीन चुल्लू पानी डालो, फिर अपने जिस्म पर पानी बहा लो, तो तुम पाक हो जाओगी”।

📚 *[मुस्लिम (744), मिशकातुल मसाबीह (438)]*

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Wednesday, March 3, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-*  وَعَن ابْن عَبَّاس قَالَ قَالَتْ مَيْمُونَةُ: وَضَعْتُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غُسْلًا فَسَتَرْتُهُ بِثَوْبٍ وَصَبَّ عَلَى يَدَيْهِ فَغَسَلَهُمَا ثُمَّ صَبَّ بِيَمِينِهِ عَلَى شَمَالِهِ فَغَسَلَ فَرْجَهُ فَضَرَبَ بِيَدِهِ الْأَرْضَ فَمَسَحَهَا ثُمَّ غَسَلَهَا فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ وَغَسَلَ وَجْهَهُ وَذِرَاعَيْهِ ثُمَّ صَبَّ عَلَى رَأْسِهِ وَأَفَاضَ عَلَى جَسَدِهِ ثُمَّ تَنَحَّى فَغَسَلَ قَدَمَيْهِ فَنَاوَلْتُهُ ثَوْبًا فَلَمْ يَأْخُذْهُ فَانْطَلق وَهُوَ ينفض يَدَيْهِ. وَلَفظه للْبُخَارِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं, मयमूना रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया: मैंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए ग़ुस्ल करने के लिए पानी रखा और एक कपड़े से आप पर परदा किया, आपने अपने दोनों हाथो पर पानी डाला, तो उन्हें धोया, फिर आपने अपने हाथो पर पानी डाला, तो उन्हें धोया, फिर अपने दाएं हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डाल कर शर्मगाह को धोया, फिर आपने अपना हाथ ज़मीन पर मला और इसे धोया, फिर आपने कुल्ली की, नाक में पानी डाला, अपना चेहरा और बाज़ू धोए, फिर सर पर पानी डाला और सारे जिस्म पर पानी बहाया, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस जगह से हट कर पाँव धोएं, मैंने आपको कपड़ा दिया लेकिन आप ने ना लिया, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हाथो से पानी साफ़ करते तशरीफ़ ले गए और यह अल्फाज़ बुख़ारी के हैं।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (276), मुस्लिम (722), मिशकातुल मसाबीह (436)]*

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Thursday, February 25, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن عَائِشَةُ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: كَانَ إِذَا اغْتَسَلَ مِنَ الْجَنَابَةِ بَدَأَ فَغَسَلَ يَدَيْهِ ثُمَّ يَتَوَضَّأُ كَمَا يَتَوَضَّأُ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ يُدْخِلُ أَصَابِعَهُ فِي الْمَاءِ فَيُخَلِّلْ بِهَا أُصُولَ شَعَرِهِ ثمَّ يصب على رَأسه ثَلَاث غرف بيدَيْهِ ثمَّ يفِيض المَاء على جلده كُله
وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: يَبْدَأُ فَيَغْسِلُ يَدَيْهِ قَبْلَ أَنْ يُدْخِلَهُمَا الْإِنَاءَ ثُمَّ يُفْرِغُ بِيَمِينِهِ عَلَى شِمَاله فَيغسل فرجه ثمَّ يتَوَضَّأ

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जनाबत (नापाकी) का ग़ुस्ल करते, तो आप सबसे पहले हाथ धोते, फिर वुज़ू करते जैसे नमाज़ के लिए वुज़ू किया जाता है,फिर अपने उंगलिया पानी में दाख़िल करते और उससे अपने बालो की जड़ो का ख़िलाल करते, फिर अपने सर पर तीन चुल्लू पानी डालते, फिर अपने पूरे जिस्म पर पानी बहाते।
और मुस्लिम की रिवायत में है: आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ग़ुस्ल करते, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने हाथो को किसी बर्तन में डालने से पहले धोते, फिर अपने दाएं हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डालते और अपने शर्मगाह को धोते, फिर वुज़ू करते। 

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (248), मुस्लिम (718), मिशकातुल मसाबीह (435)]*

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Sunday, February 21, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن مُحَمَّد بن يحيى بن حبَان الْأنْصَارِيّ ثمَّ الْمَازِني مَازِن بني النجار عَن عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ قلت لَهُ أَرَأَيْتَ وُضُوءَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ لِكُلِّ صَلَاةٍ طَاهِرًا كَانَ أَوْ غَيْرَ طَاهِرٍ عَمَّنْ أَخَذَهُ؟ فَقَالَ: حَدَّثَتْهُ أَسْمَاءُ بِنْتُ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ حَنْظَلَةَ بْنِ أبي عَامر ابْن الْغَسِيلِ حَدَّثَهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ أُمِرَ بِالْوُضُوءِ لِكُلِّ صَلَاةٍ طَاهِرًا كَانَ أَوْ غَيْرَ طَاهِرٍ فَلَمَّا شَقَّ ذَلِكَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرَ بِالسِّوَاكِ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍ وَوُضِعَ عَنْهُ الْوُضُوءُ إِلَّا مِنْ حَدَثٍ قَالَ فَكَانَ عَبْدُ اللَّهِ يَرَى أَنَّ بِهِ قُوَّةً عَلَى ذَلِكَ كَانَ يَفْعَله حَتَّى مَاتَ. رَوَاهُ أَحْمد

🍁 *तर्जुमा :-* मुहम्मद बिन याहया बिन हब्बान रहमतुल्लाह अलैह बयान करते हैं, मैंने उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर से कहा: क्या तुमने अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा को हर नमाज़ के लिए वुज़ू करते हुए देखा है चाहे वो पहले ही वुज़ू से हों या बे वुज़ू और उन्होंने यह मसअला कहाँ से लिया है? उन्होंने कहा: अस्मा बिन्ते ज़ैद बिन ख़त्ताब ने उन्हें हदीस बयान की कि अब्दुल्लाह बिन हन्ज़लह बिन अबी आमिर अल ग़सील ने उन्हें हदीस बयान की कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को वुज़ू होने या वुज़ू ना होने हर हाल में हर नमाज़ के लिए वुज़ू करने का हुक्म दिया गया, तो जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर यह अमल मुश्किल हुआ, तो आपको हर नमाज़ के वक़्त मिस्वाक करने का हुक्म दिया गया और वुज़ू का हुक्म ख़त्म कर दिया गया जबकि वुज़ू ना होने की सूरत में वुज़ू करने का हुक्म बाक़ी रहा। रावी बयान करते हैं, अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु समझते थे कि उन्हें हर नमाज़ के लिए नया वुज़ू करने की ताक़त है लिहाज़ा वो मरते दम तक इस पर अमल करते रहे।

📚 *[इसकी सनद हसन है, मुसनद अहमद (22306),अबू दावूद (48), सहीह इब्ने ख़ुज़मा (15), मुस्तदरक हाकिम (1/156), मिशकातुल मसाबीह (426)]*

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Friday, February 19, 2021

🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ وَكَانَ أَحَدُنَا يَكْفِيهِ الْوُضُوءُ مَا لَمْ يُحْدِثْ. رَوَاهُ الدِّرَامِي

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर नमाज़ के लिए वुज़ू किया करते थे, जबकि हमारे किसी के लिए (पहला) वुज़ू काफ़ी रहता है जब तक उसका वुज़ू ना टूटे।

📚 *[दारमी (726), बुखारी (214), मिशकातुल मसाबीह (425)]*

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Sunday, February 14, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن عبد الله بن الْمُغَفَّل أَنه سمع ابْنه يَقُول: الله إِنِّي أَسْأَلُكَ الْقَصْرَ الْأَبْيَضَ عَنْ يَمِينِ الْجَنَّةِ قَالَ: أَيْ بُنَيَّ سَلِ اللَّهَ الْجَنَّةَ وَتَعَوَّذْ بِهِ مِنَ النَّارِ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُول: «إِنَّه سَيكون فِي هَذِهِ الْأُمَّةِ قَوْمٌ يَعْتَدُونَ فِي الطَّهُورِ وَالدُّعَاءِ» . رَوَاهُ أَحْمَدُ وَأَبُو دَاوُدَ وَابْنُ مَاجَهْ

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन मुग़फ़्फ़ल रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने अपने बेटे को दुआ करते हुए सुना: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत के दाएं तरफ़ सफ़ेद महल की दरख्वास्त करता हूँ, तो उन्होंने ने फ़रमाया: बेटा! अल्लाह से जन्नत मांगा करो और जहन्नम से उसकी पनाह तलब करो, क्यूंकि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फ़रमाते हुए सुना: “मेरी उम्मत में कुछ ऐसे लोग होंगे जो वुज़ू (बदन के वुजू के हिस्से धोने में) और दुआ करने में हद से तजावुज़ करेंगे”।

📚 *[सहीह, मुसनद अहमद (16924), अबू दावूद (96), इब्ने माजा (3864), सहीह इब्ने हिब्बान 171,172), मिशकातुल मसाबीह (418)]*

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Friday, February 12, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جده قَالَ: جَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْأَلُهُ عَنِ الْوُضُوءِ فَأَرَاهُ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ: «هَكَذَا الْوُضُوءُ فَمَنْ زَادَ عَلَى هَذَا فَقَدْ أَسَاءَ وَتَعَدَّى وَظَلَمَ» . رَوَاهُ النَّسَائِيُّ وَابْنُ مَاجَهْ وَرَوَى أَبُو دَاوُدَ مَعْنَاهُ

🍁 *तर्जुमा :-* अम्र बिन शुऐब अपने बाप से और वो अपने दादा से रिवायत करते हैं कि एक देहाती नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और उसने आपसे वुज़ू के बारे में पुछा तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीन तीन मर्तबा बदन के वुजू के हिस्से को धो कर इसे दिखाए, फिर फ़रमाया: “इस तरह (मुकम्मल) वुज़ू है, तो जिसने इससे ज़्यादा मर्तबा किया उसने बुरा किया, हद से तजावुज़ किया और ज़ुल्म किया”। नसाई, इब्ने माजा जबकि अबू दावुद ने इसी मायने में रिवायत किया है।

📚 *[इसकी सनद हसन है, नसाई (140), इब्ने माजा (422), अबू दावुद (135), {इब्ने ख़ुज़ैमा: 174} , मिशकातुल मसाबीह (417)]*

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Tuesday, February 9, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ: أَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ وَأَنَّهُ مَسَحَ رَأْسَهُ بِمَاءٍ غَيْرِ فَضْلِ يَدَيْهِ. رَوَاهُ التِّرْمِذِيّ وَرَوَاهُ مُسلم مَعَ زَوَائِد 

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि आपने वुज़ू किया और यह कि आपने अपने हाथो के साथ लगे हुए पानी के अलावा अलग पानी से सर का मसाह किया। तिरमिज़ी जबकि मुस्लिम ने कुछ ज़्यादती के साथ रिवायत किया है।

📚 *[सहीह, तिरमिज़ी (35), मुस्लिम (559), मिशकातुल मसाबीह (415)]*

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Saturday, February 6, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَسَحَ بِرَأْسِهِ وَأُذُنَيْهِ: بَاطِنَهُمَا بِالسَّبَّاحَتَيْنِ وَظَاهِرَهُمَا بإبهاميه)
(رَوَاهُ النَّسَائِيّ)

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने सर का मसाह किया और आपने कानो के अन्दर के हिस्सों का शहादत की उंगलियों से और बाहर के हिस्सों का अंगूठो से मसाह किया।

📚 *[इसकी सनद हसन है, नसाई (102), तिरमिज़ी (36), इब्ने माजा (439), मिशकातुल मसाबीह (413)]*

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Friday, February 5, 2021

Ek Hi Chullu Se Kulli Aur Naak Mein Pani Dalne Ka Bayan (एक ही चुल्लू से कुल्ली और नाक में पानी डालने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن عبد الله بن زيد قَالَ: رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ مِنْ كَفٍّ وَاحِدَةٍ فَعَلَ ذَلِك ثَلَاثًا. رَوَاهُ أَبُو دَاوُد وَالتِّرْمِذِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि आपने एक ही चुल्लू से कुल्ली की और नाक में पानी डाला और आपने तीन मर्तबा ऐसे ही किया।

📚 *[इसकी सनद सहीह है, अबू दावुद (119), तिरमिज़ी (28), मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (191), मुस्लिम (555), मिशकातुल मसाबीह (412)]*

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Thursday, February 4, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن الْمُسْتَوْرد بن شَدَّاد قَالَ: رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا تَوَضَّأَ يُدَلِّكُ أَصَابِعَ رِجْلَيْهِ بِخِنْصَرِهِ. رَوَاهُ التِّرْمِذِيّ وَأَبُو دَاوُد وَابْن مَاجَه

🍁 *तर्जुमा :-* : मसतूर बिन शद्दाद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वुज़ू करते, तो अपने छोटी उंगली के साथ पाँव की उंगलियों को ख़ूब मलते।

📚 *[सहीह, तिरमिज़ी (40), अबू दावूद (148), इब्ने माजा (446), मिशकातुल मसाबीह (407)]*

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Tuesday, February 2, 2021

Ungliyon Ka Khilaal Karna (उंगलियों का ख़िलाल करना)

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🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا تَوَضَّأْتَ فَخَلِّلْ بَيْنَ أَصَابِعِ يَدَيْكَ وَرِجْلَيْكَ» . رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ. وَرَوَى ابْنُ مَاجَهْ نَحْوَهُ وَقَالَ التِّرْمِذِيُّ: هَذَا حَدِيثٌ غَرِيب

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम वुज़ू करो तो अपने हाथो और अपने पाँव की उंगलियों का ख़िलाल करो”। तिरमिज़ी, इब्ने माजा ने भी इसी तरह रिवायत किया है और तिरमिज़ी ने फ़रमाया: यह हदीस ग़रीब है।

📚 *[ हसन, तिरमिज़ी (39), इब्ने माजा (447), मिशकातुल मसाबीह (406)]*

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Friday, January 29, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ لَقِيطِ بْنِ صَبِرَةَ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي عَنِ الْوُضُوءِ. قَالَ: «أَسْبِغِ الْوُضُوءَ وَخَلِّلْ بَيْنَ الْأَصَابِعِ وَبَالِغْ فِي الِاسْتِنْشَاقِ إِلَّا أَنْ تَكُونَ صَائِمًا» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَالتِّرْمِذِيُّ وَالنَّسَائِيُّ وَرَوَى ابْنُ مَاجَه والدارمي إِلَى قَوْله: بَين الْأَصَابِع

🍁 *तर्जुमा :-* लक़ीत बिन सबिरह रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, मैंने अर्ज़ किया: अल्लाह के रसूल! मुझे वुज़ू के बारे में बताइए, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वुज़ू अच्छी तरह करो, उंगलियों के दरमियान ख़िलाल करो और रोज़े की हालत के अलावा नाक में पानी ख़ूब चढ़ाओ”। अबू दावुद, तिरमिज़ी, नसाई और इब्ने माजा और दारमी ने ((بَيْنَ الْأَصَابِعِ)) तक रिवायत किया है।

📚 *[सहीह, अबू दावूद (142), तिरमिज़ी (788), नसाई (87,114), इब्ने माजा (407,448), दारमी (711), सहीह ख़ुज़ैमा (150,168), इब्ने हिब्बान (अल-मवारिद: 159), हाकिम (1/147,148), मिशकातुल मसाबीह (405)]*

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Wednesday, January 27, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحِبُّ التَّيَمُّنَ مَا اسْتَطَاعَ فِي شَأْنِهِ كُلِّهِ: فِي طهوره وَترَجله وتنعله

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने तमाम काम (मसलन) वुज़ू करने, कंघी करने और जूता पहनने में जहाँ तक मुमकिन होता दाएं तरफ़ से शुरू करना पसंद किया करते थे।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (426), मुस्लिम (617), मिशकातुल मसाबीह (400)]*

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Monday, January 25, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن الْمُغيرَة بن شُعْبَة قَالَ: إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ فَمَسَحَ بِنَاصِيَتِهِ وَعَلَى الْعِمَامَةِ وَعَلَى الْخُفَّيْنِ. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* मुग़ीरा बिन शोअबा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं की नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वुज़ू किया तो आपने अपनी पेशानी, अमामा और मोज़ो पर मसाह किया। 

📚 *[मुस्लिम (636), मिशकातुल मसाबीह (399)]*

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Sunday, January 24, 2021

Achchi Tarah Wuzu Karna (अच्छी तरह वुज़ू करना)

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🍁 *حدیث:-* وَعَن عبد الله بن عَمْرو قَالَ: رَجَعْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ مَكَّةَ إِلَى الْمَدِينَةِ حَتَّى إِذا كُنَّا بِمَاء بِالطَّرِيقِ تعجل قوم عِنْد الْعَصْر فتوضؤوا وهم عِجَال فَانْتَهَيْنَا إِلَيْهِم وَأَعْقَابُهُمْ تَلُوحُ لَمْ يَمَسَّهَا الْمَاءُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «وَيْلٌ لِلْأَعْقَابِ من النَّار أَسْبغُوا الْوضُوء» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मक्का से मदीना वापस आ रहे थे यहाँ तक कि हम रास्ते में पानी के पास से गुज़रे, कुछ लोगो ने अस्र की नमाज़ के लिए जल्दी की, तो उन्होंने जल्दी में वुज़ू किया। जब हम उनके पास पहुँचें तो देखा कि उनकी एड़िया (सूखी होने की वजह से) चमक रही थी, इन तक पानी नहीं पहुंचा था, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “एड़ियो के लिए जहन्नम की आग है, वुज़ू खूब अच्छी तरह मुकम्मल करो”।

📚 *[मुस्लिम (570), मिशकातुल मसाबीह (398)]*

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Saturday, January 23, 2021

Wuzu Ka Tareeqa (वुज़ू का तरीक़ा)

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🍁 *حدیث:-* وَفِي الْمُتَّفَقِ عَلَيْهِ: قِيلَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ: تَوَضَّأْ لَنَا وُضُوءَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَدَعَا بِإِنَاءٍ فَأَكْفَأَ مِنْهُ عَلَى يَدَيْهِ فَغَسَلَهُمَا ثَلَاثًا ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ مِنْ كَفٍّ وَاحِدَةٍ فَفَعَلَ ذَلِكَ ثَلَاثًا ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَغَسَلَ يَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَمَسَحَ بِرَأْسِهِ فَأَقْبَلَ بِيَدَيْهِ وَأَدْبَرَ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثُمَّ قَالَ هَكَذَا كَانَ وُضُوءُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
وَفِي رِوَايَةٍ: فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ بَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ ثُمَّ ذَهَبَ بِهِمَا إِلَى قَفَاهُ ثُمَّ رَدَّهُمَا حَتَّى رَجَعَ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي بَدَأَ مِنْهُ ثُمَّ غَسَلَ رجلَيْهِ
وَفِي رِوَايَة: فَمَضْمض واستنشق واستنثر ثَلَاثًا بِثَلَاث غَرَفَاتٍ مِنْ مَاءٍ
وَفِي رِوَايَةٍ أُخْرَى: فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ مِنْ كَفَّةٍ وَاحِدَةٍ فَفَعَلَ ذَلِكَ ثَلَاثًا
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: فَمَسَحَ رَأْسَهُ فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ مَرَّةً وَاحِدَةً ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ إِلَى الْكَعْبَيْنِ
وَفِي أُخْرَى لَهُ: فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْثَرَ ثَلَاثَ مَرَّات من غرفَة وَاحِدَة

🍁 *तर्जुमा :-* और सहीहैन में है की अब्दुल्लाह बिन ज़ैद बिन आसिम रज़ियल्लाहू अन्हु से कहा गया कि हमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वुज़ू करके दिखाइए, तो उन्होंने पानी का एक बर्तन मंगवाया और उसमें से कुछ पानी अपने हाथो पर उंडेला और उन्हें तीन मर्तबा धोया, फिर अपने हाथ को पानी के बर्तन में डाला और उसमें पानी लेकर एक ही चुल्लू से कुल्ली की और नाक में पानी डाला, उन्होंने यह तीन मर्तबा किया, फिर उन्होंने अपना हाथ बर्तन में डाल कर इससे पानी निकाला और तीन मर्तबा अपना चेहरा धोया, फिर अपना हाथ बर्तन में डाला और पानी निकाल कर दो दो मर्तबा हाथो को कहोनियो समेत धोया, फिर अपना हाथ बर्तन में डाल कर इससे और पानी निकाल कर अपने सर का मसाह किया, अपने हाथो को आगे ले गए और वापस लाए, फिर उन्होंने टख़नो तक पाँव धोए, फिर उन्होंने फ़रमाया: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वुज़ू इसी तरह था। एक रिवायत में है सर का मसाह करते वक़्त हाथो को सर की अगली तरफ़ से गुद्दी तक ले गए और फिर उन्हे वहीँ वापस ले आए जहाँ से शुरू किया था, फिर अपने दोनों पाँव धोए। एक दूसरी रिवायत में है: आपने तीन मर्तबा कुल्ली की, नाक में पानी डाला और नाक झाड़ी और ऐसा तीन चुल्लू पानी के साथ किया। एक और रिवायत में है: आपने एक चुल्लू के साथ ही कुल्ली की और नाक में पानी डाला और आपने ऐसा तीन मर्तबा किया। बुख़ारी की रिवायत में है: आपने सर का मसाह किया, आप हाथो को आगे ले गए और वापस लाए, आपने यह एक मर्तबा किया, फिर आपने टख़नो तक दोनों पाँव धोए और बुख़ारी की दूसरी रिवायत में है: आपने एक ही चुल्लू से तीन मर्तबा कुल्ली की और नाक झाड़ी।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (185,186,191,192,199), मुस्लिम (555), मिशकातुल मसाबीह (394)]*

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Friday, January 22, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ مَنَامه فليستنثر ثَلَاثًا فَإِن الشَّيْطَان يبيت على خيشومه»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़्स नींद से जाग कर वुज़ू करे तो वो तीन मर्तबा नाक झाड़े, क्यूंकि शैतान इसकी नाक में रात बसर करता है”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (3295), मुस्लिम (564), मिशकातुल मसाबीह (392)]*

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Thursday, January 21, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ فَلَا يَغْمِسْ يَدَهُ فِي الْإِنَاءِ حَتَّى يَغْسِلَهَا فَإِنَّهُ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई नींद से जागे हो तो वो अपना हाथ बर्तन में ना डाले यहाँ तक कि इसे तीन मर्तबा धो ले, क्यूंकि वो नहीं जानता कि इसके हाथ ने रात कहाँ गुज़ारी है”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (162), मुस्लिम (643), मिशकातुल मसाबीह (391)]*

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Wednesday, January 20, 2021

Miswak Ki Fazeelat (मिस्वाक की फ़ज़ीलत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَقَدْ أَكْثَرْتُ عَلَيْكُمْ فِي السِّوَاك» رَوَاهُ البُخَارِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मैंने तुम्हें मिस्वाक के बारे में बहुत मर्तबा कहा है”। 

📚 *[बुखा़री (888), मिशकातुल मसाबीह (387)]*

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Tuesday, January 19, 2021

Bade Shakhs Ko Miswak Dene Ka Bayan (बड़े शख़्स को मिस्वाक देने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: أَرَانِي فِي الْمَنَامِ أَتَسَوَّكُ بِسِوَاكٍ فَجَاءَنِي رَجُلَانِ أَحَدُهُمَا أَكْبَرُ مِنَ الْآخَرِ فَنَاوَلْتُ السِّوَاكَ الْأَصْغَرَ مِنْهُمَا فَقِيلَ لي: كبر فَدَفَعته إِلَى الْأَكْبَر مِنْهُمَا  

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मैंने अपने आपको ख़्वाब में मिस्वाक करते हुए देखा तो इस दौरान दो आदमी मेरे पास आए, उनमें से एक दुसरे से बड़ा था, मैंने उनमें से छोटे को मिस्वाक दे दिया, तो मुझे कहा गया: बड़े को दो, तो मैंने बड़े को दे दिया”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (246), मुस्लिम (5933), मिशकातुल मसाबीह (385)]*

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Monday, January 18, 2021

Miswak Dhone Ka Bayan (मिस्वाक धोने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهَا قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْتَاكُ فَيُعْطِينِي السِّوَاكَ لِأَغْسِلَهُ فَأَبْدَأُ بِهِ فَأَسْتَاكُ ثُمَّ أَغْسِلُهُ وَأَدْفَعُهُ إِلَيْهِ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُد

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मिस्वाक किया करते थे, फिर आप मिस्वाक मुझे दे देते ताकि मैं इसे धो दूँ तो मैं धोने से पहले खुद मिस्वाक करती, फिर इसे धो कर आपको लौटा देती”।

📚 *[हसन, अबू दावुद (53), मिशकातुल मसाबीह (384)]*

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Sunday, January 17, 2021

Miswak Allah Ki Raza Ka Zariya (मिस्वाक अल्लाह की रज़ा का ज़रिया)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ» . رَوَاهُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَالدَّارِمِيُّ وَالنَّسَائِيُّ وَرَوَاهُ البُخَارِيّ فِي صَحِيحه بِلَا إِسْنَاد

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मिस्वाक मुंह को साफ़ करने वाली और रब की रज़ामंदी का ज़रिया है”। शाफ़ई, अहमद, दारमी, नसाई और इमाम बुख़ारी ने इसे अपने सहीह में मुअल्लक बयान किया है।

📚 *[सहीह, अश-शाफ़ई फ़िल उम (1/23), मुसनद अहमद (24707), दारमी (690), नसाई (5), बुख़ारी (1934 हदीस से पहले मुअल्लकन), मिशकातुल मसाबीह (381)]*

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Saturday, January 16, 2021

Fitri Khoobiyan (फ़ितरी खूबियाँ)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: قَالَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: عَشْرَ مِنَ الْفِطْرَةِ: قَصُّ الشَّارِبِ وَإِعْفَاءُ اللِّحْيَةِ وَالسِّوَاكُ وَاسْتِنْشَاقُ الْمَاءِ وَقَصُّ الْأَظْفَارِ وَغَسْلُ الْبَرَاجِمِ وَنَتْفُ الْإِبِطِ وَحَلْقُ الْعَانَةِ وَانْتِقَاصُ الْمَاءِ)
يَعْنِي الِاسْتِنْجَاءَ - قَالَ الرَّاوِي: ونسيت الْعَاشِرَة إِلَّا أَن تكون الْمَضْمَضَة. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “दस ख़ूबियाँ फ़ितरत से हैं: मूंछें कतरना, दाढ़ी बढ़ाना, मिस्वाक करना, नाक में पानी झाड़ना, नाख़ून कतरना, उंगलियों के जोड़ धोना, बगलों के बाल उखेड़ना, नाफ़ की नीचे के बाल मूंडना और इस्तिंजा करना, रावी बयान करते हैं, दसवी ख़ूबी मैं भूल गया हूँ, मुमकिन है कि कुल्ली करना हो।

📚 *[मुस्लिम (604), मिशकातुल मसाबीह (379)]*

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Friday, January 15, 2021

Aadmi Raat Ko Uthe To Miswak Kare (आदमी रात को उठे तो मिस्वाक नमस्ते करे)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ حُذَيْفَةَ قَالَ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ لِلتَّهَجُّدِ مِنَ اللَّيْلِ يَشُوصُ فَاهُ بِالسِّوَاكِ

🍁 *तर्जुमा :-* हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात में तहज्जुद के लिए उठते, तो आप मिस्वाक से अपने मुंह को साफ़ करते।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (245), मुस्लिम (593), मिशकातुल मसाबीह (378)]*

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Thursday, January 14, 2021

Miswak Karne Ka Bayan (मिस्वाक करने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن شُرَيْح بن هَانِئ قَالَ: سَأَلْتُ عَائِشَةَ: بِأَيِّ شَيْءٍ كَانَ يَبْدَأُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دخل بَيته؟ قَالَت: بِالسِّوَاكِ. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* शुरैह बिन हानी रहमतुल्लाह अलैह बयान करते हैं, मैंने आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा से पूछा, जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम घर तशरीफ़ लाते, तो आप सबसे पहले कौन सा काम किया करते थे? उन्होंने ने फ़रमाया: मिस्वाक। 

📚 *[मुस्लिम (589), मिशकातुल मसाबीह (377)]*

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Wednesday, January 13, 2021

Miswak Karna (मिस्वाक करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي لَأَمَرْتُهُمْ بِتَأْخِيرِ الْعشَاء وبالسواك عِنْد كل صَلَاة»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अगर मुझे अपनी उम्मत पर मशक़्क़त का डर ना होता तो मैं उन्हें इशा की नमाज़ देर से पढ़ने और हर नमाज़ के साथ मिस्वाक करने का हुक्म देता।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (887), मुस्लिम (589), मिशकातुल मसाबीह (376)]*

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https://authenticmessages.blogspot.com/2021/01/miswak-karna.html

Tuesday, January 12, 2021

Rasoolullah Sallaahu Alaihi Wasallam Ne Har Choti Badi Cheez Ki Taleem Di (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हर छोटी बड़ी चीज़ की तालीम दी)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن سلمَان قَالَ قَالَ لَهُ بعض الْمُشْركين وَهُوَ يستهزئ بِهِ إِنِّي لأرى صَاحبكُم يعلمكم كل شَيْء حَتَّى الخراءة قَالَ أَجَلْ أَمَرَنَا أَنْ لَا نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ وَلَا نَسْتَنْجِيَ بِأَيْمَانِنَا وَلَا نَكْتَفِيَ بِدُونِ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ لَيْسَ فِيهَا رَجِيعٌ وَلَا عَظْمٌ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ وَأحمد وَاللَّفْظ لَهُ

🍁 *तर्जुमा :-* सलमान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, किसी मुशरिक ने मज़ाक़ में कहा: मेरा ख़याल है की तुम्हारा साथी (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम्हें पेशाब व पाख़ाने के आदाब भी सिखाता है? मैंने कहा: हाँ, बिल्कुल ठीक है। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें हुक्म दिया है कि हम पेशाब व पाख़ाने के वक़्त क़िब्ले की तरफ़ मुंह न करे और ना दाए हाथ से इस्तिंजा करे और हम (इस्तिंजा के लिए) तीन ढ़ेलों से कम इस्तेमाल ना करें और उनमें गोबर और हड्डी ना हो”। इसे मुस्लिम और अहमद ने रिवायत किया है, ज़िक्र कियह हुए अल्फाज़ अहमद के हैं।

📚 *[मुस्लिम (606), मिशकातुल मसाबीह (370)]*

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Monday, January 11, 2021

Baitul khla Se Bahar Aakar Kya Padhe (बैतुल ख़ला से बाहर आकर क्या पढ़ें)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَرَجَ مِنَ الْخَلَاءِ قَالَ *«غفرانك»* . رَوَاهُ التِّرْمِذِيّ وَابْن مَاجَه والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतुल ख़ला से बाहर तशरीफ़ लाते, तो यह दुआ: ((غفرانک)) “मैं तेरी मग़फ़िरत चाहता हूँ” पढ़ा करते थे।

📚 *[इसकी सनद सहीह है, तिरमिज़ी (7), इब्ने माजा (300), दारमी (686), अबू दावूद (30), मिशकातुल मसाबीह (359)]*

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Sunday, January 10, 2021

Pani Se Istinja Karna (पानी से इस्तिंजा करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْخُلُ الْخَلَاءَ فَأَحْمِلُ أَنَا وَغُلَامٌ إِدَاوَةً مِنْ مَاءٍ وَعَنَزَةً يستنجي بِالْمَاءِ

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतुल ख़ला में जाते तो मैं और एक दूसरा लड़का पानी का बर्तन और बरछी उठाते और आप पानी से इस्तिंजा करते।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (150), मुस्लिम (620), मिशकातुल मसाबीह (342)]*

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Saturday, January 9, 2021

Wuzu Mein Nak Saaf Karna (वुज़ू में नाक साफ़ करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: (قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ تَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ وَمَنِ اسْتَجْمَرَ فليوتر 

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: जो शख़्स वुज़ू करे तो वो नाक झाड़े और जो ढ़ेलों से इस्तिंजा करे तो वो ढ़ेले विषम संख्या में ले। 

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (161), मुस्लिम (562), मिशकातुल मसाबीह (341)]*

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Friday, January 8, 2021

Dayein Hath Se Istinja Karne Ki Mumaniat (दाएं हाथ से इस्तिनजा करने की मुमानिअत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي قَتَادَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسلم: «إِذا شرب أحدكُم فَلَا ينتنفس فِي الْإِنَاءِ وَإِذَا أَتَى الْخَلَاءَ فَلَا يَمَسَّ ذَكَرَهُ بِيَمِينِهِ وَلَا يَتَمَسَّحْ بِيَمِينِهِ»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू क़तादा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़स कोई चीज़ पीयह तो वो बर्तन में सांस न ले और जब बैतुल ख़ला में जाए तो अपने दाए हाथ से अपनी शर्मगाह को न छुए और न दाए हाथ से इस्तिंजा करे।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (153), मुस्लिम (613), मिशकातुल मसाबीह (340)]*

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Thursday, January 7, 2021

Apne Peshab Se Ahtiyat Na Karna Kabeera Gunah Hai (अपने पेशाब से ऐहतियात न करना कबीरा गुनाह है)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقَبْرَيْنِ فَقَالَ إِنَّهُمَا لَيُعَذَّبَانِ وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ أَمَّا أَحدهمَا فَكَانَ لَا يَسْتَتِرُ مِنَ الْبَوْلِ - وَفِي رِوَايَةٍ لمُسلم: لَا يستنزه مِنَ الْبَوْلِ - وَأَمَّا الْآخَرُ فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ ثمَّ أَخذ جَرِيدَة رطبَة فَشَقهَا نِصْفَيْنِ ثُمَّ غَرَزَ فِي كُلِّ قَبْرٍ وَاحِدَةً قَالُوا يَا رَسُول الله لم صنعت هَذَا قَالَ لَعَلَّه يُخَفف عَنْهُمَا مَا لم ييبسا

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दो क़बरो के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया: “इन दोनों को अज़ाब दिया जा रहा है और उन्हें किसी बड़े गुनाह की वजह से अज़ाब नहीं दिया जा रहा है, उनमें से एक पेशाब करते वक़्त परदा नहीं किया करता था और मुस्लिम की रिवायत में है: पेशाब करते वक़्त एहतियात नहीं किया करता था, जबकि दूसरा शख़्स चुगलख़ोर था”। फिर आपने एक ताज़ा शाख़ लेकर उसके दो टुकड़े कर दिए, फिर हर क़ब्र पर एक टुकड़ा गाड़ दिया, सहाबा ने अर्ज़ किया: अल्लाह के रसूल! आपने यह क्यों किया? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मुमकिन है इनके ख़ुश्क होने तक उनके अज़ाब में कमी कर दी जाए”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (216), मुस्लिम (677), मिशकातुल मसाबीह (338)]*

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Wednesday, January 6, 2021

Baitul Khala Mein Jate Waqt Kya Padhna Chahiye (बैतुल ख़ला में जाते वक़्त क्या पढ़ना चाहिए)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ يَقُولُ: *«اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخبث والخبائث»*

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतूलख़ला में दाख़िल होते, तो फरमाते: “ऐ अल्लाह! मैं नापाक जिन्नों और नापाक मादा जिन्नातो से तेरी पनाह चाहता हूँ ।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (142), मुस्लिम (831), मिशकातुल मसाबीह (337)]*

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Tuesday, January 5, 2021

Dayein Hath Se, Teen Se Kam Dhelo Se, Leed Ya Haddi Ke Sath Istinja Karne Ki Mumaniat (दाएं हाथ से, तीन से कम ढेलों से, लीद या हड्डी के साथ इस्तिनजा करने की मुमानिअत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن سلمَان قَالَ: نَهَانَا يَعْنِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ لِغَائِطٍ أَوْ بَوْل أَو أَن نستنتجي بِالْيَمِينِ أَوْ أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِأَقَلَّ مِنْ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ أَوْ  أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِرَجِيعٍ أَوْ بِعَظْمٍ. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* सलमान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी हाजत पूरी (पेशाब व पख़ाना) करते वक़्त क़िब्ले की तरफ मुंह करने या दाए हाथ से इस्तिंजा करने या तीन से कम ढ़ेलों से इस्तिंजा करने या गोबर या हड्डी के साथ इस्तेंजा करने से हमें मना फ़रमाया।

📚 *[मुस्लिम (606), मिशकातुल मसाबीह (336)]*

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Monday, January 4, 2021

Sehra Mein Qible Rukh Hokar Qaza e Hajat Karne Ki Mumaniat (सहरा में क़िब्ले रुख़ होकर क़ज़ा ए हाजत करने की मुमानिअत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا أَتَيْتُمُ الْغَائِطَ فَلَا تَسْتَقْبِلُوا الْقِبْلَةَ وَلَا تَسْتَدْبِرُوهَا وَلَكِنْ شَرِّقُوا أَوْ غَرِّبُوا»
قَالَ الشَّيْخ الإِمَام محيي السّنة: هَذَا الْحَدِيثُ فِي الصَّحْرَاءِ وَأَمَّا فِي الْبُنْيَانِ فَلَا بَأْس لما رُوِيَ:

🍁 *तर्जुमा :-* अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम बैतूल ख़ला में जाओ, तो क़िब्ले की तरफ न मुंह करो और न पीठ, बल्कि पूरब या पश्चिम की तरफ मुंह करो”।
शेख़ुल इमाम मुह्युस्सुन्नाह रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया: यह हदीस जंगल में है, रहा घर या इमारत आदि में कोई हरज नहीं, जैसा कि अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी है।

📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (394), मुस्लिम (609), मिशकातुल मसाबीह (334)]*

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Sunday, January 3, 2021

Sharmgah Ko Bina Hijab Choone Se Wuzu Tootna (शर्मगाह को बिना हिजाब छूने से वुज़ू टूटना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن بسرة قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا مَسَّ أَحَدُكُمْ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ» . رَوَاهُ مَالِكٌ وَأَحْمَدُ وَأَبُو دَاوُدَ وَالتِّرْمِذِيُّ وَالنَّسَائِيُّ وَابْنُ مَاجَه والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* बुसरा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई अपनी शर्मगाह को हाथ लगाए तो वो वुज़ू करे”।

📚 *[ सहीह, मालिक (88), मुसनद अहमद (407,27836 -27838), अबू दावुद (181), तिरमिज़ी (82), नसाई (163), इब्ने माजा (479),दारमी (730), मिशकातुल मसाबीह (319)]*

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Saturday, January 2, 2021

Wuzu Ki Farziyat (वुज़ू की फ़रज़ियत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسلم: «مِفْتَاحُ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ وَتَحْرِيمُهَا التَّكْبِيرُ وَتَحْلِيلُهَا التَّسْلِيمُ» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُد وَالتِّرْمِذِيّ والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* अली रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तहारत नमाज़ की चाबी, तकबीर (अल्लाहुअकबर) इसकी तहरीम (इस तकबीर से नमाज़ शुरू करने से पहले जो काम मुबाह थे वो हराम हो जाते है) और तस्लीम (अस्सलामुअलैकुम वाराह्मतुल्लाह) इसकी तहलील है”। ( यानी सलाम फेरने से नमाज़ की सूरत में हराम होने वाले काम हलाल हो जाते हैं)।

📚 *[हसन, अबू दावुद (61), तिरमिज़ी (3), दारमी (693), इब्ने माजा (275) , मिशकातुल मसाबीह (312)]*

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Friday, January 1, 2021

Doodh Peene Ke Baad Kulli Karna (दूध पीने के बाद कुल्ली करना)

🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ قَالَ: إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَرِبَ لَبَنًا فَمَضْمَضَ وَقَالَ: «إِنَّ لَهُ دسما»

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दूध पिया, तो कुल्ली की और फ़रमाया: “इसमें चिकनाहट होती है”।

📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (211), मुस्लिम (798), मिशकातुल मसाबीह (307)]*

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Tafseer Dawat ul Quran (Hindi Translation) Part 8

 أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم● 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 📒 तफ़सीर दावतुल क़ुरआन 📒 ✒️ लेख़क: अ...