🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن سلمَان قَالَ: نَهَانَا يَعْنِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ لِغَائِطٍ أَوْ بَوْل أَو أَن نستنتجي بِالْيَمِينِ أَوْ أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِأَقَلَّ مِنْ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ أَوْ أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِرَجِيعٍ أَوْ بِعَظْمٍ. رَوَاهُ مُسلم
🍁 *तर्जुमा :-* सलमान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी हाजत पूरी (पेशाब व पख़ाना) करते वक़्त क़िब्ले की तरफ मुंह करने या दाए हाथ से इस्तिंजा करने या तीन से कम ढ़ेलों से इस्तिंजा करने या गोबर या हड्डी के साथ इस्तेंजा करने से हमें मना फ़रमाया।
📚 *[मुस्लिम (606), मिशकातुल मसाबीह (336)]*
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