🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقَبْرَيْنِ فَقَالَ إِنَّهُمَا لَيُعَذَّبَانِ وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ أَمَّا أَحدهمَا فَكَانَ لَا يَسْتَتِرُ مِنَ الْبَوْلِ - وَفِي رِوَايَةٍ لمُسلم: لَا يستنزه مِنَ الْبَوْلِ - وَأَمَّا الْآخَرُ فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ ثمَّ أَخذ جَرِيدَة رطبَة فَشَقهَا نِصْفَيْنِ ثُمَّ غَرَزَ فِي كُلِّ قَبْرٍ وَاحِدَةً قَالُوا يَا رَسُول الله لم صنعت هَذَا قَالَ لَعَلَّه يُخَفف عَنْهُمَا مَا لم ييبسا
🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दो क़बरो के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया: “इन दोनों को अज़ाब दिया जा रहा है और उन्हें किसी बड़े गुनाह की वजह से अज़ाब नहीं दिया जा रहा है, उनमें से एक पेशाब करते वक़्त परदा नहीं किया करता था और मुस्लिम की रिवायत में है: पेशाब करते वक़्त एहतियात नहीं किया करता था, जबकि दूसरा शख़्स चुगलख़ोर था”। फिर आपने एक ताज़ा शाख़ लेकर उसके दो टुकड़े कर दिए, फिर हर क़ब्र पर एक टुकड़ा गाड़ दिया, सहाबा ने अर्ज़ किया: अल्लाह के रसूल! आपने यह क्यों किया? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मुमकिन है इनके ख़ुश्क होने तक उनके अज़ाब में कमी कर दी जाए”।
📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (216), मुस्लिम (677), मिशकातुल मसाबीह (338)]*
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