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Friday, January 29, 2021
Wednesday, January 27, 2021
Monday, January 25, 2021
Sunday, January 24, 2021
Achchi Tarah Wuzu Karna (अच्छी तरह वुज़ू करना)
Saturday, January 23, 2021
Wuzu Ka Tareeqa (वुज़ू का तरीक़ा)
Friday, January 22, 2021
Thursday, January 21, 2021
Wednesday, January 20, 2021
Miswak Ki Fazeelat (मिस्वाक की फ़ज़ीलत)
Tuesday, January 19, 2021
Bade Shakhs Ko Miswak Dene Ka Bayan (बड़े शख़्स को मिस्वाक देने का बयान)
Monday, January 18, 2021
Miswak Dhone Ka Bayan (मिस्वाक धोने का बयान)
Sunday, January 17, 2021
Miswak Allah Ki Raza Ka Zariya (मिस्वाक अल्लाह की रज़ा का ज़रिया)
Saturday, January 16, 2021
Fitri Khoobiyan (फ़ितरी खूबियाँ)
Friday, January 15, 2021
Aadmi Raat Ko Uthe To Miswak Kare (आदमी रात को उठे तो मिस्वाक नमस्ते करे)
Thursday, January 14, 2021
Miswak Karne Ka Bayan (मिस्वाक करने का बयान)
Wednesday, January 13, 2021
Miswak Karna (मिस्वाक करना)
Tuesday, January 12, 2021
Rasoolullah Sallaahu Alaihi Wasallam Ne Har Choti Badi Cheez Ki Taleem Di (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हर छोटी बड़ी चीज़ की तालीम दी)
Monday, January 11, 2021
Baitul khla Se Bahar Aakar Kya Padhe (बैतुल ख़ला से बाहर आकर क्या पढ़ें)
Sunday, January 10, 2021
Pani Se Istinja Karna (पानी से इस्तिंजा करना)
Saturday, January 9, 2021
Wuzu Mein Nak Saaf Karna (वुज़ू में नाक साफ़ करना)
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: (قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ تَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ وَمَنِ اسْتَجْمَرَ فليوتر
🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: जो शख़्स वुज़ू करे तो वो नाक झाड़े और जो ढ़ेलों से इस्तिंजा करे तो वो ढ़ेले विषम संख्या में ले।
📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (161), मुस्लिम (562), मिशकातुल मसाबीह (341)]*
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Friday, January 8, 2021
Dayein Hath Se Istinja Karne Ki Mumaniat (दाएं हाथ से इस्तिनजा करने की मुमानिअत)
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي قَتَادَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسلم: «إِذا شرب أحدكُم فَلَا ينتنفس فِي الْإِنَاءِ وَإِذَا أَتَى الْخَلَاءَ فَلَا يَمَسَّ ذَكَرَهُ بِيَمِينِهِ وَلَا يَتَمَسَّحْ بِيَمِينِهِ»
🍁 *तर्जुमा :-* अबू क़तादा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़स कोई चीज़ पीयह तो वो बर्तन में सांस न ले और जब बैतुल ख़ला में जाए तो अपने दाए हाथ से अपनी शर्मगाह को न छुए और न दाए हाथ से इस्तिंजा करे।
📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (153), मुस्लिम (613), मिशकातुल मसाबीह (340)]*
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Thursday, January 7, 2021
Apne Peshab Se Ahtiyat Na Karna Kabeera Gunah Hai (अपने पेशाब से ऐहतियात न करना कबीरा गुनाह है)
Wednesday, January 6, 2021
Baitul Khala Mein Jate Waqt Kya Padhna Chahiye (बैतुल ख़ला में जाते वक़्त क्या पढ़ना चाहिए)
Tuesday, January 5, 2021
Dayein Hath Se, Teen Se Kam Dhelo Se, Leed Ya Haddi Ke Sath Istinja Karne Ki Mumaniat (दाएं हाथ से, तीन से कम ढेलों से, लीद या हड्डी के साथ इस्तिनजा करने की मुमानिअत)
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن سلمَان قَالَ: نَهَانَا يَعْنِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ لِغَائِطٍ أَوْ بَوْل أَو أَن نستنتجي بِالْيَمِينِ أَوْ أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِأَقَلَّ مِنْ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ أَوْ أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِرَجِيعٍ أَوْ بِعَظْمٍ. رَوَاهُ مُسلم
🍁 *तर्जुमा :-* सलमान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी हाजत पूरी (पेशाब व पख़ाना) करते वक़्त क़िब्ले की तरफ मुंह करने या दाए हाथ से इस्तिंजा करने या तीन से कम ढ़ेलों से इस्तिंजा करने या गोबर या हड्डी के साथ इस्तेंजा करने से हमें मना फ़रमाया।
📚 *[मुस्लिम (606), मिशकातुल मसाबीह (336)]*
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Monday, January 4, 2021
Sehra Mein Qible Rukh Hokar Qaza e Hajat Karne Ki Mumaniat (सहरा में क़िब्ले रुख़ होकर क़ज़ा ए हाजत करने की मुमानिअत)
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا أَتَيْتُمُ الْغَائِطَ فَلَا تَسْتَقْبِلُوا الْقِبْلَةَ وَلَا تَسْتَدْبِرُوهَا وَلَكِنْ شَرِّقُوا أَوْ غَرِّبُوا»
قَالَ الشَّيْخ الإِمَام محيي السّنة: هَذَا الْحَدِيثُ فِي الصَّحْرَاءِ وَأَمَّا فِي الْبُنْيَانِ فَلَا بَأْس لما رُوِيَ:
🍁 *तर्जुमा :-* अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम बैतूल ख़ला में जाओ, तो क़िब्ले की तरफ न मुंह करो और न पीठ, बल्कि पूरब या पश्चिम की तरफ मुंह करो”।
शेख़ुल इमाम मुह्युस्सुन्नाह रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया: यह हदीस जंगल में है, रहा घर या इमारत आदि में कोई हरज नहीं, जैसा कि अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी है।
📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (394), मुस्लिम (609), मिशकातुल मसाबीह (334)]*
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Sunday, January 3, 2021
Sharmgah Ko Bina Hijab Choone Se Wuzu Tootna (शर्मगाह को बिना हिजाब छूने से वुज़ू टूटना)
Saturday, January 2, 2021
Wuzu Ki Farziyat (वुज़ू की फ़रज़ियत)
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسلم: «مِفْتَاحُ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ وَتَحْرِيمُهَا التَّكْبِيرُ وَتَحْلِيلُهَا التَّسْلِيمُ» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُد وَالتِّرْمِذِيّ والدارمي
🍁 *तर्जुमा :-* अली रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तहारत नमाज़ की चाबी, तकबीर (अल्लाहुअकबर) इसकी तहरीम (इस तकबीर से नमाज़ शुरू करने से पहले जो काम मुबाह थे वो हराम हो जाते है) और तस्लीम (अस्सलामुअलैकुम वाराह्मतुल्लाह) इसकी तहलील है”। ( यानी सलाम फेरने से नमाज़ की सूरत में हराम होने वाले काम हलाल हो जाते हैं)।
📚 *[हसन, अबू दावुद (61), तिरमिज़ी (3), दारमी (693), इब्ने माजा (275) , मिशकातुल मसाबीह (312)]*
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Friday, January 1, 2021
Doodh Peene Ke Baad Kulli Karna (दूध पीने के बाद कुल्ली करना)
Thursday, December 31, 2020
Oont Ke Gosht Se Wuzu Karna (ऊंट के गोश्त से वुज़ू करना)
Wednesday, December 30, 2020
Mazi Ka Dhona Aur Iski Wajah Se Wuzu Karna (मज़ी का धोना और इसकी वजह से वुज़ू करना)
Tuesday, December 29, 2020
Namaz Ke Liye Wuzu Ka Wajib Hona ( नमाज़ के लिए वुज़ू का वाजिब होना)
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تُقْبَلُ صَلَاةُ بِغَيْرِ طُهُورٍ وَلَا صَدَقَةٌ مِنْ غُلُولٍ» . رَوَاهُ مُسلم
🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वुज़ू के बिना नमाज़ क़ुबूल नहीं की जाती है और ना हराम माल से सदक़ा”।
📚 *[मुस्लिम (535), मिशकातुल मसाबीह (301)]*
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Monday, December 28, 2020
Wuzu Ke Naqis Hone Ka Asar Namaz Par Padta Hai ( वुज़ू के नाक़िस होने का असर नमाज़ पर पड़ता है)
Sunday, December 27, 2020
Wuzu Ki Hifazat Karna (वुज़ू की हिफ़ाज़त करना)
Saturday, December 26, 2020
Zewar Wahan Tak Pahunchega Jahan Tak Wuzu Ka Pani Pahunchega (ज़ेवर वहाँ तक पहुंचेगा जहां तक वुज़ू का पानी पहुंचेगा)
Friday, December 25, 2020
Wuzu Ki Fazeelat ( वुज़ू की फ़ज़ीलत)
Surah Fatiha Part 8 (सुरह फ़ातिहा भाग 8)
*أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन*
लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद
तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)
*सूरह फ़ातिहा*
*भाग 8*
किसी बीमारी से शिफ़ा पाने के लिए जो दुआ पढ़ कर मरीज़ को दम किया जाता
है, वो भी “बिस्मिल्लाह” से शुरू होती है, जैसा कि सय्यदना अबू
सईद ख़ुदरी (र) बयान करते हैं, जिब्रील अलैहिस्सलाम रसूलुल्लाह (स) के पास आये और
पूछा: “ऐ
मुहम्मद! क्या आप बीमार हैं”? रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया:
“हाँ!”
तो
जिब्रील अलैहिस्सलाम ने यह दुआ पढ़ी:
}}بِاسْمِ اللهِ أَرْقِيكَ، مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ، مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ، أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ، اللَّهُ يَشْفِيكَ بِاسْمِ اللهِ أَرْقِيكَ{{
“अल्लाह के नाम के साथ, मैं तुम्हारे लिए हर उस चीज़ से जो
तुम्हें तकलीफ़ पहुँचाती है और हर नफ़्स की बुराई से या हासिद की नज़रे बद की बुराई
से शिफ़ा तलब करता हूँ, अल्लाह तुम्हें शिफ़ा अता करे, मैं अल्लाह के नाम के साथ
तुम्हारे लिए शिफ़ा तलब करता हूँ”। *[मुस्लिम: 5700]*
जिस जगह दर्द हो वहाँ हाथ रख कर तीन बार “बिस्मिल्लाह”
पढ़ना,
जैसा कि सय्यदना उस्मान बिन अबुल आस (र) ने रसूलुल्लाह (स) से अपने जिस्म में किसी
जगह दर्द होने की शिकायत की, जो इस्लाम क़ुबूल करने के बाद पहली बार हुआ था, तो
रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “अपना हाथ दर्द की जगह रखो, फिर तीन बार “बिस्मिल्लाह”
और
सात बार यह दुआ पढ़ो:
}}أَعُوذُ بِاللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِر{{
“मैं अल्लाह की और उसकी क़ुदरत की पनाह तलब करता हूँ इस बीमारी
की बुराई से जो इस वक़्त मुझे हुई है और इससे भी जिसके आगे होने का ख़तरा है”। *[मुस्लिम: 5737]*
बीमार की शिफ़ा पाने के लिए शहादत की उंगली ज़मीन पर रखिये, फिर उसे
उठा कर यह दुआ पढ़िए, जैसा कि सय्यदा आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि बेशक
रसूलुल्लाह (स) (मरीज़ की शिफ़ा के लिए) यह दुआ पढ़ते थे: *{{ بِاسْمِ اللَّهِ تُرْبَةُ أَرْضِنَا
بِرِيقَةِ بَعْضِنَا لِيُشْفَى بِهِ سَقِيمُنَا بِإِذْنِ رَبِّنَا}}* “अल्लाह के नाम के साथ, हमारी ज़मीन की मिट्टी और हममें से कुछ
के लुआबे दहन से हमारे रब के हुक्म से हमारा मरीज़ शिफ़ा पा जाए”। *[बुख़ारी: 5746]*
मुस्लिम के अल्फ़ाज़ हैं कि आप (स) अपनी शहादत वाली उंगली ज़मीन पर
रखते, फिर उठाते और ऊपर ज़िक्र की हुई दुआ पढ़ते। *[मुस्लिम: 5719]*
खाना खाने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना चाहिए, जैसा कि
सय्यदना उमर बिन अबी सलमा (र) बयान करते हैं कि मैं जब बच्चा था और रसूलुल्लाह (स)
की परवरिश में था और (खाना खाते वक़्त) मेरा हाथ बर्तन में चरों तरफ़ घूमा करता था,
तो रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया:
}}يَا غُلَامُ، سَمِّ اللَّهَ وَكُلْ بِيَمِينِكَ
وَكُلْ مِمَّا يَلِيكَ{{
“ऐ लड़के! बिस्मिल्लाह पढ़ कर अपने दाएँ हाथ से खाओ और अपने सामने
से खाओ”। *[बुख़ारी: 5376, मुस्लिम: 5269]*
अगर खाने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना भूल जाए तो याद
आने पर नीचे दी गयी दुआ पढ़िए, सय्यदा आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि
रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई खाना खाये तो बिस्मिल्लाह कहे, अगर शुरू में “बिस्मिल्लाह”
भूल
जाये तो यह दुआ पढ़े:
}}بِسْمِ اللَّهِ فِي أَوَّلِهِ وَآخِرِهِ{{
“अल्लाह तआला के नाम के साथ (खाता हूँ) इसके शुरू और इसके आख़िर
में”। *[तिरमिज़ी: 1858]*
जानवर ज़िबह करते वक़्त की दुआ, सय्यदना अनस (र) बयान करते हैं,
रसूलुल्लाह (स) ने दो चितकबरे, सींगों वाले मेंढ़ों की क़ुरबानी दी और उन्हें अपने
हाथ से ज़िबह किया और आपने यह दुआ पढ़ी: *{{بِاسْمِ اللَّهِ وَاللَّهُ أَكْبَرُ}}* “अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह सबसे बड़ा है”। *[बुख़ारी (5565), मुस्लिम
(5087)]*
शिकार के लिये शिकारी जानवर या तीर छोड़ते वक़्त “बिस्मिल्लाह”
कहना,
जैसा कि सय्यदना अदी बिन हातिम (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुम (शिकार के
लिए) अपना कुत्ता छोड़ो तो बिस्मिल्लाह कहो और अगर तुम अपना तीर फेंकों तो
बिस्मिल्लाह कहो”। *[मुस्लिम: 4981, बुख़ारी: 5487]*
जिस ज़बीहा के बारे में इल्म न हो कि इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ी गई है या
नहीं तो ख़ुद बिस्मिल्लाह पढ़ लीजिए जैसा कि सय्यदा आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहू अन्हा
बयान करती हैं कि एक बार कुछ लोगों ने रसूलुल्लाह (स) से पूछा कि कुछ लोग हमारे
पास गोश्त लाते हैं, हमें नहीं मालूम कि उन्होंने इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ी है या
नहीं, रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “तुम इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ लो और खा लो”। आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहू
अन्हा बयान करती हैं कि यह लोग अभी इस्लाम में नये नये दाख़िल हुए थे। *[बुख़ारी:
5507]*
घर में दाख़िल होते वक़्त “बिस्मिल्लाह” पढ़ने की फ़ज़ीलत बयान
करते हुए सय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स)
फ़रमाते हैं: “जब कोई शख़्स अपने घर में दाख़िल होते वक़्त और खाना खाते वक़्त
अल्लाह का ज़िक्र करे तो शैतान (अपने साथियों से) कहता है, अब तुम्हारे लिए न
ठिकाना है न खाना और अगर वो शख़्स दाख़िल होते वक़्त अल्लाह का नाम न ले तो शैतान
(अपने साथियों से) कहता है, अब तुम्हें रहने के लिए ठिकाना मिल गया”। *[मुस्लिम: 5262]*
सोने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ कर अन्जाम दिए जाने वाले कुछ आमाल
बयान करते हुए सय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स)
ने फ़रमाया: “जब तुम सोने लगो तो दरवाज़ों को अल्लाह का नाम ले कर बन्द कर
दो, क्यूंकि शैतान बन्द दरवाज़े को नहीं खोलता, अल्लाह का नाम ले कर मिश्कीज़ों
(बोतलों) के मुंह बाँध दो. अल्लाह का नाम ले कर अपने बर्तनों को ढ़क दो, चाहे किसी
चीज़ को चौड़ाई में रख ही ढ़क सको और (अल्लाह का नाम लेकर) अपने दिये बुझा दो”। *[बुख़ारी: 5623]*
लशकर को रवाना करते वक़्त रसूलुल्लाह (स) की नसीहत, सय्यदना बुरैदा
(र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) जब किसी लशकर को नसीहत फ़रमाते तो कहते: {{اغْزُوا بِاسْمِ اللَّهِ فِي سَبِيلِ
اللَّهِ}} “अल्लाह का नाम लेकर अल्लाह के रास्ते
में जिहाद करो”। *[मुस्लिम: 4522]*
बिस्तर पर लेटते वक़्त, सय्यदना अबू हुरैरा (र) बयान करते हैं कि
रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़्स अपने बिस्तर पर आये तो वो अपने तहबन्द
के एक कोने (या किसी कपड़े) से पाने बिस्तर को अल्लाह का नाम लेकर (यानी “बिस्मिल्लाह”
कह
कर) तीन बार झाड़े”। *[मुस्लिम: 6892, बुख़ारी: 7393]*
सवारी पर सवार होते वक़्त “बिस्मिल्लाह” पढ़ना, जैसा कि अली
बिन रबीअ कहते हैं, मेरे सामने अली (र) के लिए सवारी लायी गई, जब उन्होंने रकाब
में पैर रखा तो “बिस्मिल्लाह” कहा, फिर जब इसकी पीठ पर सीधे बैठ गए तो
कहा “अल्हम्दुलिल्लाह”
फिर
कहा:
*سُبْحٰنَ الَّذِیْ سَخَّرَ لَنَا هٰذَا وَ مَا كُنَّا
لَهٗ مُقْرِنِیْنَۙ۱۳وَ اِنَّاۤ اِلٰى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُوْنَ۱۴*
“अल्लाह तमाम बुराइयों से पाक है, जिसने इस सवारी को हमारे लिए
मुसख़्ख़र कर दिया, हालांकि हम इसको क़ाबू में न ला सकते थे और बेशक हम अपने रब ही की
तरफ़ लौट कर जाने वाले हैं” फिर सय्यदना अली (र) ने कहा, मैंने रसूलुल्लाह (स) को देखा वो
भी ऐसा ही करते थे जैसा मैंने किया। *[अबू दावूद: 2602, तिरमिज़ी: 3446]*
जारी है...................................
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https://authenticmessages.blogspot.com/2020/12/surah-fatiha-part-8-8.html
Surah Fatiha Part 7 (सुरह फ़ातिहा भाग 7)
*أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●
🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन*
लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद
तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)
*सूरह फ़ातिहा*
*भाग 7*
“अल्लाह
के नाम से जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है”।
सय्यदना
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम सूरतों का फ़र्क़ न पहचानते थे, यहाँ तक कि “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ” नाज़िल की जाती। *[अबू दावूद: 788]*
सय्यदना
अनस (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “मुझ पर अभी एक सूरत
नाज़िल हुई है”। फिर आपने इस तरह तिलावत फ़रमाई:
*بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِاِنَّاۤ
اَعْطَیْنٰكَ الْكَوْثَرَؕ۱فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَ انْحَرْؕ۲اِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْاَبْتَرُ۠۳*
“अल्लाह के नाम से जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है। बेशक हमने तुझे कौसर अता की,
तो तू अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ और क़ुरबानी कर, यक़ीनन तेरा दुशमन ही बेऔलाद होगा”। *[मुस्लिम: 894]*
नुऐम रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं, मैंने अबू हुरैरा (र) के पीछे नमाज़
पढ़ी, उन्होंने सुरह फ़ातिहा से पहले “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ” की तिलावत की...................फिर फ़रमाया, क़सम उस ज़ात की,
जिसके हाथ में मेरी जान है! मैं नमाज़ पढ़ने के लिहाज़ से तुम सबसे ज़्यादा रसूलुल्लाह
(स) की तरह हूँ। *[नसाई: 906]*
इस मसले में कि “बिस्मिल्लाह” को जहरन (ऊँची आवाज़
से) पढ़ा जाए या सिर्रन (धीमी आवाज़ से), अल्लामा इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाह की बात एतिदाल
वाली है कि नबी करीम (स) इसे कभी जहरन पढ़ते थे और कभी सिर्रन, हाँ, आपका सिर्रन
पढ़ना ज़्यादा साबित है।
सय्यदना अनस बिन मालिक (र) से नबी (स) की क़िरआत के बारे में पूछा
गया तो उन्होंने फ़रमाया कि आप (स) अल्फाज़ को ख़ींच कर क़िरआत फ़रमाया करते थे, फिर
उन्होंने “بِسْمِ
اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ” की इस तरह क़िरआत करके दिखाई कि “بِسْمِ اللّٰهِ” को ख़ींच कर, फिर “الرَّحْمٰنِ” को ख़ींच कर और फिर “الرَّحِيْمِ” को ख़ींच कर पढ़ा। *[बुख़ारी: 5046]*
क़ुरआन करीम की कई आयतें और सहीह हदीसों से मालूम होता है कि एक
मुसलमान की ज़िन्दगी में “बिस्मिल्लाह” की बड़ी अहमियत है और कोई भी काम करने से
पहले *“बिस्मिल्लाह”* कहना
ख़ैर व बरकत का ज़रिया, अल्लाह की मदद व हिमायत का ज़रिया और ताईद व हिफाज़त का सबब है। “बिस्मिल्लाह”
कहने
से शैतान ज़लील हो जाता है, जैसा कि अबुल मलीह एक सहाबी से बयान करते हैं, वो कहते
हैं कि मैं गधे पर नबी करीम (स) के पीछे सवार था, गधा ज़रा फिसला तो मैंने कहा,
शैतान का बुरा हो, तो नबी (स) ने मुझसे फ़रमाया: “यह न कहो कि शैतान का
बुरा हो, क्यूंकि इससे शैतान फूल जाता है और कहता है कि मैंने अपनी ताक़त के साथ
इसे गिराया है, सो अगर तुम “बिस्मिल्लाह” कहो तो इससे शैतान अपने आपको निहायत
छोटा और हक़ीर समझता है, यहाँ तक कि मक्खी से भी ज़्यादा छोटा और ज़्यादा हक़ीर”। *[मुसनद अहमद: 20616, सुनन
कुबरा लिननसाई: 10388]*
ख़त व किताबत की शुरूआत “बिस्मिल्लाह” से करना चाहिए, जैसा
कि सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि सय्यदना अबू
सुफ़ियान (र) ने बयान किया कि रसूलुल्लाह (स) ने हरक़ुल के नाम एक ख़त लिखा था, जब
बादशाह ने उस ख़त को मंगवाया तो उसके शुरू में यह लिखा था: {{بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ}} *[बुख़ारी: 7, मुस्लिम: 4607]*
सय्यदना सुलैमान अलैहिस्सलाम ने जो ख़त मलका सबा को लिखा था
उसकी शुरूआत इस तरह होती है:
*اِنَّهٗ مِنْ سُلَیْمٰنَ وَ اِنَّهٗ بِسْمِ اللّٰهِ
الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِۙ۳۰*
“बेशक वो सुलैमान की तरफ़ से है और बेशक वो अल्लाह के नाम से है
जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है”। *[अन-नम्ल: 30]*
सय्यदना मिसवर बिन मख़ज़मह और मरवान रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं
कि रसूलुल्लाह (स) ने जब हुदैबिया के मक़ाम पर सुलह नामा लिखवाने का इरादा किया तो
आपने कातिब को बुलवाया और उससे फ़रमाया: {{اكْتُبْ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ}} “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ लिखो”। *[बुख़ारी: 2731,2732, मुस्लिम: 4632]*
वुज़ू से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना ज़रूरी है, जैसा कि सय्यदना अनस (र)
बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: {{تَوَضَّئُوا بِسْمِ اللَّهِ}} “अल्लाह के नाम के साथ वुज़ू करो”। *[नसाई: 78]*
बीवी से हमबिस्तरी करने से पहले “बिस्मिल्लाह”
पढ़ना,
जैसा कि सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि
रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई अपनी बीवी के पास आये तो यह कहे: *{{بِاسْمِ اللَّهِ اللَّهُمَّ جَنِّبْنِي
الشَّيْطَانَ وَجَنِّبْ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا}}* “अल्लाह के नाम के साथ, ऐ अल्लाह! हमें शैतान से महफूज़ रख और जो
(औलाद) तू हमें दे उसे भी शैतान से महफूज़ रख” तो अब अगर मुक़द्दर
में औलाद है तो शैतान इसको कभी नुक़सान नहीं पहुँचाएगा”। *[बुख़ारी: 5165, मुस्लिम:
3533]*
जारी है...................................
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Tafseer Dawat ul Quran (Hindi Translation) Part 8
أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم● 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 📒 तफ़सीर दावतुल क़ुरआन 📒 ✒️ लेख़क: अ...
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🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَ...