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Friday, January 29, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ لَقِيطِ بْنِ صَبِرَةَ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي عَنِ الْوُضُوءِ. قَالَ: «أَسْبِغِ الْوُضُوءَ وَخَلِّلْ بَيْنَ الْأَصَابِعِ وَبَالِغْ فِي الِاسْتِنْشَاقِ إِلَّا أَنْ تَكُونَ صَائِمًا» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَالتِّرْمِذِيُّ وَالنَّسَائِيُّ وَرَوَى ابْنُ مَاجَه والدارمي إِلَى قَوْله: بَين الْأَصَابِع

🍁 *तर्जुमा :-* लक़ीत बिन सबिरह रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, मैंने अर्ज़ किया: अल्लाह के रसूल! मुझे वुज़ू के बारे में बताइए, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वुज़ू अच्छी तरह करो, उंगलियों के दरमियान ख़िलाल करो और रोज़े की हालत के अलावा नाक में पानी ख़ूब चढ़ाओ”। अबू दावुद, तिरमिज़ी, नसाई और इब्ने माजा और दारमी ने ((بَيْنَ الْأَصَابِعِ)) तक रिवायत किया है।

📚 *[सहीह, अबू दावूद (142), तिरमिज़ी (788), नसाई (87,114), इब्ने माजा (407,448), दारमी (711), सहीह ख़ुज़ैमा (150,168), इब्ने हिब्बान (अल-मवारिद: 159), हाकिम (1/147,148), मिशकातुल मसाबीह (405)]*

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Wednesday, January 27, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحِبُّ التَّيَمُّنَ مَا اسْتَطَاعَ فِي شَأْنِهِ كُلِّهِ: فِي طهوره وَترَجله وتنعله

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने तमाम काम (मसलन) वुज़ू करने, कंघी करने और जूता पहनने में जहाँ तक मुमकिन होता दाएं तरफ़ से शुरू करना पसंद किया करते थे।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (426), मुस्लिम (617), मिशकातुल मसाबीह (400)]*

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Monday, January 25, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن الْمُغيرَة بن شُعْبَة قَالَ: إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ فَمَسَحَ بِنَاصِيَتِهِ وَعَلَى الْعِمَامَةِ وَعَلَى الْخُفَّيْنِ. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* मुग़ीरा बिन शोअबा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं की नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वुज़ू किया तो आपने अपनी पेशानी, अमामा और मोज़ो पर मसाह किया। 

📚 *[मुस्लिम (636), मिशकातुल मसाबीह (399)]*

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Sunday, January 24, 2021

Achchi Tarah Wuzu Karna (अच्छी तरह वुज़ू करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن عبد الله بن عَمْرو قَالَ: رَجَعْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ مَكَّةَ إِلَى الْمَدِينَةِ حَتَّى إِذا كُنَّا بِمَاء بِالطَّرِيقِ تعجل قوم عِنْد الْعَصْر فتوضؤوا وهم عِجَال فَانْتَهَيْنَا إِلَيْهِم وَأَعْقَابُهُمْ تَلُوحُ لَمْ يَمَسَّهَا الْمَاءُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «وَيْلٌ لِلْأَعْقَابِ من النَّار أَسْبغُوا الْوضُوء» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मक्का से मदीना वापस आ रहे थे यहाँ तक कि हम रास्ते में पानी के पास से गुज़रे, कुछ लोगो ने अस्र की नमाज़ के लिए जल्दी की, तो उन्होंने जल्दी में वुज़ू किया। जब हम उनके पास पहुँचें तो देखा कि उनकी एड़िया (सूखी होने की वजह से) चमक रही थी, इन तक पानी नहीं पहुंचा था, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “एड़ियो के लिए जहन्नम की आग है, वुज़ू खूब अच्छी तरह मुकम्मल करो”।

📚 *[मुस्लिम (570), मिशकातुल मसाबीह (398)]*

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Saturday, January 23, 2021

Wuzu Ka Tareeqa (वुज़ू का तरीक़ा)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَفِي الْمُتَّفَقِ عَلَيْهِ: قِيلَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ: تَوَضَّأْ لَنَا وُضُوءَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَدَعَا بِإِنَاءٍ فَأَكْفَأَ مِنْهُ عَلَى يَدَيْهِ فَغَسَلَهُمَا ثَلَاثًا ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ مِنْ كَفٍّ وَاحِدَةٍ فَفَعَلَ ذَلِكَ ثَلَاثًا ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَغَسَلَ يَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ أَدْخَلَ يَدَهُ فَاسْتَخْرَجَهَا فَمَسَحَ بِرَأْسِهِ فَأَقْبَلَ بِيَدَيْهِ وَأَدْبَرَ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثُمَّ قَالَ هَكَذَا كَانَ وُضُوءُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
وَفِي رِوَايَةٍ: فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ بَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ ثُمَّ ذَهَبَ بِهِمَا إِلَى قَفَاهُ ثُمَّ رَدَّهُمَا حَتَّى رَجَعَ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي بَدَأَ مِنْهُ ثُمَّ غَسَلَ رجلَيْهِ
وَفِي رِوَايَة: فَمَضْمض واستنشق واستنثر ثَلَاثًا بِثَلَاث غَرَفَاتٍ مِنْ مَاءٍ
وَفِي رِوَايَةٍ أُخْرَى: فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ مِنْ كَفَّةٍ وَاحِدَةٍ فَفَعَلَ ذَلِكَ ثَلَاثًا
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: فَمَسَحَ رَأْسَهُ فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ مَرَّةً وَاحِدَةً ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ إِلَى الْكَعْبَيْنِ
وَفِي أُخْرَى لَهُ: فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْثَرَ ثَلَاثَ مَرَّات من غرفَة وَاحِدَة

🍁 *तर्जुमा :-* और सहीहैन में है की अब्दुल्लाह बिन ज़ैद बिन आसिम रज़ियल्लाहू अन्हु से कहा गया कि हमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वुज़ू करके दिखाइए, तो उन्होंने पानी का एक बर्तन मंगवाया और उसमें से कुछ पानी अपने हाथो पर उंडेला और उन्हें तीन मर्तबा धोया, फिर अपने हाथ को पानी के बर्तन में डाला और उसमें पानी लेकर एक ही चुल्लू से कुल्ली की और नाक में पानी डाला, उन्होंने यह तीन मर्तबा किया, फिर उन्होंने अपना हाथ बर्तन में डाल कर इससे पानी निकाला और तीन मर्तबा अपना चेहरा धोया, फिर अपना हाथ बर्तन में डाला और पानी निकाल कर दो दो मर्तबा हाथो को कहोनियो समेत धोया, फिर अपना हाथ बर्तन में डाल कर इससे और पानी निकाल कर अपने सर का मसाह किया, अपने हाथो को आगे ले गए और वापस लाए, फिर उन्होंने टख़नो तक पाँव धोए, फिर उन्होंने फ़रमाया: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वुज़ू इसी तरह था। एक रिवायत में है सर का मसाह करते वक़्त हाथो को सर की अगली तरफ़ से गुद्दी तक ले गए और फिर उन्हे वहीँ वापस ले आए जहाँ से शुरू किया था, फिर अपने दोनों पाँव धोए। एक दूसरी रिवायत में है: आपने तीन मर्तबा कुल्ली की, नाक में पानी डाला और नाक झाड़ी और ऐसा तीन चुल्लू पानी के साथ किया। एक और रिवायत में है: आपने एक चुल्लू के साथ ही कुल्ली की और नाक में पानी डाला और आपने ऐसा तीन मर्तबा किया। बुख़ारी की रिवायत में है: आपने सर का मसाह किया, आप हाथो को आगे ले गए और वापस लाए, आपने यह एक मर्तबा किया, फिर आपने टख़नो तक दोनों पाँव धोए और बुख़ारी की दूसरी रिवायत में है: आपने एक ही चुल्लू से तीन मर्तबा कुल्ली की और नाक झाड़ी।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (185,186,191,192,199), मुस्लिम (555), मिशकातुल मसाबीह (394)]*

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Friday, January 22, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ مَنَامه فليستنثر ثَلَاثًا فَإِن الشَّيْطَان يبيت على خيشومه»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़्स नींद से जाग कर वुज़ू करे तो वो तीन मर्तबा नाक झाड़े, क्यूंकि शैतान इसकी नाक में रात बसर करता है”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (3295), मुस्लिम (564), मिशकातुल मसाबीह (392)]*

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Thursday, January 21, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ فَلَا يَغْمِسْ يَدَهُ فِي الْإِنَاءِ حَتَّى يَغْسِلَهَا فَإِنَّهُ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई नींद से जागे हो तो वो अपना हाथ बर्तन में ना डाले यहाँ तक कि इसे तीन मर्तबा धो ले, क्यूंकि वो नहीं जानता कि इसके हाथ ने रात कहाँ गुज़ारी है”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (162), मुस्लिम (643), मिशकातुल मसाबीह (391)]*

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Wednesday, January 20, 2021

Miswak Ki Fazeelat (मिस्वाक की फ़ज़ीलत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَقَدْ أَكْثَرْتُ عَلَيْكُمْ فِي السِّوَاك» رَوَاهُ البُخَارِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मैंने तुम्हें मिस्वाक के बारे में बहुत मर्तबा कहा है”। 

📚 *[बुखा़री (888), मिशकातुल मसाबीह (387)]*

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Tuesday, January 19, 2021

Bade Shakhs Ko Miswak Dene Ka Bayan (बड़े शख़्स को मिस्वाक देने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: أَرَانِي فِي الْمَنَامِ أَتَسَوَّكُ بِسِوَاكٍ فَجَاءَنِي رَجُلَانِ أَحَدُهُمَا أَكْبَرُ مِنَ الْآخَرِ فَنَاوَلْتُ السِّوَاكَ الْأَصْغَرَ مِنْهُمَا فَقِيلَ لي: كبر فَدَفَعته إِلَى الْأَكْبَر مِنْهُمَا  

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मैंने अपने आपको ख़्वाब में मिस्वाक करते हुए देखा तो इस दौरान दो आदमी मेरे पास आए, उनमें से एक दुसरे से बड़ा था, मैंने उनमें से छोटे को मिस्वाक दे दिया, तो मुझे कहा गया: बड़े को दो, तो मैंने बड़े को दे दिया”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (246), मुस्लिम (5933), मिशकातुल मसाबीह (385)]*

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Monday, January 18, 2021

Miswak Dhone Ka Bayan (मिस्वाक धोने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهَا قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْتَاكُ فَيُعْطِينِي السِّوَاكَ لِأَغْسِلَهُ فَأَبْدَأُ بِهِ فَأَسْتَاكُ ثُمَّ أَغْسِلُهُ وَأَدْفَعُهُ إِلَيْهِ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُد

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मिस्वाक किया करते थे, फिर आप मिस्वाक मुझे दे देते ताकि मैं इसे धो दूँ तो मैं धोने से पहले खुद मिस्वाक करती, फिर इसे धो कर आपको लौटा देती”।

📚 *[हसन, अबू दावुद (53), मिशकातुल मसाबीह (384)]*

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Sunday, January 17, 2021

Miswak Allah Ki Raza Ka Zariya (मिस्वाक अल्लाह की रज़ा का ज़रिया)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ» . رَوَاهُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَالدَّارِمِيُّ وَالنَّسَائِيُّ وَرَوَاهُ البُخَارِيّ فِي صَحِيحه بِلَا إِسْنَاد

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मिस्वाक मुंह को साफ़ करने वाली और रब की रज़ामंदी का ज़रिया है”। शाफ़ई, अहमद, दारमी, नसाई और इमाम बुख़ारी ने इसे अपने सहीह में मुअल्लक बयान किया है।

📚 *[सहीह, अश-शाफ़ई फ़िल उम (1/23), मुसनद अहमद (24707), दारमी (690), नसाई (5), बुख़ारी (1934 हदीस से पहले मुअल्लकन), मिशकातुल मसाबीह (381)]*

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Saturday, January 16, 2021

Fitri Khoobiyan (फ़ितरी खूबियाँ)

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🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: قَالَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: عَشْرَ مِنَ الْفِطْرَةِ: قَصُّ الشَّارِبِ وَإِعْفَاءُ اللِّحْيَةِ وَالسِّوَاكُ وَاسْتِنْشَاقُ الْمَاءِ وَقَصُّ الْأَظْفَارِ وَغَسْلُ الْبَرَاجِمِ وَنَتْفُ الْإِبِطِ وَحَلْقُ الْعَانَةِ وَانْتِقَاصُ الْمَاءِ)
يَعْنِي الِاسْتِنْجَاءَ - قَالَ الرَّاوِي: ونسيت الْعَاشِرَة إِلَّا أَن تكون الْمَضْمَضَة. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “दस ख़ूबियाँ फ़ितरत से हैं: मूंछें कतरना, दाढ़ी बढ़ाना, मिस्वाक करना, नाक में पानी झाड़ना, नाख़ून कतरना, उंगलियों के जोड़ धोना, बगलों के बाल उखेड़ना, नाफ़ की नीचे के बाल मूंडना और इस्तिंजा करना, रावी बयान करते हैं, दसवी ख़ूबी मैं भूल गया हूँ, मुमकिन है कि कुल्ली करना हो।

📚 *[मुस्लिम (604), मिशकातुल मसाबीह (379)]*

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Friday, January 15, 2021

Aadmi Raat Ko Uthe To Miswak Kare (आदमी रात को उठे तो मिस्वाक नमस्ते करे)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ حُذَيْفَةَ قَالَ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ لِلتَّهَجُّدِ مِنَ اللَّيْلِ يَشُوصُ فَاهُ بِالسِّوَاكِ

🍁 *तर्जुमा :-* हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात में तहज्जुद के लिए उठते, तो आप मिस्वाक से अपने मुंह को साफ़ करते।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (245), मुस्लिम (593), मिशकातुल मसाबीह (378)]*

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Thursday, January 14, 2021

Miswak Karne Ka Bayan (मिस्वाक करने का बयान)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن شُرَيْح بن هَانِئ قَالَ: سَأَلْتُ عَائِشَةَ: بِأَيِّ شَيْءٍ كَانَ يَبْدَأُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دخل بَيته؟ قَالَت: بِالسِّوَاكِ. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* शुरैह बिन हानी रहमतुल्लाह अलैह बयान करते हैं, मैंने आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा से पूछा, जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम घर तशरीफ़ लाते, तो आप सबसे पहले कौन सा काम किया करते थे? उन्होंने ने फ़रमाया: मिस्वाक। 

📚 *[मुस्लिम (589), मिशकातुल मसाबीह (377)]*

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Wednesday, January 13, 2021

Miswak Karna (मिस्वाक करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي لَأَمَرْتُهُمْ بِتَأْخِيرِ الْعشَاء وبالسواك عِنْد كل صَلَاة»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अगर मुझे अपनी उम्मत पर मशक़्क़त का डर ना होता तो मैं उन्हें इशा की नमाज़ देर से पढ़ने और हर नमाज़ के साथ मिस्वाक करने का हुक्म देता।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (887), मुस्लिम (589), मिशकातुल मसाबीह (376)]*

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https://authenticmessages.blogspot.com/2021/01/miswak-karna.html

Tuesday, January 12, 2021

Rasoolullah Sallaahu Alaihi Wasallam Ne Har Choti Badi Cheez Ki Taleem Di (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हर छोटी बड़ी चीज़ की तालीम दी)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن سلمَان قَالَ قَالَ لَهُ بعض الْمُشْركين وَهُوَ يستهزئ بِهِ إِنِّي لأرى صَاحبكُم يعلمكم كل شَيْء حَتَّى الخراءة قَالَ أَجَلْ أَمَرَنَا أَنْ لَا نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ وَلَا نَسْتَنْجِيَ بِأَيْمَانِنَا وَلَا نَكْتَفِيَ بِدُونِ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ لَيْسَ فِيهَا رَجِيعٌ وَلَا عَظْمٌ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ وَأحمد وَاللَّفْظ لَهُ

🍁 *तर्जुमा :-* सलमान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, किसी मुशरिक ने मज़ाक़ में कहा: मेरा ख़याल है की तुम्हारा साथी (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम्हें पेशाब व पाख़ाने के आदाब भी सिखाता है? मैंने कहा: हाँ, बिल्कुल ठीक है। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें हुक्म दिया है कि हम पेशाब व पाख़ाने के वक़्त क़िब्ले की तरफ़ मुंह न करे और ना दाए हाथ से इस्तिंजा करे और हम (इस्तिंजा के लिए) तीन ढ़ेलों से कम इस्तेमाल ना करें और उनमें गोबर और हड्डी ना हो”। इसे मुस्लिम और अहमद ने रिवायत किया है, ज़िक्र कियह हुए अल्फाज़ अहमद के हैं।

📚 *[मुस्लिम (606), मिशकातुल मसाबीह (370)]*

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Monday, January 11, 2021

Baitul khla Se Bahar Aakar Kya Padhe (बैतुल ख़ला से बाहर आकर क्या पढ़ें)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَرَجَ مِنَ الْخَلَاءِ قَالَ *«غفرانك»* . رَوَاهُ التِّرْمِذِيّ وَابْن مَاجَه والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतुल ख़ला से बाहर तशरीफ़ लाते, तो यह दुआ: ((غفرانک)) “मैं तेरी मग़फ़िरत चाहता हूँ” पढ़ा करते थे।

📚 *[इसकी सनद सहीह है, तिरमिज़ी (7), इब्ने माजा (300), दारमी (686), अबू दावूद (30), मिशकातुल मसाबीह (359)]*

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Sunday, January 10, 2021

Pani Se Istinja Karna (पानी से इस्तिंजा करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْخُلُ الْخَلَاءَ فَأَحْمِلُ أَنَا وَغُلَامٌ إِدَاوَةً مِنْ مَاءٍ وَعَنَزَةً يستنجي بِالْمَاءِ

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतुल ख़ला में जाते तो मैं और एक दूसरा लड़का पानी का बर्तन और बरछी उठाते और आप पानी से इस्तिंजा करते।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (150), मुस्लिम (620), मिशकातुल मसाबीह (342)]*

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Saturday, January 9, 2021

Wuzu Mein Nak Saaf Karna (वुज़ू में नाक साफ़ करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: (قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ تَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ وَمَنِ اسْتَجْمَرَ فليوتر 

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: जो शख़्स वुज़ू करे तो वो नाक झाड़े और जो ढ़ेलों से इस्तिंजा करे तो वो ढ़ेले विषम संख्या में ले। 

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (161), मुस्लिम (562), मिशकातुल मसाबीह (341)]*

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Friday, January 8, 2021

Dayein Hath Se Istinja Karne Ki Mumaniat (दाएं हाथ से इस्तिनजा करने की मुमानिअत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي قَتَادَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسلم: «إِذا شرب أحدكُم فَلَا ينتنفس فِي الْإِنَاءِ وَإِذَا أَتَى الْخَلَاءَ فَلَا يَمَسَّ ذَكَرَهُ بِيَمِينِهِ وَلَا يَتَمَسَّحْ بِيَمِينِهِ»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू क़तादा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़स कोई चीज़ पीयह तो वो बर्तन में सांस न ले और जब बैतुल ख़ला में जाए तो अपने दाए हाथ से अपनी शर्मगाह को न छुए और न दाए हाथ से इस्तिंजा करे।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (153), मुस्लिम (613), मिशकातुल मसाबीह (340)]*

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Thursday, January 7, 2021

Apne Peshab Se Ahtiyat Na Karna Kabeera Gunah Hai (अपने पेशाब से ऐहतियात न करना कबीरा गुनाह है)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقَبْرَيْنِ فَقَالَ إِنَّهُمَا لَيُعَذَّبَانِ وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ أَمَّا أَحدهمَا فَكَانَ لَا يَسْتَتِرُ مِنَ الْبَوْلِ - وَفِي رِوَايَةٍ لمُسلم: لَا يستنزه مِنَ الْبَوْلِ - وَأَمَّا الْآخَرُ فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ ثمَّ أَخذ جَرِيدَة رطبَة فَشَقهَا نِصْفَيْنِ ثُمَّ غَرَزَ فِي كُلِّ قَبْرٍ وَاحِدَةً قَالُوا يَا رَسُول الله لم صنعت هَذَا قَالَ لَعَلَّه يُخَفف عَنْهُمَا مَا لم ييبسا

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दो क़बरो के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया: “इन दोनों को अज़ाब दिया जा रहा है और उन्हें किसी बड़े गुनाह की वजह से अज़ाब नहीं दिया जा रहा है, उनमें से एक पेशाब करते वक़्त परदा नहीं किया करता था और मुस्लिम की रिवायत में है: पेशाब करते वक़्त एहतियात नहीं किया करता था, जबकि दूसरा शख़्स चुगलख़ोर था”। फिर आपने एक ताज़ा शाख़ लेकर उसके दो टुकड़े कर दिए, फिर हर क़ब्र पर एक टुकड़ा गाड़ दिया, सहाबा ने अर्ज़ किया: अल्लाह के रसूल! आपने यह क्यों किया? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मुमकिन है इनके ख़ुश्क होने तक उनके अज़ाब में कमी कर दी जाए”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (216), मुस्लिम (677), मिशकातुल मसाबीह (338)]*

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Wednesday, January 6, 2021

Baitul Khala Mein Jate Waqt Kya Padhna Chahiye (बैतुल ख़ला में जाते वक़्त क्या पढ़ना चाहिए)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ يَقُولُ: *«اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخبث والخبائث»*

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतूलख़ला में दाख़िल होते, तो फरमाते: “ऐ अल्लाह! मैं नापाक जिन्नों और नापाक मादा जिन्नातो से तेरी पनाह चाहता हूँ ।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (142), मुस्लिम (831), मिशकातुल मसाबीह (337)]*

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Tuesday, January 5, 2021

Dayein Hath Se, Teen Se Kam Dhelo Se, Leed Ya Haddi Ke Sath Istinja Karne Ki Mumaniat (दाएं हाथ से, तीन से कम ढेलों से, लीद या हड्डी के साथ इस्तिनजा करने की मुमानिअत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن سلمَان قَالَ: نَهَانَا يَعْنِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ لِغَائِطٍ أَوْ بَوْل أَو أَن نستنتجي بِالْيَمِينِ أَوْ أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِأَقَلَّ مِنْ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ أَوْ  أَنْ نَسْتَنْجِيَ بِرَجِيعٍ أَوْ بِعَظْمٍ. رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* सलमान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी हाजत पूरी (पेशाब व पख़ाना) करते वक़्त क़िब्ले की तरफ मुंह करने या दाए हाथ से इस्तिंजा करने या तीन से कम ढ़ेलों से इस्तिंजा करने या गोबर या हड्डी के साथ इस्तेंजा करने से हमें मना फ़रमाया।

📚 *[मुस्लिम (606), मिशकातुल मसाबीह (336)]*

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Monday, January 4, 2021

Sehra Mein Qible Rukh Hokar Qaza e Hajat Karne Ki Mumaniat (सहरा में क़िब्ले रुख़ होकर क़ज़ा ए हाजत करने की मुमानिअत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا أَتَيْتُمُ الْغَائِطَ فَلَا تَسْتَقْبِلُوا الْقِبْلَةَ وَلَا تَسْتَدْبِرُوهَا وَلَكِنْ شَرِّقُوا أَوْ غَرِّبُوا»
قَالَ الشَّيْخ الإِمَام محيي السّنة: هَذَا الْحَدِيثُ فِي الصَّحْرَاءِ وَأَمَّا فِي الْبُنْيَانِ فَلَا بَأْس لما رُوِيَ:

🍁 *तर्जुमा :-* अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम बैतूल ख़ला में जाओ, तो क़िब्ले की तरफ न मुंह करो और न पीठ, बल्कि पूरब या पश्चिम की तरफ मुंह करो”।
शेख़ुल इमाम मुह्युस्सुन्नाह रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया: यह हदीस जंगल में है, रहा घर या इमारत आदि में कोई हरज नहीं, जैसा कि अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी है।

📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (394), मुस्लिम (609), मिशकातुल मसाबीह (334)]*

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Sunday, January 3, 2021

Sharmgah Ko Bina Hijab Choone Se Wuzu Tootna (शर्मगाह को बिना हिजाब छूने से वुज़ू टूटना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن بسرة قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا مَسَّ أَحَدُكُمْ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ» . رَوَاهُ مَالِكٌ وَأَحْمَدُ وَأَبُو دَاوُدَ وَالتِّرْمِذِيُّ وَالنَّسَائِيُّ وَابْنُ مَاجَه والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* बुसरा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई अपनी शर्मगाह को हाथ लगाए तो वो वुज़ू करे”।

📚 *[ सहीह, मालिक (88), मुसनद अहमद (407,27836 -27838), अबू दावुद (181), तिरमिज़ी (82), नसाई (163), इब्ने माजा (479),दारमी (730), मिशकातुल मसाबीह (319)]*

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Saturday, January 2, 2021

Wuzu Ki Farziyat (वुज़ू की फ़रज़ियत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسلم: «مِفْتَاحُ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ وَتَحْرِيمُهَا التَّكْبِيرُ وَتَحْلِيلُهَا التَّسْلِيمُ» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُد وَالتِّرْمِذِيّ والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* अली रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तहारत नमाज़ की चाबी, तकबीर (अल्लाहुअकबर) इसकी तहरीम (इस तकबीर से नमाज़ शुरू करने से पहले जो काम मुबाह थे वो हराम हो जाते है) और तस्लीम (अस्सलामुअलैकुम वाराह्मतुल्लाह) इसकी तहलील है”। ( यानी सलाम फेरने से नमाज़ की सूरत में हराम होने वाले काम हलाल हो जाते हैं)।

📚 *[हसन, अबू दावुद (61), तिरमिज़ी (3), दारमी (693), इब्ने माजा (275) , मिशकातुल मसाबीह (312)]*

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Friday, January 1, 2021

Doodh Peene Ke Baad Kulli Karna (दूध पीने के बाद कुल्ली करना)

🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ قَالَ: إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَرِبَ لَبَنًا فَمَضْمَضَ وَقَالَ: «إِنَّ لَهُ دسما»

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दूध पिया, तो कुल्ली की और फ़रमाया: “इसमें चिकनाहट होती है”।

📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (211), मुस्लिम (798), मिशकातुल मसाबीह (307)]*

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Thursday, December 31, 2020

Oont Ke Gosht Se Wuzu Karna (ऊंट के गोश्त से वुज़ू करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن جَابر بن سَمُرَة أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَتَوَضَّأُ مِنْ لُحُومِ الْغَنَمِ؟ قَالَ: «إِنْ شِئْتَ فَتَوَضَّأْ وَإِنْ شِئْتَ فَلَا تَتَوَضَّأْ» . قَالَ أَنَتَوَضَّأُ مِنْ لُحُومِ الْإِبِلِ؟ قَالَ: «نَعَمْ فَتَوَضَّأْ مِنْ لُحُومِ الْإِبِلِ» قَالَ: أُصَلِّي فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ قَالَ: «نَعَمْ» قَالَ: أُصَلِّي فِي مبارك الْإِبِل؟ قَالَ: «لَا» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* जाबिर बिन समरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि किसी शख़्स ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मसअला पुछा: क्या हम बकरी का गोश्त खा कर वुज़ू करे? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अगर तुम चाहो वुज़ू करो और अगर चाहो तो ना करो”। उसने फिर पुछा: क्या हम ऊँट का गोश्त खाकर वुज़ू करें? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: हाँ, ऊँट का गोश्त खा कर वुज़ू करो”। उस शख़्स ने पूछा: क्या बकरियों के बाड़े में नमाज़ पढ़ लूँ? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “हाँ”। उसने पूछा: ऊँटों के बाड़े में नमाज़ पढूँ? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नहीं”।

📚 *[मुस्लिम (805), मिशकातुल मसाबीह (305)]*

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Wednesday, December 30, 2020

Mazi Ka Dhona Aur Iski Wajah Se Wuzu Karna (मज़ी का धोना और इसकी वजह से वुज़ू करना)

🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن عَليّ قَالَ: كُنْتُ رَجُلًا مَذَّاءً فَكُنْتُ أَسْتَحْيِي أَنْ أَسْأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِمَكَانِ ابْنَتِهِ فَأَمَرْتُ الْمِقْدَادَ فَسَأَلَهُ فَقَالَ: «يَغْسِلُ ذَكَرَهُ وَيتَوَضَّأ»

🍁 *तर्जुमा :-* अली रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं: मुझे बहुत ज़्यादा मज़ी आती थी, लेकिन मैं नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मसअला पूछते हुए शर्म महसूस करता था क्यूंकि आप मेरे सुसर थे, तो मैंने मिक़दाद रज़ियल्लाहू अन्हु से कहा तो उन्होंने आपसे पुछा तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वो शर्मगाह धोए और वुज़ू करे”।

📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (269), मुस्लिम (695), मिशकातुल मसाबीह (302)]*

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Tuesday, December 29, 2020

Namaz Ke Liye Wuzu Ka Wajib Hona ( नमाज़ के लिए वुज़ू का वाजिब होना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تُقْبَلُ صَلَاةُ بِغَيْرِ طُهُورٍ وَلَا صَدَقَةٌ مِنْ غُلُولٍ» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वुज़ू के बिना नमाज़ क़ुबूल नहीं की जाती है और ना हराम माल से सदक़ा”।

📚 *[मुस्लिम (535), मिशकातुल मसाबीह (301)]*

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Monday, December 28, 2020

Wuzu Ke Naqis Hone Ka Asar Namaz Par Padta Hai ( वुज़ू के नाक़िस होने का असर नमाज़ पर पड़ता है)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن شبيب بن أبي روح عَنْ رَجُلٍ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَّى صَلَاةَ الصُّبْحِ فَقَرَأَ الرُّومَ فَالْتَبَسَ عَلَيْهِ فَلَمَّا صَلَّى قَالَ: «مَا بَالُ أَقْوَامٍ يُصَلُّونَ مَعَنَا لَا يُحْسِنُونَ الطَّهُورَ فَإِنَّمَا يلبس علينا الْقُرْآن أُولَئِكَ» . رَوَاهُ النَّسَائِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* शबीब बिन अबी रौह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किसी सहाबी से रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़ज्र की नमाज़ अदा की तो सूरह अर-रूम की तिलावत फ़रमाई, आप भूल गए, जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज़ पढ़ो चुके, तो फ़रमाया: “लोगो को क्या हो गया है कि वो हमारे साथ नमाज़ पढ़ते हैं लेकिन वो अच्छी तरह वुज़ू नहीं करते, यही लोग तो हमें क़ुरआन भुला देते हैं। 

📚 *[इसकी सनद सहीह है, नसाई (948), मुसनद अहमद (15968), मिशकातुल मसाबीह (295)]*

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Sunday, December 27, 2020

Wuzu Ki Hifazat Karna (वुज़ू की हिफ़ाज़त करना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ ثَوْبَانَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «اسْتَقِيمُوا وَلَنْ تُحْصُوا وَاعْلَمُوا أَنَّ خَيْرَ أَعْمَالِكُمُ الصَّلَاةُ وَلَا يُحَافِظُ عَلَى الْوُضُوءِ إِلَّا مُؤْمِنٌ» . رَوَاهُ مَالِكٌ وَأَحْمَدُ وَابْنُ مَاجَهْ وَالدَّارِمِيُّ

🍁*तर्जुमा :-* सौबान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “दुरुस्त रहो और तुम इसकी ताक़त नहीं रखते और जान लो कि नमाज़ तुम्हारा बेहतरीन अमल है और वुज़ू की हिफाज़त सिर्फ़ मोमिन शख़्स ही कर सकता है”।

📚 *[हसन, मोअत्ता मालिक (65), मुसनद अहमद (22778), इब्ने माजा (277), दारमी (661), मुस्तदरक हाकिम (449), मिशकातुल मसाबीह (292)]*

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Saturday, December 26, 2020

Zewar Wahan Tak Pahunchega Jahan Tak Wuzu Ka Pani Pahunchega (ज़ेवर वहाँ तक पहुंचेगा जहां तक वुज़ू का पानी पहुंचेगा)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «تَبْلُغُ الْحِلْيَةُ مِنَ الْمُؤْمِنَ حَيْثُ يبلغ الْوضُوء» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “मोमिन का ज़ेवर वहां तक होगा जहाँ तक उसके वुज़ू का पानी पहुँचता है”। 

📚 *[मुस्लिम (586), मिशकातुल मसाबीह (291)]*

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Friday, December 25, 2020

Wuzu Ki Fazeelat ( वुज़ू की फ़ज़ीलत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عَلَيْهِ وَسلم: «إِن أُمَّتِي يُدْعَوْنَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ غُرًّا مُحَجَّلِينَ مِنْ آثَارِ الْوُضُوءِ فَمَنِ اسْتَطَاعَ مِنْكُمْ أَنْ يُطِيلَ غرته فَلْيفْعَل»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “बेशक मेरी उम्मत के लोगो को क़यामत के दिन बुलाया जाएगा, तो वुज़ू के निशानों की वजह से उनके हाथ पाँव और पेशानी चमकती होगी, तो तुममें से जो शख़्स अपनी चमक को बढ़ाना चाहे तो वो बढ़ा ले”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (136), मुस्लिम (580), मिशकातुल मसाबीह (290)]*

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Surah Fatiha Part 8 (सुरह फ़ातिहा भाग 8)

   *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 8*

किसी बीमारी से शिफ़ा पाने के लिए जो दुआ पढ़ कर मरीज़ को दम किया जाता है, वो भी “बिस्मिल्लाह” से शुरू होती है, जैसा कि सय्यदना अबू सईद ख़ुदरी (र) बयान करते हैं, जिब्रील अलैहिस्सलाम रसूलुल्लाह (स) के पास आये और पूछा: “ऐ मुहम्मद! क्या आप बीमार हैं”? रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “हाँ!” तो जिब्रील अलैहिस्सलाम ने यह दुआ पढ़ी:

}}بِاسْمِ اللهِ أَرْقِيكَ، مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ، مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ، أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ، اللَّهُ يَشْفِيكَ بِاسْمِ اللهِ أَرْقِيكَ{{

“अल्लाह के नाम के साथ, मैं तुम्हारे लिए हर उस चीज़ से जो तुम्हें तकलीफ़ पहुँचाती है और हर नफ़्स की बुराई से या हासिद की नज़रे बद की बुराई से शिफ़ा तलब करता हूँ, अल्लाह तुम्हें शिफ़ा अता करे, मैं अल्लाह के नाम के साथ तुम्हारे लिए शिफ़ा तलब करता हूँ”। *[मुस्लिम: 5700]*

जिस जगह दर्द हो वहाँ हाथ रख कर तीन बार “बिस्मिल्लाह” पढ़ना, जैसा कि सय्यदना उस्मान बिन अबुल आस (र) ने रसूलुल्लाह (स) से अपने जिस्म में किसी जगह दर्द होने की शिकायत की, जो इस्लाम क़ुबूल करने के बाद पहली बार हुआ था, तो रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “अपना हाथ दर्द की जगह रखो, फिर तीन बार “बिस्मिल्लाह” और सात बार यह दुआ पढ़ो:

}}أَعُوذُ بِاللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِر{{

“मैं अल्लाह की और उसकी क़ुदरत की पनाह तलब करता हूँ इस बीमारी की बुराई से जो इस वक़्त मुझे हुई है और इससे भी जिसके आगे होने का ख़तरा है”। *[मुस्लिम: 5737]*

बीमार की शिफ़ा पाने के लिए शहादत की उंगली ज़मीन पर रखिये, फिर उसे उठा कर यह दुआ पढ़िए, जैसा कि सय्यदा आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि बेशक रसूलुल्लाह (स) (मरीज़ की शिफ़ा के लिए) यह दुआ पढ़ते थे: *{{ بِاسْمِ اللَّهِ تُرْبَةُ أَرْضِنَا بِرِيقَةِ بَعْضِنَا لِيُشْفَى بِهِ سَقِيمُنَا بِإِذْنِ رَبِّنَا}}* “अल्लाह के नाम के साथ, हमारी ज़मीन की मिट्टी और हममें से कुछ के लुआबे दहन से हमारे रब के हुक्म से हमारा मरीज़ शिफ़ा पा जाए”। *[बुख़ारी: 5746]*

मुस्लिम के अल्फ़ाज़ हैं कि आप (स) अपनी शहादत वाली उंगली ज़मीन पर रखते, फिर उठाते और ऊपर ज़िक्र की हुई दुआ पढ़ते। *[मुस्लिम: 5719]*

खाना खाने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना चाहिए, जैसा कि सय्यदना उमर बिन अबी सलमा (र) बयान करते हैं कि मैं जब बच्चा था और रसूलुल्लाह (स) की परवरिश में था और (खाना खाते वक़्त) मेरा हाथ बर्तन में चरों तरफ़ घूमा करता था, तो रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया:

 }}يَا غُلَامُ، سَمِّ اللَّهَ وَكُلْ بِيَمِينِكَ وَكُلْ مِمَّا يَلِيكَ{{

“ऐ लड़के! बिस्मिल्लाह पढ़ कर अपने दाएँ हाथ से खाओ और अपने सामने से खाओ”। *[बुख़ारी: 5376, मुस्लिम: 5269]*

अगर खाने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना भूल जाए तो याद आने पर नीचे दी गयी दुआ पढ़िए, सय्यदा आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई खाना खाये तो बिस्मिल्लाह कहे, अगर शुरू में “बिस्मिल्लाह” भूल जाये तो यह दुआ पढ़े:

}}بِسْمِ اللَّهِ فِي أَوَّلِهِ وَآخِرِهِ{{

“अल्लाह तआला के नाम के साथ (खाता हूँ) इसके शुरू और इसके आख़िर में”। *[तिरमिज़ी: 1858]*

जानवर ज़िबह करते वक़्त की दुआ, सय्यदना अनस (र) बयान करते हैं, रसूलुल्लाह (स) ने दो चितकबरे, सींगों वाले मेंढ़ों की क़ुरबानी दी और उन्हें अपने हाथ से ज़िबह किया और आपने यह दुआ पढ़ी: *{{بِاسْمِ اللَّهِ وَاللَّهُ أَكْبَرُ}}* “अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह सबसे बड़ा है”। *[बुख़ारी (5565), मुस्लिम (5087)]*

शिकार के लिये शिकारी जानवर या तीर छोड़ते वक़्त “बिस्मिल्लाह” कहना, जैसा कि सय्यदना अदी बिन हातिम (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुम (शिकार के लिए) अपना कुत्ता छोड़ो तो बिस्मिल्लाह कहो और अगर तुम अपना तीर फेंकों तो बिस्मिल्लाह कहो”। *[मुस्लिम: 4981, बुख़ारी: 5487]*

जिस ज़बीहा के बारे में इल्म न हो कि इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ी गई है या नहीं तो ख़ुद बिस्मिल्लाह पढ़ लीजिए जैसा कि सय्यदा आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि एक बार कुछ लोगों ने रसूलुल्लाह (स) से पूछा कि कुछ लोग हमारे पास गोश्त लाते हैं, हमें नहीं मालूम कि उन्होंने इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ी है या नहीं, रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “तुम इस पर बिस्मिल्लाह पढ़ लो और खा लो”। आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि यह लोग अभी इस्लाम में नये नये दाख़िल हुए थे। *[बुख़ारी: 5507]*

घर में दाख़िल होते वक़्त “बिस्मिल्लाह” पढ़ने की फ़ज़ीलत बयान करते हुए सय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) फ़रमाते हैं: “जब कोई शख़्स अपने घर में दाख़िल होते वक़्त और खाना खाते वक़्त अल्लाह का ज़िक्र करे तो शैतान (अपने साथियों से) कहता है, अब तुम्हारे लिए न ठिकाना है न खाना और अगर वो शख़्स दाख़िल होते वक़्त अल्लाह का नाम न ले तो शैतान (अपने साथियों से) कहता है, अब तुम्हें रहने के लिए ठिकाना मिल गया”। *[मुस्लिम: 5262]*

सोने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ कर अन्जाम दिए जाने वाले कुछ आमाल बयान करते हुए सय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुम सोने लगो तो दरवाज़ों को अल्लाह का नाम ले कर बन्द कर दो, क्यूंकि शैतान बन्द दरवाज़े को नहीं खोलता, अल्लाह का नाम ले कर मिश्कीज़ों (बोतलों) के मुंह बाँध दो. अल्लाह का नाम ले कर अपने बर्तनों को ढ़क दो, चाहे किसी चीज़ को चौड़ाई में रख ही ढ़क सको और (अल्लाह का नाम लेकर) अपने दिये बुझा दो”। *[बुख़ारी: 5623]*

लशकर को रवाना करते वक़्त रसूलुल्लाह (स) की नसीहत, सय्यदना बुरैदा (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) जब किसी लशकर को नसीहत फ़रमाते तो कहते: {{اغْزُوا بِاسْمِ اللَّهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ}} “अल्लाह का नाम लेकर अल्लाह के रास्ते में जिहाद करो”। *[मुस्लिम: 4522]*

बिस्तर पर लेटते वक़्त, सय्यदना अबू हुरैरा (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई शख़्स अपने बिस्तर पर आये तो वो अपने तहबन्द के एक कोने (या किसी कपड़े) से पाने बिस्तर को अल्लाह का नाम लेकर (यानी “बिस्मिल्लाह” कह कर) तीन बार झाड़े”। *[मुस्लिम: 6892, बुख़ारी: 7393]*

सवारी पर सवार होते वक़्त “बिस्मिल्लाह” पढ़ना, जैसा कि अली बिन रबीअ कहते हैं, मेरे सामने अली (र) के लिए सवारी लायी गई, जब उन्होंने रकाब में पैर रखा तो “बिस्मिल्लाह” कहा, फिर जब इसकी पीठ पर सीधे बैठ गए तो कहा “अल्हम्दुलिल्लाह” फिर कहा:

*سُبْحٰنَ الَّذِیْ سَخَّرَ لَنَا هٰذَا وَ مَا كُنَّا لَهٗ مُقْرِنِیْنَۙ۝۱۳وَ اِنَّاۤ اِلٰى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُوْنَ۝۱۴*

“अल्लाह तमाम बुराइयों से पाक है, जिसने इस सवारी को हमारे लिए मुसख़्ख़र कर दिया, हालांकि हम इसको क़ाबू में न ला सकते थे और बेशक हम अपने रब ही की तरफ़ लौट कर जाने वाले हैं” फिर सय्यदना अली (र) ने कहा, मैंने रसूलुल्लाह (स) को देखा वो भी ऐसा ही करते थे जैसा मैंने किया। *[अबू दावूद: 2602, तिरमिज़ी: 3446]*

जारी है...................................

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Surah Fatiha Part 7 (सुरह फ़ातिहा भाग 7)

  *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 7*

*بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ*

“अल्लाह के नाम से जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है”।

सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सूरतों का फ़र्क़ न पहचानते थे, यहाँ तक कि “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ” नाज़िल की जाती। *[अबू दावूद: 788]*

सय्यदना अनस (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “मुझ पर अभी एक सूरत नाज़िल हुई है”। फिर आपने इस तरह तिलावत फ़रमाई:

*بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ۝اِنَّاۤ اَعْطَیْنٰكَ الْكَوْثَرَؕ۝۱فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَ انْحَرْؕ۝۲اِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْاَبْتَرُ۠۝۳*

“अल्लाह के नाम से जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है। बेशक हमने तुझे कौसर अता की, तो तू अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ और क़ुरबानी कर, यक़ीनन तेरा दुशमन ही बेऔलाद होगा”। *[मुस्लिम: 894]*

नुऐम रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं, मैंने अबू हुरैरा (र) के पीछे नमाज़ पढ़ी, उन्होंने सुरह फ़ातिहा से पहले “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ” की तिलावत की...................फिर फ़रमाया, क़सम उस ज़ात की, जिसके हाथ में मेरी जान है! मैं नमाज़ पढ़ने के लिहाज़ से तुम सबसे ज़्यादा रसूलुल्लाह (स) की तरह हूँ। *[नसाई: 906]*

इस मसले में कि “बिस्मिल्लाह” को जहरन (ऊँची आवाज़ से) पढ़ा जाए या सिर्रन (धीमी आवाज़ से), अल्लामा इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाह की बात एतिदाल वाली है कि नबी करीम (स) इसे कभी जहरन पढ़ते थे और कभी सिर्रन, हाँ, आपका सिर्रन पढ़ना ज़्यादा साबित है।

सय्यदना अनस बिन मालिक (र) से नबी (स) की क़िरआत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने फ़रमाया कि आप (स) अल्फाज़ को ख़ींच कर क़िरआत फ़रमाया करते थे, फिर उन्होंने “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ” की इस तरह क़िरआत करके दिखाई कि “بِسْمِ اللّٰهِ” को ख़ींच कर, फिर “الرَّحْمٰنِ” को ख़ींच कर और फिर “الرَّحِيْمِ” को ख़ींच कर पढ़ा। *[बुख़ारी: 5046]*

क़ुरआन करीम की कई आयतें और सहीह हदीसों से मालूम होता है कि एक मुसलमान की ज़िन्दगी में “बिस्मिल्लाह” की बड़ी अहमियत है और कोई भी काम करने से पहले *“बिस्मिल्लाह”* कहना ख़ैर व बरकत का ज़रिया, अल्लाह की मदद व हिमायत का ज़रिया और ताईद व हिफाज़त का सबब है। “बिस्मिल्लाह” कहने से शैतान ज़लील हो जाता है, जैसा कि अबुल मलीह एक सहाबी से बयान करते हैं, वो कहते हैं कि मैं गधे पर नबी करीम (स) के पीछे सवार था, गधा ज़रा फिसला तो मैंने कहा, शैतान का बुरा हो, तो नबी (स) ने मुझसे फ़रमाया: “यह न कहो कि शैतान का बुरा हो, क्यूंकि इससे शैतान फूल जाता है और कहता है कि मैंने अपनी ताक़त के साथ इसे गिराया है, सो अगर तुम “बिस्मिल्लाह” कहो तो इससे शैतान अपने आपको निहायत छोटा और हक़ीर समझता है, यहाँ तक कि मक्खी से भी ज़्यादा छोटा और ज़्यादा हक़ीर”। *[मुसनद अहमद: 20616, सुनन कुबरा लिननसाई: 10388]*

ख़त व किताबत की शुरूआत “बिस्मिल्लाह” से करना चाहिए, जैसा कि सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है कि सय्यदना अबू सुफ़ियान (र) ने बयान किया कि रसूलुल्लाह (स) ने हरक़ुल के नाम एक ख़त लिखा था, जब बादशाह ने उस ख़त को मंगवाया तो उसके शुरू में यह लिखा था: {{بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ}} *[बुख़ारी: 7, मुस्लिम: 4607]*

सय्यदना सुलैमान अलैहिस्सलाम ने जो ख़त मलका सबा को लिखा था उसकी शुरूआत इस तरह होती है:

*اِنَّهٗ مِنْ سُلَیْمٰنَ وَ اِنَّهٗ بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِۙ۝۳۰*

“बेशक वो सुलैमान की तरफ़ से है और बेशक वो अल्लाह के नाम से है जो बेहद रहम वाला, निहायत मेहरबान है”। *[अन-नम्ल: 30]*

सय्यदना मिसवर बिन मख़ज़मह और मरवान रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने जब हुदैबिया के मक़ाम पर सुलह नामा लिखवाने का इरादा किया तो आपने कातिब को बुलवाया और उससे फ़रमाया: {{اكْتُبْ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ}} “بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ लिखो”। *[बुख़ारी: 2731,2732, मुस्लिम: 4632]*

वुज़ू से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना ज़रूरी है, जैसा कि सय्यदना अनस (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: {{تَوَضَّئُوا بِسْمِ اللَّهِ}} “अल्लाह के नाम के साथ वुज़ू करो”। *[नसाई: 78]*

बीवी से हमबिस्तरी करने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ना, जैसा कि सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: “जब तुममें से कोई अपनी बीवी के पास आये तो यह कहे: *{{بِاسْمِ اللَّهِ اللَّهُمَّ جَنِّبْنِي الشَّيْطَانَ وَجَنِّبْ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا}}* “अल्लाह के नाम के साथ, ऐ अल्लाह! हमें शैतान से महफूज़ रख और जो (औलाद) तू हमें दे उसे भी शैतान से महफूज़ रख” तो अब अगर मुक़द्दर में औलाद है तो शैतान इसको कभी नुक़सान नहीं पहुँचाएगा”। *[बुख़ारी: 5165, मुस्लिम: 3533]*

जारी है...................................

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Tafseer Dawat ul Quran (Hindi Translation) Part 8

 أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم● 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 📒 तफ़सीर दावतुल क़ुरआन 📒 ✒️ लेख़क: अ...