🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃
🍁 *حدیث:-* وَعَن عَليّ قَالَ: كُنْتُ رَجُلًا مَذَّاءً فَكُنْتُ أَسْتَحْيِي أَنْ أَسْأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِمَكَانِ ابْنَتِهِ فَأَمَرْتُ الْمِقْدَادَ فَسَأَلَهُ فَقَالَ: «يَغْسِلُ ذَكَرَهُ وَيتَوَضَّأ»
🍁 *तर्जुमा :-* अली रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं: मुझे बहुत ज़्यादा मज़ी आती थी, लेकिन मैं नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मसअला पूछते हुए शर्म महसूस करता था क्यूंकि आप मेरे सुसर थे, तो मैंने मिक़दाद रज़ियल्लाहू अन्हु से कहा तो उन्होंने आपसे पुछा तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “वो शर्मगाह धोए और वुज़ू करे”।
📚 *[ मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (269), मुस्लिम (695), मिशकातुल मसाबीह (302)]*
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