Search This Blog

Sunday, March 28, 2021

कलिमा ए तौहीद (Kalima e Tauheed)

 

कलिमा ए तौहीद

शेख़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा ज़हीर अमनपुरी हफ़िज़ल्लाह

ला इलाहा इल्लल्लाह दीने इस्लाम की असास, ईमान व कुफ़्र में फ़र्क़ और निजात का राज़ है, यह वो मज़बूत कड़ा है, जिसे थामने वाला राहे हक़ से कभी नहीं भटक सकता, यह कलिमा ए शहादत हक़ और दावते हक़ है, जिस पर ज़मीन व आसमान का निज़ाम क़ायम है और हिसाब व किताब का अमल इसी पर निर्भर है। यह तमाम इंसानों की फ़ितरत भी है और तमाम नबियों की विरासत भी, यही अज़ाबे क़ब्र से निजात की वजह और जन्नत की कुंजी है, अल्लाह तआला तक पहुँचने के लिए इसी मज़बूत सहारे की ज़रुरत है, इसी से ख़ुश बख़्त और बदनसीब में फ़र्क़ किया जाता है। यह इंसानों पर अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है, यह अल्लाह तआला का बन्दों पर हक़ है, यह अल्लाह के अलावा तमाम माबूदों की नफ़ी करता है, ख़ुद अल्लाह तआला ने इसकी गवाही दी और फ़रिशतों और अहले इल्म ने इसकी तौसीक़ की।

फ़रमाने बारी तआला है:

شَهِدَ اللّٰهُ اَنَّهٗ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ١ۙ وَ الْمَلٰٓىِٕكَةُ وَ اُولُوا الْعِلْمِ قَآىِٕمًۢا بِالْقِسْطِ١ؕ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ الْعَزِیْزُ الْحَكِیْمُؕ۝۱۸

“अल्लाह तआला, उसके फ़रिशतों और इन्साफ़ वाले अहले इल्म ने गवाही दी है कि अल्लाह के सिवा कोई इलाह नहीं, वही ग़ालिब हिकमत वाला है।” (आले इमरान:18)

तमाम रसूलों को अल्लाह तआला ने इसी कलिमे के साथ भेजा है, फ़रमाया:

وَ مَاۤ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَّسُوْلٍ اِلَّا نُوْحِیْۤ اِلَیْهِ اَنَّهٗ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّاۤ اَنَا فَاعْبُدُوْنِ۝۲۵

“हमने आपसे पहले जितने रसूल भेजे सबकी तरफ़ यह वही की कि मेरे सिवा कोई इलाह नहीं, तो सिर्फ़ मेरी इबादत करो।” (अल-अम्बिया:25)

हाफ़िज़ इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाह अलैह (751हि) मोमिन दे दिल में इस कलिमे के असर का ज़िक्र करते हुए लिखते हैं:

من رَسَخَت هذه الكلمةُ في قلبه بحقيقتها التي هي حقيقتها واتَّصَف قلبُه بها وانْصَبَغَ بها بصبغة اللَّه التي لا أحسن صبغةً منها، فعرف حقيقة الإلهيَّة التي يُثْبتها قلبه للَّه ويَشهد بها لسانُه وتُصَدِّقها جوارحه، ونَفَى تلك الحقيقة ولوازمها عن كل ما سوى اللَّه، وواطأ قلبُه لسانَه في هذا النفي والإثبات، وانقادتْ جوارحُه لمن شهد له بالوحدانية طائعةً سالكةً سبلَ ربه ذُللًا غير ناكبةٍ عنها ولا باغيةٍ سواها بدلًا، كما لا يبتغي القلبُ سوى معبوده الحق بدلًا؛ فلا ريب أنَّ هذه الكلمة مِنْ هذا القلب على هذا اللسان لا تزال تُؤتي ثمرها من العمل الصالح الصاعِدِ [إلى اللَّه كل وقت؛ فهذ  الكلمة الطيبة هي التي رفعت هذا العمل الصالح الصاعد إلى الربِّ تعالى ، وهذه الكلمة الطيبة تُثمرُ كَلِمًا  كثيرًا طيِّبًا يقارنه  عملٌ صالح فيرفعُ العملُ الصَّالحُ الكلمَ الطيب، كما قال تعالى: {إِلَيْهِ يَصْعَدُ الْكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالْعَمَلُ الصَّالِحُ يَرْفَعُهُ (فاطر: 10) فأخبر سبحانه  أن العمل الصالح يرفع الكلم الطيب، وأخبر أن الكلمة الطيبة تُثْمر لقائلها عملًا صالحًا كل وقت.

“जिस शख़्स के दिल में यह कलिमा हक़ीक़तन रासिख़ हो जाये, उसका दिल, इस कलिमे की हक़ीक़त को जानने वाला और अल्लाह के इस रंग में रंगा जाये, जिससे अच्छा कोई और रंग नहीं हो सकता, वो ज़ाते इलाही को जानने वाला हो जायेगा, जो दिल को अल्लाह के लिए पुख़्ता कर देती है, उसकी ज़बान इसकी गवाही देने लगती है और जिस्म के हिस्से इसकी तसदीक़ शुरू कर देते हैं। यह हक़ीक़त और उसके लाज़िमात अल्लाह के सिवा हर चीज़ की नफ़ी करते हैं, फिर दिल इस नफ़ी और मानने में ज़बान का साथ देता है और जिस्म के हिस्से उस ज़ात के लिए फ़रमाबरदार हो जाते हैं, जिसके लिए तौहीद की गवाही दी होती है, उसके सिवा किसी की ज़रुरत नहीं रहती, यक़ीनन इस दिल व ज़बान से जारी होने वाला यह कलिमा नेक आमाल की सूरत में हर वक़्त फल देता रहता है, यही कलिमा इस नेक अमल को अल्लाह की तरफ़ बुलंद करता है, फ़रमाने बारी तआला है: यह (कलिमा) इस नेक अमल को अल्लाह की तरफ़ बुलंद करता है और अपने कहने वाले को हर वक़्त नेक अमल की तरफ़ शौक़ पैदा करता रहता है। ख़ुलासा यह कि जब मोमिन कलिमा ए तौहीद के माने व मफ़हूम को जानते हुए इसकी गवाही देता है, इसके तक़ाज़ो को पूरा करता है, उसका दिल, ज़बान और जिस्म के हिस्से उसकी तौसीक़ करते हैं, तो फिर यही कलिमा गवाही देने वाले के नेक अमल को बुलंद करता है, इस अमल की जड़ मज़बूत और रासिख़ होकर इसके दिल में होती है और इसकी शाख़ें आसमानों तक पहुँच जाती हैं और यह हर वक़्त नेक अमल की सूरत में फल देता रहता है।” (ऐलामुल मोक़िईन:1/172-173)

कआब अहबार रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं:

“अल्लाह तआला ने कलाम का चुनाव किया, तो अल्लाह के नज़दीक पसंदीदा कलाम ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ ठहरा, यह कलिमा इख़लास है, जो यह कलिमा पढ़ेगा, अल्लाह तआला उसके लिए बदले में बीस नेकियाँ लिख देगा और उसकी बीस बुराइयाँ मिटा देगा और जो ‘अल्लाहुअकबर’  कहेगा, अल्लाह तआला इसके बदले उसके लिए बीस नेकियाँ लिखेगा और बीस बुराइयाँ मिटा देगा, क्यूंकि यह अल्लाह तआला की ताज़ीम पर मबनी कलिमे हैं और जो शख़्स ‘सुबहानल्लाह’ कहेगा, उसके लिए अल्लाह तआला बीस नेकियाँ लिख देगा और बीस बुराइयाँ मिटा देगा और ‘अल्हम्दुल्लिल्लाह’ कहेगा तो यह अल्लाह की सना है और सना हम्द ही होती है, उसके लिए अल्लाह तआला तीस नेकियाँ लिख देगा और तीस बुराइयाँ मिटा देगा।” (अमअलुल यौम वल लैल लिननसाई: 843, इसकी सनद हसन है)

क़तादा रहमतुल्लाह {{اَلَا لِلّٰهِ الدِّیْنُ الْخَالِصُ}} (अज़-ज़ुमर:3) अलैह की तफ़सीर में फ़रमाते हैं:

“इससे मुराद ला इलाहा इल्लल्लाह की गवाही है।” (तफ़सीर अब्दुर्रज्ज़ाक़:3/171, इसकी सनद सहीह है)

इस आयत की तफ़सीर में अल्लामा मुहम्मद अमीन शिनक़ीती रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

أَمَرَ اللَّهُ جَلَّ وَعَلَا نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ. فِي هَذِهِ الْآيَةِ الْكَرِيمَةِ، أَنْ يَعْبُدَهُ فِي حَالِ كَوْنِهِ، مُخْلِصًا لَهُ الدِّينَ، أَيْ مُخْلِصًا لَهُ فِي عِبَادَتِهِ، مِنْ جَمِيعِ أَنْوَاعِ الشِّرْكِ صَغِيَرِهَا وَكَبِيرِهَا، كَمَا هُوَ وَاضِحٌ مِنْ لَفْظِ الْآيَةِ. وَالْإِخْلَاصُ، إِفْرَادُ الْمَعْبُودِ بِالْقَصْدِ، فِي كُلِّ مَا أَمَرَ بِالتَّقَرُّبِ بِهِ إِلَيْهِ، وَمَا تَضَمَّنَتْهُ هَذِهِ الْآيَةُ الْكَرِيمَةُ، مِنْ كَوْنِ الْإِخْلَاصِ فِي الْعِبَادَةِ لِلَّهِ وَحْدَهُ، لَا بُدَّ مِنْهُ، جَاءَ فِي آيَاتٍ مُتَعَدِّدَةٍ، وَقَدْ بَيَّنَ جَلَّ وَعَلَا، أَنَّهُ مَا أَمَرَ بِعِبَادَةٍ، إِلَّا عِبَادَةً يُخْلِصُ لَهُ الْعَابِدُ فِيهَا وَقَوْلُهُ تَعَالَى فِي هَذِهِ الْآيَةِ الْكَرِيمَةِ: أَلَا لِلَّهِ الدِّينُ الْخَالِصُ أَيِ: التَّوْحِيدُ الصَّافِي مِنْ شَوَائِبِ الشِّرْكِ، أَيْ: هُوَ الْمُسْتَحِقُّ لِذَلِكَ وَحْدَهُ، وَهُوَ الَّذِي أَمَرَ بِهِ. وَقَوْلُ مِنْ قَالَ مِنَ الْعُلَمَاءِ: إِنَّ الْمُرَادَ بِالدِّينِ الْخَالِصِ كَلِمَةُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مُوَافِقٌ لِمَا ذَكَرْنَاهُ. وَالْعِلْمُ عِنْدَ اللَّهِ تَعَالَ

इस आयते करीमा में अल्लाह तआला ने अपने नबी को हुक्म दिया है कि वो ख़ालिस उसकी इबादत करें, यानी उसकी इबादत को शिर्क की तमाम क़िस्मों से पाक करें, चाहे शिर्के असग़र हो या अकबर, यही मुराद आयत से वाज़ेह है।”

इख़लास यह है कि अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करने के लिए इबादत की जितनी भी सूरतें हैं, उनमें अल्लाह को लाशारीक कर दिया जाये, मालूम हुआ कि इख़लास ज़रूरी चीज़ है, बहुत सी आयतों में इसकी ताकीद है, अल्लाह का फ़रमान है कि उसने सिर्फ़ ऐसी इबादत का हुक्म दिया है, जो आबिद की तरफ़ से ख़ालिस उसी के लिए हो। इस आयते करीमा में फ़रमाने बारी तआला: से मुराद वो तौहीद है, जो शिर्क की मिलावट से भी पाक हो, यानी सिर्फ़ वही उसका मुसतहक़ है और इसी का उसने हुक्म दिया है, जिन उलमा ने इस आयत में ‘अद-दीनुल ख़ालिस’ से मुराद ला इलाह इल्लल्लाह लिया है, हमारी बात उनके मुआफ़िक़ है, वल्लाहु आलम।” (अज़वाउल बयान:7/42)

अम्र बिन मैमून रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि फ़रमाने बारे तआला: {{وَ اَلْزَمَهُمْ كَلِمَةَ التَّقْوٰى}} (अल-फ़तह:26) “अल्लाह ने उन मुसलमानों को तक़वे का कलिमा अता कर दिया।, में ‘“कलिमतुत तक़वा”’ की तफ़सीर ला इलाहा इल्लल्लाह है। (तफ़सीरे तबरी:31585, हुलियतुल औलिया:4/194, इसकी सनद सहीह है)

क़तादा बिन दिआमा रहमतुल्लाह अलैह से भी यही तफ़सीर मनक़ूल है। (तफ़सीर अब्दुर्रज्ज़ाक़:3/229, इसकी सनद सहीह है)

इमाम मुजाहिद रहमतुल्लाह अलैह भी यही कहते है। (तफ़सीरे तबरी:31588, इसकी सनद सहीह है)

हसन बसरी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

لا إله إلا الله ثَمَنُ الجنَّة

“ला इलाहा इल्लल्लाह जन्नत की क़ीमत है।” (मुसन्न्फ़ इब्ने अबी शैबा:13/529, इसकी सनद सहीह है)

इस आयत की तफ़सीर में अल्लामा शिनक़ीती रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं:

इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने इस कलिमे तौहीद को दो तरह से अपनी औलाद में बाक़ी रखा; एक तो इस तरह कि अपनी औलाद को इसकी वसीयत की, वो पुश्त दर पुश्त एक दुसरे को यही वसीयत करते आये, जैसा कि इस आयते मुबारका में अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया है:

وَ مَنْ یَّرْغَبُ عَنْ مِّلَّةِ اِبْرٰهٖمَ اِلَّا مَنْ سَفِهَ نَفْسَهٗ١ؕ وَ لَقَدِ اصْطَفَیْنٰهُ فِی الدُّنْیَا١ۚ وَ اِنَّهٗ فِی الْاٰخِرَةِ لَمِنَ الصّٰلِحِیْنَ۝۱۳۰ِذْ قَالَ لَهٗ رَبُّهٗۤ اَسْلِمْ١ۙ قَالَ اَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعٰلَمِیْنَ۝۱۳۱وَ وَصّٰى بِهَاۤ اِبْرٰهٖمُ بَنِیْهِ وَ یَعْقُوْبُ١ؕ یٰبَنِیَّ اِنَّ اللّٰهَ اصْطَفٰى لَكُمُ الدِّیْنَ

कौन है, जो इब्राहीम के दीन से मुंह मोड़े, सिवाए उसके जिसने अपने आपको बेवक़ूफ़ बना लिया हो, हमने उनको दुनिया में चुन लिया था और आख़िरत में भी नेकोकारों में से होंगे, उस वक़्त को याद करो, जब उनको रब ने फ़रमाया: फ़रमाबरदार हो जाओ, तो कहने लगे: मैं जहानों के रब के लिए फ़रमांबरदार हो गया हूँ और इब्राहीम ने इस बात की अपने बीटों को वसीयत की, फिर याक़ूब ने भी कि बेशक अल्लाह तआला ने तुम्हारे लिए दीन (तौहीद) को चुन लिया है।”(अल-बक़रा: 130-132) दुसरे इस तरह कि आप अलैहिस्सलाम ने अल्लाह से अपनी औलाद के ईमान व इस्लाह के लिए dua की थी, अल्लाह तआला ने इसे यूं बयान किया है:

وَ اِذِ ابْتَلٰۤى اِبْرٰهٖمَ رَبُّهٗ بِكَلِمٰتٍ فَاَتَمَّهُنَّ١ؕ قَالَ اِنِّیْ جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ اِمَامًا١ؕ قَالَ وَ مِنْ ذُرِّیَّتِیْ

जब इब्राहीम को उसके रब ने कुछ अवामिर व नवाही से आज़माया, आपने उनको पूरा कर दिखाया, अल्लाह ने फ़रमाया: मैं तुजे लोगों के लिए इमाम बनाऊँगा, उसने कहा; मेरी औलाद से भी (इमाम बना दे)।”(अल-बक़रा: 124) अल्लाह तआला ने इसके बाद आने वाले तमाम नबियों को उनकी औलाद से पैदा किया, जैसा कि सूरह अनकबूत में फ़रमाया:

وَ وَهَبْنَا لَهٗۤ اِسْحٰقَ وَ یَعْقُوْبَ وَ جَعَلْنَا فِیْ ذُرِّیَّتِهِ النُّبُوَّةَ وَ الْكِتٰبَ

हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब अता किये और नबूवत और किताब उनकी औलाद में जारी कर दी।”(अनकबूत:27) सूरह ज़ुख़रुफ़ की इस आयत में अल्लाह ने बयान कर दिया है कि उसने इब्राहीम अलैहिस्सलाम की इस दुआ को उनकी तमाम औलाद के बारे में क़ुबूल नहीं किया और इस कलिमे तौहीद को उनकी तमाम औलाद में बाक़ी नहीं रखा, क्यूंकि कुफ्फ़ारे मक्का जिन्होंने हमार नबी को झुटलाया था, वो भी बिलइत्तिफ़ाक़ इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पुश्त से थे। (अज़वाउल बयान7/231-232)

इमाम क़तादा रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाने इलाही: {{ كَانَ النَّاسُ اُمَّةً وَّاحِدَةً۫}} लोग पहले एक ही ग्रोह थेकी तफ़सीर में फ़रमाते हैं:

كَانُوا عَلَى الْهُدَى جَمِيعًا , فَاخْتَلَفُوا , فَبَعَثَ اللَّهُ النَّبِيِّينَ مُبَشِّرِينَ وَمُنْذِرِينَ , وَكَانَ أَوَّلَ نَبِيٍّ بُعِثَ نُوحٌ عَلَيْهِ السَّلَامُ

सब लोग हिदायत पर थे, फिर उनमें इख़्तिलाफ़ हो गया, तो अल्लाह ने ख़ुशख़बरी देने वाले और डराने वाले नबी भेजे और पहले नबी जो मबऊस हुए नूह अलैहिस्सलाम थे(तफ़सीर अब्दुर्रज्ज़ाक़: 1/82, इसकी सनद सहीह है)

इमाम अली बिन हुसैन रहमतुल्लाह अलैह अपने बेटे को यह दुआ सिखाते थे:

آمَنْتُ بِاللَّهِ وَكَفَرْتُ بِالطَّاغُوتِ

मैं अल्लाह पर ईमान लाया और ताग़ूत को का कुफ़्र किया।”””” (मुसन्नफ़इब्ने अबी शैबा:1/342, इसकी सनद हसन है)

अबू वाइल शक़ीक़ बिन सलमा रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं: फ़रमाने बारी तआला:

{{مَنْ جَآءَ بِالْحَسَنَةِ}} जो कोई नेकी लाएगा(अल-अनआम:160) में नेकी से मुराद ला इलाहा इल्लल्लाह है।” (अद-दुआ लिततबरानी:1529, तफ़सीर तबरी:1458, इसकी सनद हसन है)।

अता बिन अबी रिबाह रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

{{مَنْ جَآءَ بِالسَّیِّئَةِ}} में ‘हसअनह’ से मुराद कलिमा ए इख़लास ला इलाहा इल्लल्लाहऔर में ‘सय्यिअह’ से मुराद शिर्क है।” (तफ़सीर तबरी:14289, इसकी सनद सहीह है)

ज़ैद बिन असलम रहमतुल्लाह अलैह ने भी यही तफ़सीर की है।” (अद-दुआ लिततबरानी1533, इसकी सनद सहीह है)

मुहम्मद बिन सिरीन रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

फ़रमाने इलाही:

اِلَّا مَنْ اَتَى اللّٰهَ بِقَلْبٍ سَلِیْمٍؕ۝۸۹

मगर जो अल्लाह ने पास सलामत दिल ले कर आये(अश-शुअरा:89) में दिल की सलामती से मुराद ला इलाहा इल्लल्लाह की गवाही है।” (अद-दुआ लिततबरानी:1587, इसकी सनद सहीह है)

ज़्यादातर लोग ला इलाहा इल्लल्लाह कहते हैं, लेकिन वो इख़लास, यक़ीने कामिल और हाज़िरे क़ल्ब जो इससे हासिल होने चाहिए, उन्हें नसीब नहीं होती, इसकी वजह यह है कि वो महज़ सुन सुना कर, देखा देखी और एक आदत के तौर पर इसका इक़रार करते हैं, लिहाज़ा ज़रूरी है कि हम इस कलिमे की असल रूह और इसके तक़ाज़े व शर्तों को बयान कर दें, ताकि इससे हक़ीक़ी फ़ायदे हासिल हो सकें क्यूंकि सिर्फ़ अलफ़ाज़ को रट लेना फ़ायदेमंद नहीं।”

हाफ़िज़ हकअमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

لَيْسَ الْمُرَادُ مِنْ ذَلِكَ عَدَّ أَلْفَاظِهَا وَحِفْظَهَا فَكَمْ مِنْ عَامِّيٍّ اجْتَمَعَتْ فِيهِ وَالْتَزَمَهَا وَلَوْ قِيلَ لَهُ: أُعْدُدْهَا لَمْ يُحْسِنْ ذَلِكَ, وَكَمْ حَافِظٍ لِأَلْفَاظِهَا يَجْرِي فِيهَا كَالسَّهْمِ وَتَرَاهُ يَقَعُ كَثِيرًا فِيمَا يُنَاقِضُهَا

कलिमा पढ़ने से मुराद इसके अलफ़ाज़ की गिनती और रट लेना नहीं होता, कितने ही अनपढ़ लोग हैं, जिन्होंने कलिमा पढ़ा और फिर इसके तक़ाज़े भी पूरे किये, लेकिन अगर उनसे कहा जाए कि इसके अलफ़ाज़ को शुमार करो तो न कर सकेंगे, इसके विपरीत कितने ही पढ़े लिखे ऐसे हैं कि पानी की तरह रवानी से पढ़ते हैं लेकिन उनके ज़्यादातर काम कलिमे के ख़िलाफ़ होते हैं(मआरिजुल क़ुबूल:1/333)

हाफ़िज़ इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाह अलैह (हि751) लिखते हैं:

رُوحُ هَذِهِ الْكَلِمَةِ وَسِرُّهَا: إِفْرَادُ الرَّبِّ - جَلَّ ثَنَاؤُهُ، وَتَقَدَّسَتْ أَسْمَاؤُهُ، وَتَبَارَكَ اسْمُهُ، وَتَعَالَى جَدُّهُ، وَلَا إِلَهَ غَيْرُهُ - بِالْمَحَبَّةِ وَالْإِجْلَالِ وَالتَّعْظِيمِ وَالْخَوْفِ وَالرَّجَاءِ وَتَوَابِعِ ذَلِكَ: مِنَ التَّوَكُّلِ وَالْإِنَابَةِ وَالرَّغْبَةِ وَالرَّهْبَةِ، فَلَا يُحَبُّ سِوَاهُ، وَكُلُّ مَا كَانَ يُحَبُّ غَيْرَهُ فَإِنَّمَا يُحَبُّ تَبَعًا لِمَحَبَّتِهِ، وَكَوْنِهِ وَسِيلَةً إِلَى زِيَادَةِ مَحَبَّتِهِ، وَلَا يُخَافُ سِوَاهُ، وَلَا يُرْجَى سِوَاهُ، وَلَا يُتَوَكَّلُ إِلَّا عَلَيْهِ، وَلَا يُرْغَبُ إِلَّا إِلَيْهِ، وَلَا يُرْهَبُ إِلَّا مِنْهُ، وَلَا يُحْلَفُ إِلَّا بِاسْمِهِ، وَلَا يُنْظَرُ إِلَّا لَهُ، وَلَا يُتَابُ إِلَّا إِلَيْهِ، وَلَا يُطَاعُ إِلَّا أَمْرُهُ، وَلَا يُتَحَسَّبُ إِلَّا بِهِ، وَلَا يُسْتَغَاثُ فِي الشَّدَائِدِ إِلَّا بِهِ، وَلَا يُلْتَجَأُ إِلَّا إِلَيْهِ، وَلَا يُسْجَدُ إِلَّا لَهُ، وَلَا يُذْبَحُ إِلَّا لَهُ وَبِاسْمِهِ، وَيَجْتَمِعُ ذَلِكَ فِي حَرْفٍ وَاحِدٍ، وَهُوَ: أَنْ لَا يُعْبَدَ إِلَّا إِيَّاهُ بِجَمِيعِ أَنْوَاعِ الْعِبَادَةِ، فَهَذَا هُوَ تَحْقِيقُ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَلِهَذَا حَرَّمَ اللَّهُ عَلَى النَّارِ مَنْ شَهِدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ حَقِيقَةَ الشَّهَادَةِ، وَمُحَالٌ أَنْ يَدْخُلَ النَّارَ مَنْ تَحَقَّقَ بِحَقِيقَةِ هَذِهِ الشَّهَادَةِ وَقَامَ بِهَا، كَمَا قَالَ تَعَالَى: {وَالَّذِينَ هُمْ بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ} سُورَةُ الْمَعَارِجِ: 33} فَيَكُونُ قَائِمًا بِشَهَادَتِهِ فِي ظَاهِرِهِ وَبَاطِنِهِ، فِي قَلْبِهِ وَقَالَبِهِ

इस कलिमे की असल रूह और हक़ीक़त यह है कि अल्लाह तबारक व तआला को मुहब्बत, ताज़ीम, इकराम, ख़ौफ़, रिजा, तवक्कुल, रुजूअ, रग़बत, हैबत आदि में अकेला माना जाए, यानी उसके सिवा किसी से मुहब्बत न की जाये, अगर उसके अलावा किसी से मुहब्बत हो भी, तो उसकी मुहब्बत के ताबेअ बना कर या उसकी मुहब्बत का ज़रिया समझ कर और उसके सिवा किसी से ख़ौफ़ न रखा जाए, न किसी से उम्मीद रखी जाए, नज़र दी जाए तो उसकी, रुजूअ किया जाए तो उसकी तरफ़, बात मानी जाये तो उसकी, सवाब की उम्मीद की जाये, तो उससे, मुसीबतों में मदद मांगी जाये तो उससे, फ़रयाद की जाये तो उसी से, सजदा किया जाये तो उसी को, ज़िबह कियह जाए तो उसे के लिए और उसी के नाम पर इन सब बातों को एक ही जुमले यूं कहा जा सकता है कि इबादत की कोई भी क़िस्म उसके अलावा किसी के लिए भी न रखी जाए।” यह है ला इलाहा इल्लल्लाह का असल मतलब, यही वजह है कि यह गवाही देने वाले पर आग हराम हो जाती है और जिसने हक़ीक़तन य ह कालिमा पद लिया और उइड पर डटा रहा, उसका आग में दाख़िल होना नामुमकिन है, फ़रमाने इलाही है: वो लोग (जहन्नम से बच जायेंगें) जो अपनी गवाही पर क़ायम रहते हैं।”यानी वो इस गवाही को अपने ज़ाहिर व बातिन और क़ल्ब व क़ालिब पर क़ायम कर लेते हैं(अल-जवाबुल काफ़ी, पेज नंबर 290)

कालिमा ए इख़लास के फ़ज़ीलत के बारे में हदीसें बयान करने के बाद हाफ़िज़ इब्ने रजब रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं:

इस बारे में दो तरह की हदीसें औई हैं, एक तो यह कि जो तौहीद व रिसालत की गवाही देता है, जन्नत में दाख़िल हो जाएगा, इससे रोका नहीं जाएगा, यह तो वाज़ेह है, जबकि दूसरी हदीसों में यह है कि वो आग पर हराम हो जाएगा, कुछ उलमा ने इसे हमेशा रहने पर महमूल किया है, यानी वो हमेशा आग में नही रहेगा, अक्सर उलमा का कहना है कि इन हदीसों की मुराद यह है कि ला इलाहा इल्लल्लाह जन्नत में दाख़ले और आग से निजात का सबब है, लेकिन इसके कुछ तक़ाज़े हैं और यह तब ही अपना काम करेगा, जब उसके तक़ाज़े पूरे हों और ख़िलाफ़ न हों, कभी कभी शर्तें पूरी न होने या रुकावट की मौजूदगी की वजह से यह नाकाम हो जाता है, हसन बसरी और वहब बिन मुनब्बा रहमतुल्लाह अलैहिमा का यही क़ल है और यही बात राजेह है”। (कलिमतुल इख़लास व तहक़ीक़ मअना हा लिब्ने रजब पेज नंबर 12-13)

लिहाज़ा कालिमा ए इख़लास की निम्नलिखित शर्तें हैं:

1.   माना व मफ़हूम का इल्म।”

2.  कामिल यक़ीन।”

3.  ”क़ुबूल।”

4.  इताअत।”

5.  सिद्क़।”

6.  इख़लास।”

7.  मुहब्बत।”

जब कलिमा पढ़ने वाले में यह सब शर्तें मौजूद होंगी तो यह कलिमा फ़ायदेमंद और निजात व कामयाबी की वजह बनेगा।”

हिन्दी तर्जुमा: मुहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

 

Friday, March 19, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-*  وَعَن أنس قَالَ: بَيْنَمَا نَحْنُ فِي الْمَسْجِدِ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ جَاءَ أَعْرَابِيٌّ فَقَامَ يَبُولُ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَهْ مَه قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تَزْرِمُوهُ دَعُوهُ» فَتَرَكُوهُ حَتَّى بَالَ ثُمَّ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ  صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعَاهُ فَقَالَ لَهُ: «إِنَّ هَذِهِ الْمَسَاجِدَ لَا تصلح لشَيْء من هَذَا الْبَوْل وَلَا القذر إِنَّمَا هِيَ لذكر الله عز وَجل وَالصَّلَاةِ وَقِرَاءَةِ الْقُرْآنِ» أَوْ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَأمر رَجُلًا مِنَ الْقَوْمِ فَجَاءَ بِدَلْوٍ مِنْ مَاءٍ فسنه عَلَيْهِ

🍁 *तर्जुमा :-* अनस रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मस्जिद में बैठे हुए थे कि इसी दौरान एक देहाती आया और वो खड़ा होकर मस्जिद में पेशाब करने लगा। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सहाबा ने कहा रुक जा रुक जा जबकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “इसका पेशाब न रोको इसे कुछ न कहो छोड़ दो”। तो उन्होंने इसे छोड़ दिया यहाँ तक कि उसने पेशाब कर लिया फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे बुलाकर फ़रमाया: “यह जो मस्जिदें हैं, यह पेशाब और गंदगी आदि के लिए नहीं | यह तो अल्लाह के ज़िक्र नमाज़ और क़ुरआन की क़िराअत के लिए है या फिर जैसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया रावी बयान करते हैं, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन लोगो में से किसी शख़्स को हुक्म फ़रमाया तो वो पानी का डोल ले आया तो आपने वो इस (पेशाब) पर बहा दिया।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (मुझे नहीं मिली), मुस्लिम (661), मिशकातुल मसाबीह (492)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Thursday, March 18, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا شَرِبَ الْكَلْبُ فِي إِنَاء أحدكُم فليغسله سبع مَرَّات»
وَفِى رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: «طَهُورُ إِنَاءِ أَحَدِكُمْ إِذَا وَلَغَ فِيهِ الْكَلْبُ أَنْ يَغْسِلَهُ سَبْعَ مَرَّاتٍ أولَاهُنَّ بِالتُّرَابِ»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब कुत्ता तुम्हारे किसी शख़्स के बर्तन में से पी ले तो उसे सात मर्तबा धो”। बुखा़री, मुस्लिम।
और मुस्लिम की रिवायत में है: “जब कुत्ता तुम्हारे किसी शख़्स के बर्तन में मुंह डाल दे तो उस बर्तन की पाकीज़गी इस तरह हासिल होगी कि उसे सात मर्तबा धोया जाए उनमें से पहली मर्तबा मिट्टी से साफ़ किया जाए”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (172), मुस्लिम (650,651), मिशकातुल मसाबीह (490)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें


Tuesday, March 16, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن كَبْشَة بنت كَعْب بن مَالك وَكَانَتْ تَحْتَ ابْنِ أَبِي قَتَادَةَ: أَنَّ أَبَا قَتَادَة دخل فَسَكَبَتْ لَهُ وَضُوءًا فَجَاءَتْ هِرَّةٌ تَشْرَبُ مِنْهُ فَأَصْغَى لَهَا الْإِنَاءَ حَتَّى شَرِبَتْ قَالَتْ كَبْشَةُ فَرَآنِي أَنْظُرُ إِلَيْهِ فَقَالَ أَتَعْجَبِينَ يَا ابْنَةَ أخي فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّهَا لَيست بِنَجس إِنَّهَا من الطوافين عَلَيْكُم والطوافات» . رَوَاهُ مَالِكٌ وَأَحْمَدُ وَالتِّرْمِذِيُّ
وَأَبُو دَاوُدَ وَالنَّسَائِيُّ وَابْنُ مَاجَهْ وَالدَّارِمِيُّ

🍁 *तर्जुमा :-* अबू क़तादा के बेटे की बीवी कब्शह बिन्ते कअब बिन मालिक से रिवायत है कि अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अन्हु उनके पास तशरीफ़ लाए तो उसने उनके वुज़ू के लिए बर्तन में पानी डाला, इतने में एक बिल्ली आकर उससे पीने लगी तो उन्होंने उसके लिए बर्तन झुका दिया यहाँ तक कि उसने पी लिया, कब्शह बयान करती हैं, उन्होंने मुझे देखा कि मैं उनकी तरफ़ देख रही हूँ, तो उन्होंने ने फ़रमाया: भतीजी! क्या तुम तअज्जुब करती हो? वो बयान करती हैं, मैंने कहा: जी हाँ, उन्होंने कहा: कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “यह नजिस नहीं, बिल्ली तो उन जानवरों में से है जो तुम्हारे बीच घूमती फिरती हैं”। 

📚 *[इसकी सनद सहीह है, मोअत्ता इमाम मालिक (41), मुसनद अहमद (22950), तिरमिज़ी (92), अबू दावुद (75), नसाई (341), इब्ने माजा (367), दारमी (736) मिशकातुल मसाबीह (482)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Monday, March 15, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: سَأَلَ رَجُلٌ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَرْكَبُ الْبَحْرَ وَنَحْمِلُ مَعَنَا الْقَلِيلَ مِنَ الْمَاءِ فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا أفنتوضأ من مَاء الْبَحْرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ الْحِلُّ مَيْتَتُهُ» . رَوَاهُ مَالك وَالتِّرْمِذِيّ وَالنَّسَائِيّ وَابْن مَاجَه والدارمي

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, किसी आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, हम समुंदरी सफ़र करते हैं और थोड़ा पानी अपने साथ ले जाते हैं, अगर हम इससे वुज़ू करते हैं तो फिर प्यासे रह जाते हैं, तो क्या हम समुन्दर के पानी से वुज़ू कर लिया करें? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “उसका पानी पाक है और उसका मुरदार हलाल है”।

📚 *[इसकी सनद सहीह है, मोअत्ता इमाम मालिक (40), तिरमिज़ी (69), नसाई (59), इब्ने माजा (386), दारमी (735), अबू दावूद (83), मिशकातुल मसाबीह (479)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Sunday, March 14, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا يَبُولَنَّ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ الَّذِي لَا يجْرِي ثمَّ يغْتَسل فِيهِ»
وَفِى رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ قَالَ: «لَا يَغْتَسِلُ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ وَهُوَ جُنُبٌ» . قَالُوا: كَيْفَ يَفْعَلُ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ؟ قَالَ: يَتَنَاوَلُهُ تَنَاوُلًا

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुममें से कोई शख़्स खड़े पानी में जोकि बहता ना हो, पेशाब ना करे, फिर वो उसमें ग़ुस्ल करे”। और मुस्लिम की रिवायत में है: “तुममें से कोई शख़्स खड़े पानी में जनाबत का ग़ुस्ल ना करे”। लोगो ने पूछा: अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु वो कैसे करे? फ़रमाया: वो वहाँ से पानी लें और (दूसरी जगह पर ग़ुस्ल करें)।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (239), मुस्लिम (657,658), मिशकातुल मसाबीह (474)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Saturday, March 13, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَن يعلى: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَجُلًا يَغْتَسِلُ بِالْبَرَازِ فَصَعِدَ الْمِنْبَرَ فَحَمِدَ الله وَأثْنى عَلَيْهِ وَقَالَ: «إِن الله عز وَجل حييّ حييّ ستير يحب الْحيَاء والستر فَإِذَا اغْتَسَلَ أَحَدُكُمْ فَلْيَسْتَتِرْ» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَالنَّسَائِيُّ وَفِي رِوَايَتِهِ قَالَ: «إِنَّ اللَّهَ سِتِّيرٌ فَإِذَا أَرَادَ أَحَدُكُمْ أَنْ يَغْتَسِلَ فَلْيَتَوَارَ بِشَيْءٍ»

🍁 *तर्जुमा :-* यअला रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किसी शख़्स को खुले मैदान में (नंगे) ग़ुस्ल करते हुए देखा, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मिम्बर पर तशरीफ़ लाए और अल्लाह की हम्द ओ सना बयान की, फिर फ़रमाया: “बेशक अल्लाह हयादार, पर्दा-पोशी करने वाला है, वो हयादारी और पर्दा-पोशी को पसंद करता है, तो जब तुममे से कोई नहाए तो वो पर्दा करे”। अबू दावूद, नसाई।
और नसाई की एक रिवायत में है: “बेशक अल्लाह पर्दा-पोशी करने वाला है, तो जब तुममें से कोई ग़ुस्ल करना चाहे तो वह किसी चीज़ से पर्दा करले।

📚 *[सहीह, अबू दावूद (4012), नसाई (406), मिशकातुल मसाबीह (447)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Wednesday, March 10, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: كُنْتُ أَغْتَسِلُ أَنَا وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ إِنَاءٍ بيني وَبَينه وَاحِد فَيُبَادِرُنِي حَتَّى أَقُولَ دَعْ لِي دَعْ لِي قَالَت وهما جنبان 

🍁 *तर्जुमा :-* मुआज़ह बयान करती हैं, आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया: मैं और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बर्तन से, जो कि हमारे बीच होता था, ग़ुस्ल किया करते थे, आप मुझसे जल्दी पानी लेते थे यहाँ तक कि मैं कहती: मेरे लिए (पानी) रहने दें, मेरे लिए रहने दें, जबकि वो दोनों जुनुबी होते थे।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (250), मुस्लिम (732), मिशकातुल मसाबीह (440)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Monday, March 8, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَتْ قُلْتُ: يَا رَسُولَ الله إِنِّي امْرَأَة أَشد ضفر رَأْسِي فأنقضه لغسل الْجَنَابَة قَالَ «لَا إِنَّمَا يَكْفِيكِ أَنْ تَحْثِي عَلَى رَأْسِكِ ثَلَاثَ حَثَيَاتٍ ثُمَّ تُفِيضِينَ عَلَيْكِ الْمَاءَ فَتَطْهُرِينَ» . رَوَاهُ مُسلم

🍁 *तर्जुमा :-* उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, मैंने कहा: अल्लाह के रसूल! मैं एक ऐसी औरत हूँ कि मैं अपने सर के बालो को मज़बूत गूंधती हूँ, तो क्या मैं जनाबत के ग़ुस्ल के लिए इसे खोल दिया करूँ? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नहीं, तुम्हारे लिए यही काफी है कि तुम अपने सर पर तीन चुल्लू पानी डालो, फिर अपने जिस्म पर पानी बहा लो, तो तुम पाक हो जाओगी”।

📚 *[मुस्लिम (744), मिशकातुल मसाबीह (438)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Wednesday, March 3, 2021

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-*  وَعَن ابْن عَبَّاس قَالَ قَالَتْ مَيْمُونَةُ: وَضَعْتُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غُسْلًا فَسَتَرْتُهُ بِثَوْبٍ وَصَبَّ عَلَى يَدَيْهِ فَغَسَلَهُمَا ثُمَّ صَبَّ بِيَمِينِهِ عَلَى شَمَالِهِ فَغَسَلَ فَرْجَهُ فَضَرَبَ بِيَدِهِ الْأَرْضَ فَمَسَحَهَا ثُمَّ غَسَلَهَا فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ وَغَسَلَ وَجْهَهُ وَذِرَاعَيْهِ ثُمَّ صَبَّ عَلَى رَأْسِهِ وَأَفَاضَ عَلَى جَسَدِهِ ثُمَّ تَنَحَّى فَغَسَلَ قَدَمَيْهِ فَنَاوَلْتُهُ ثَوْبًا فَلَمْ يَأْخُذْهُ فَانْطَلق وَهُوَ ينفض يَدَيْهِ. وَلَفظه للْبُخَارِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं, मयमूना रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया: मैंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए ग़ुस्ल करने के लिए पानी रखा और एक कपड़े से आप पर परदा किया, आपने अपने दोनों हाथो पर पानी डाला, तो उन्हें धोया, फिर आपने अपने हाथो पर पानी डाला, तो उन्हें धोया, फिर अपने दाएं हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डाल कर शर्मगाह को धोया, फिर आपने अपना हाथ ज़मीन पर मला और इसे धोया, फिर आपने कुल्ली की, नाक में पानी डाला, अपना चेहरा और बाज़ू धोए, फिर सर पर पानी डाला और सारे जिस्म पर पानी बहाया, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस जगह से हट कर पाँव धोएं, मैंने आपको कपड़ा दिया लेकिन आप ने ना लिया, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हाथो से पानी साफ़ करते तशरीफ़ ले गए और यह अल्फाज़ बुख़ारी के हैं।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (276), मुस्लिम (722), मिशकातुल मसाबीह (436)]*

इसी तरह के और मैसेज पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें और औरों को भी शेयर करें

Tafseer Dawat ul Quran (Hindi Translation) Part 8

 أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم● 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 📒 तफ़सीर दावतुल क़ुरआन 📒 ✒️ लेख़क: अ...