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Friday, December 25, 2020

Surah Fatiha Part 6 (सुरह फ़ातिहा भाग 6)

 *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 6*

नमाज़ में शैतानी वस्वसों से अल्लाह की पनाह चाहना, जैसा कि सय्यदना उस्मान बिन अबुल आस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे और मेरी नमाज़ और क़िरआत के बीच शैतान आ जाता है, वो मुझ पर क़िरआत को गड़मड़ करता है, तो आपने फ़रमाया: ये शैतान है, जिसे ख़िन्ज़ब कहा जाता है, जब तुम इसके आने को महसूस करो तो इस (के शर) से अल्लाह तआला की पनाह तलब करो (यानीاَعُوْذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ   पढ़ो) और तीन बार अपनी बाईं तरफ़ थुतकारो। उस्मान रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं कि मैंने ऐसा ही किया तो अल्लाह ने इस शैतान को मुझसे दूर कर दिया। *[मुस्लिम: 5738, मुसनद अहमद: 17918]*

बच्चों के लिए अल्लाह की पनाह चाहना, जैसा कि सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हसन व हुसैन रज़ियल्लाहू अन्हुमा के लिए इन शब्दों के ज़रिये पनाह तलब किया करते थे: {{أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ}}मैं अल्लाह के तमाम कलिमात एक साथ (तुम दोनों के लिए) हर शैतान से और उस मख़लूक़  से जो बुराइ का इरादा करे और हर नज़र लगाने वाली आँख से पनाह मांगता हूँ। *[बुख़ारी: 3371]*

बीमारी के वक़्त अल्लाह की पनाह माँगना, जैसा कि सय्यदना उस्मान बिन अबुल आस रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक बीमारी की शिकायत की जो इस्लाम क़ुबूल करने के बाद मैंने पहली बार महसूस की थी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: अपने हाथ को अपने जिस्म पर तकलीफ़ वाली जगह रख कर तीन बार ‘बिस्मिल्लाह’ कहो और सात बार ये दुआ पढ़ो: {{}} ‘मैं अल्लाह तआला की और उसकी क़ुदरत की पनाह पकड़ता हूँ उस चीज़ के शर से जो मैं पाता हूँ और जिससे डरता हूँ’ *[मुस्लिम: 5737]*

बुरा ख़्वाब देखने पर अल्लाह की पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना अबू क़तादा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: अच्छा ख़्वाब अल्लाह तआला की तरफ़ से होता है और बुरा ख़्वाब शैतान की तरफ़ से होता है, तो अगर तुममें से कोई शख़्स बुरा ख़्वाब देख कर उससे डर जाए तो वो अपनी बाईं तरफ़ थुतकारे और अल्लाह तआला से उसके शर से पनाह मांगे तो वो उसे नुक़सान न पहुँचायेग। *[बुख़ारी: 3292]*

सुबह व शाम और बिस्तर पर लेटते वक़्त अल्लाह की पनाह में आना जैसा कि सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि सय्यदना अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हु ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे ऐसी दुआ सिखा दीजिये जो मैं सुबह व शाम पढ़ा करूँ। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ये पढ़ा करो:

}}اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ{{

‘ऐ अल्लाह! ज़ाहिर व छुपे हुए को जानने वाले! आसमान व ज़मीन के पैदा करने वाले! हर चीज़ को पालने वाले और उसके मालिक! मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, मैं अपने नफ़्स के शर से और मरदूद शैतान के शर और शिर्क से तेरी पनाह चाहता हूँ’ फिर आपने फ़रमाया:इस दुआ को सुबह व शाम और रात को बिस्तर पर जाते वक़्त पढ़ा करो। *[तिरमिज़ी: 3392]*

अक़ाइद में शैतानी वस्वसों से अल्लाह की पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: शैतान तुम्हारे किसी शख़्स के पास आता है तो वो कहता है:  इसको किसने पैदा किया? इसको किसने पैदा किया? यहाँ तक की कहता है: तेरे रब को किसने पैदा किया है? तो जब तुममें से कोई इस हद तक पहुँच जाए तो वो अल्लाह की पनाह तलब (यानी اَعُوْذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ    पढ़ ले) करे और इस (शैतानी ख़याल) को छोड़ दे”। *[बुख़ारी: 3276, मुस्लिम: 345]*

मौत के वक़्त शैतानी हमले से अल्लाह की पनाह चाहना, जैसा कि सय्यदना अबुल यसर रज़ियल्लाहू अन्हु रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बयान करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यह दुआ किया करते थे:

}}اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ التَّرَدِّي وَالْهَدْمِ وَالْغَرَقِ وَالْحَرِيقِ، وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ يَتَخَبَّطَنِي الشَّيْطَانُ عِنْدَ الْمَوْتِ، وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ أَمُوتَ فِي سَبِيلِكَ مُدْبِرًا، وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ أَمُوتَ لَدِيغًا {{

ऐ अल्लाह! में तेरी पनाह माँगता हूँ किसी चीज़ के नीचे आने से, ऊँची जगह से गिरने से, डूबने और जलने से और तेरी पनाह माँगता हूँ कि मौत के वक़्त शैतान मुझे बहका दे और मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इस बात से कि तेरी राह में जिहाद से भागता हुआ मरूं और इस बात से भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि किसी ज़हरीले जानवर के डसने से मुझे मौत आए। *[नसाई: 5533]*

सुबह व शाम के वक़्त अल्लाह की पनाह में आना, जैसा कि सय्यदना अबू हुरैरा (र) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (स) ने फ़रमाया: अगर तुम शाम को यह कलिमात पढ़ लेते:

}}أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ{{

मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात के साथ तमाम चीज़ों के शर से पनाह चाहता हूँ जो उसने पैदा की हैंतो तुम्हें कोई नुक़सान न पहुँचता। *[मुस्लिम: 6880]*

जारी है...................................

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Surah Fatiha Part 5 (सुरह फ़ातिहा भाग 5)

    *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 5*

ग़ुस्से के वक़्त अल्लाह की पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना सुलयमान बिन सुरद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास बैठे हुए थे कि दो आदमियों ने आपस में एक दुसरे को बुरा भला कहना शुरू कर दिया, ऐसा करते हुए उनमें से एक तो इस क़द्र ग़ुस्से में था कि ग़ुस्से की वजह से उसका चेहरा लाल हो गया तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “बेशक मैं एक ऐसा कलिमा जानता हूँ कि अगर ये उसे पढ़ ले तो इसका ग़ुस्सा ख़त्म हो जाए और वो कलिमा ये है: *{أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ}* सहाबा किराम रज़ियाल्लाहू अन्हुम ने उस शख़्स से कहा, क्या तुमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान नहीं सुना? उसने जवाब दिया कि मैं पागल नहीं हूँ। *[बुख़ारी: 6115, मुस्लिम: 6646]*

बैतूल ख़ला में दाख़िल होते वक़्त अल्लाह की पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैतूल ख़ला में दाख़िल होते तो फ़रमाते:

*{{اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ}}* ऐ अल्लाह! मैं नापाक जिन्नों और नापाक जिन्नियों से तेरी पनाह चाहता हूँ। *[बुख़ारी: 142, मुस्लिम: 831]*

सय्यदना ज़ैद बिन अरक़म रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है, कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ये बैतुल ख़ला (जिन्नों और शैतानों के) हाज़िर होने की जगह है, लिहाज़ा जब तुममें से कोई बैतुल ख़ला में दाख़िल हो तो कहे: *{{ أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ}}* मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ नापाक जिन्नों और नापाक जिन्नियों के शर से। *[अबू दावूद: 6]*

बीवी से हमबिस्तरी के वक़्त शैतान के शर से अल्लाह की पनाह चाहना, जैसा कि सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: अगर तुममें से कोई शख़्स अपनी बीवी से जमाआ के वक़्त ये दुआ पढ़ ले:

*{{بِاسْمِ اللَّهِ اللَّهُمَّ جَنِّبْنِي الشَّيْطَانَ وَجَنِّبْ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا}}* अल्लाह के नाम के साथ, ऐ अल्लाह! हमें शैतान के शर से महफूज़ रख और हमें तू जो औलाद अता फ़रमाए उसे भी शैतान से बचानातो अगर इस मिलाप से बच्चा पैदा होगा तो शैतान उसे कभी नुक़सान न पहुँचा सकेगा। *[बुख़ारी: 5165, मुस्लिम: 3533]*

किसी वादी या मंज़िल पर पड़ाव के वक़्त अल्लाह की पनाह में आना, जैसा कि ख़ला बिन्ते हुकैम रज़ियल्लाहू अन्हा से रिवायत है कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फ़रमाते हुए सुना: जो शख़्स किसी जगह पड़ाव करे और ये दुआ पढ़े: *{{ أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ}}* अल्लाह के तमाम कलिमात के साथ, उन सब चीज़ों के शर से पनाह मांगता हूँ जिनको उसने पैदा किया तो उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, यहाँ तक कि वो वहाँ से निकल जाए।  *[मुस्लिम: 6878]*

मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त अल्लाह की पनाह में आना, जैसा सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहू अन्हुमा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बयान करते हैं कि जब आप मस्जिद में दाख़िल होते तो ये फ़रमाते थे:

{{ أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِوَجْهِهِ الْكَرِيمِ وَسُلْطَانِهِ الْقَدِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ}} मैं अज़मत वाले अल्लाह और उसके करीम चेहरे की और उसकी क़दीम सल्तनत की पनाह चाहता हूँ, मरदूद शैतान सेऔर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमाते थे: जो ऐसा कहे तो शैतान कहता है कि तू मुझसे आज पूरा दिन महफूज़ रहेगा[अबू दावूद: 466]

मस्जिद से निकलते वक़्त अल्लाह की पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: तुममें से जब कोई शख़्स मस्जिद में दाख़िल हो तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर सलाम पढ़े और ये दुआ पढ़े: {{اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ}} ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे। और जब मस्जिद से निकले तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर सलाम पढ़े और ये कहे:

{{ اللَّهُمَّ اعْصِمْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ}} ऐ अल्लाह! मुझे शैतान मरदूद के शर से महफूज़ रख[इब्ने माजा: 773]

जारी है...................................

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Surah Fatiha Part 4 (सुरह फ़ातिहा भाग 4)

   *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 4*

اَعُوْذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ*    

मैं पनाह मांगता हूँ अल्लाह की शैतान मरदूद से

अल्लाह तआला ने क़ुरआन करीम में कई जगह बन्दों को शैतान के शर से पनाह मांगने का हुक्म दिया है, जैसा कि इरशाद फ़रमाया:

*فَاِذَا قَرَاْتَ الْقُرْاٰنَ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ*

तो जब तू क़ुरआन पढ़े तो मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह तलब कर  *[अन-नहल: 98] *   और फ़रमाया:

*وَاِمَّا يَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطٰنِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ ۭاِنَّهٗ سَمِيْعٌ عَلِيْمٌ*

और अगर कभी शैतान की तरफ़ से कोई उकसाहट तुझे उभार ही दे तो अल्लाह की पनाह तलब कर, बेशक वो सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। *[अल-आराफ़: 200]* और फ़रमाया:

*وَ قُلْ رَّبِّ اَعُوْذُ بِكَ مِنْ هَمَزٰتِ الشَّیٰطِیْنِۙ۝۹۷ وَ اَعُوْذُ بِكَ رَبِّ اَنْ یَّحْضُرُوْنِ۝۹۸*

और तू कह ऐ मेरे रब! मैं शैतानों की उकसाहटो से तेरी पनाह मांगता हूँ और ऐ मेरे रब! मैं इससे भी तेरी पनाह मांगता हूँ कि वो मेरे पास आ मौजूद हो। *[अल-मुमिनून: 97,98] *

इन आयतों में अल्लाह तआला ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को शैतान मरदूद से पनाह मांगने का हुक्म दिया है, क्यूंकि शैतान इंसान का ऐसा बुरा दुशमन है जो किसी भी भलाई और अहसान को नहीं मानता और हर वक़्त इसके ख़िलाफ़ साज़िश में लगा रहता है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीसों से भी इसका सबूत मिलता है। सहीह हदीसों में शैतान मरदूद के शर से पनाह मांगने के कुछ जगहें निम्नलिखित हैं:

नमाज़ शुरू करते वक़्त शैतान के शर से पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब रात को क़याम करते तो नमाज़ शुरू करते हुए अल्लाहु अकबरकहते, फिर ये पढ़ते: *{ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرَكَ}* मैं पाकी बयान करता हूँ तेरी ऐ अल्लाह! तेरी ही हम्द व सना के साथ, तेरा नाम बहुत बरकत वाला है, तेरी शान बहुत बुलंद व बाला है और तेरे सिवा कोई और इबादत के लायक़ नहीं। फिर आप तीन बार ला इलाहा इल्लल्लाहपढ़ते, फिर ये पढ़ते: *{{أَعُوذُ بِاللَّهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ مِنْ هَمْزِهِ وَنَفْخِهِ}}* मैं अल्लाह की पनाह लेता हूँ जो सुनने वाला, जानने वाला है शैतान मरदूद से यानी उसके वस्वसे से और उसकी फूँक और उसके जादू से *[मुसनद अहमद: 11479, अबू दावूद: 775, तिरमिज़ी: 242]*

सय्यदना अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहा करते थे:

*{{اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ، وَهَمْزِهِ وَنَفْخِهِ وَنَفْثِهِ}}* ऐ अल्लाह! बेशक मैं तेरी पनाह लेता हूँ शैतान मरदूद से और उसके वस्वसे से, उसके तकब्बुर और उसके जादू से। *[इब्ने माजा: 808]*

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Surah Fatiha Part 3 (सुरह फ़ातिहा भाग 3)

  *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 3*

हर नमाज़ की हर रकात में सूरह फ़ातिहा पढ़ना वाजिब है, जैसा कि सय्यदना उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि ने फ़रमाया: जो शख़्स सुरह फ़ातिहा न पढ़े उसकी नमाज़ ही नहीं होती। *[बुख़ारी: 756, मुस्लिम: 874]*

हर रकात में सूरह फ़ातिहा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि का तरीक़ा था, जैसा सय्यदना अबू क़तादा रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं, बेशक नबी सल्लल्लाहु अलैहि ज़ुहर की पहली दो रकातों में सूरह फ़ातिहा और दो सूरतें पढ़ते थे और आख़िरी दो में सिर्फ़ सूरह फ़ातिहा पढ़ते थे। [बुख़ारी: 776]

इमाम के पीछे भी सूरह फ़ातिहा ज़रूरी है, जैसा कि सय्यदना उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहू अन्हु रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि ने फ़ज्र की नमाज़ पढ़ाई और आपके लिए क़ुरआन की तिलावत मुश्किल हो गई। जब नामाज़ से फ़ारिग़ हुए तो फ़रमाया: शायद तुम अपने इमाम के पीछे क़िरात किया करते हो? हमने कहा, हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! आपने फ़रमाया:सिवाय फ़ातिहा के और कुछ न पढ़ा करो, क्यूंकि उस शख़्स की नमाज़ नहीं होती जो सूरह फ़ातिहा न पढ़ें। *[तिरमिज़ी: 311, अबू दावूद: 823]*

सय्यदना उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: मैं सोचता था कि क़ुरआन का पढ़ना मुझ पर दुशवार क्यों होता है (फिर मैंने जान लिया कि तुम्हारे पढ़ने की वजह से दुशवार हुआ) तो जब में जहरन पढ़ूं (जहरी नमाज़ में) तो क़ुरआन से सूरह फ़ातिहा के सिवा कुछ भी न पढो। *[अबू दावूद: 824]*

सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियाल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: जिस शख़्स ने नमाज़ पढ़ी और इसमें सुरह फ़ातिहा न पढ़ी तो वो (नमाज़) अधूरी है, अधूरी है, नामुकम्मल है। अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से पूछा गया कि हम इमाम के पीछे होते हैं (तो क्या फिर भी पढ़ें)? तो अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु ने कहा, (हाँ)! तब तू इसको दिल में पढ़। *[मुस्लिम: 878]*

सय्यदना अनस रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबा को नामज़ पढ़ाई, फ़ारिग़ होकर उनकी तरफ़ तवज्जो देकर पूछा: क्या तुम अपनी नामाज़ में इमाम की क़िरात के दौरान में कुछ पढ़ते हो”? सब ख़ामोश रहे, तीन बार आपने उनसे यही पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, जी हाँ! हम ऐसा करते हैं, आपने फ़रमाया: ऐसा न किया करो, बल्कि तुम सिर्फ़ सुरह फ़ातिहा दिल में पढ़ लिया करो। *[इब्ने माजा: 1844, सुनन कुबरा लिलबैहक़ी: 2/166]*

इन सहीह हदीसों से हर नमाज़ी के लिए हर नमाज़ में सूरह फ़ातिहा पढ़ना ज़रूरी है, नमाज़ी चाहे इमाम हो, या मुक़तदी, या अकेला, अगर वो सुरह फ़ातिहा नहीं पढ़ेगा तो उसकी नमाज़ नहीं होगी।

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Surah Fatiha Part 2 (सुरह फ़ातिहा भाग 2)

 *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 2*

सुरह फ़ातिहा ही नमाज़ है, जैसा कि सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये फ़रमाते हुए सुना, आप फ़रमा रहे थे: अल्लाह तआला फ़रमाता है कि मैंने नमाज़ को अपने और अपने बन्दे के बीच दो हिस्सों में बाँट दिया है और मेरे बन्दे के लिए वो कुछ है जिसका वो सवाल करे, बन्दा जब कहता है: { اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَ} तो अल्लाह तआला फ़रमाता है, मेरे बन्दे ने मेरी तारीफ़ की है और जब कहता है: { الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ} तो अल्लाह तआला फ़रमाता है मेरे बन्दे ने मेरी सना की है और जब कहता है: { مٰلِكِ يَوْمِ الدِّيْنِ} तो अल्लाह तआला फ़रमाता है, मेरे बन्दे ने मेरी बुज़ुर्गी बयान की और यूँ भी फ़रमाता है कि मेरे बन्दे ने (अपना मामला) मेरे सुपुर्द कर दिया। बन्दा जब कहता है: { اِيَّاكَ نَعْبُدُ وَاِيَّاكَ نَسْتَعِيْنُ} तो अल्लाह तआला फ़रमाता है, ये मेरे और मेरे बन्दे के बीच है और मेरे बन्दे के लिए वो कुछ है जिसका वो सवाल करे और जब बन्दा ये कहता है:

}  اِھْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَـقِيْمَ Ĉ۝ۙصِرَاطَ الَّذِيْنَ اَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ ۹ غَيْرِ الْمَغْضُوْبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّاۗلِّيْنَ{

तो अल्लाह तआला फ़रमाता है, ये मेरे बन्दे के लिए है और मेरे बन्दे के लिए वो कुछ है जिसका वो सवाल करे। *[मुस्लिम: 878]*

तौरात व इंजील और क़ुरआन मजीद में सुरह फ़ातिहा जैसी कोई सूरत नहीं, जैसा कि सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु रिवायत हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि ने उबई बिन कआब रज़ियल्लाहू अन्हु से फ़रमाया: क्या तुम इस बात को पसंद करते हो कि मैं तुम्हें एक ऐसी सूरत सिखाऊँ कि इस जैसी सूरत न तौरात में नाज़िल हुई, न ज़बूर में, न इंजील में और न क़ुरआन में। उबई बिन कआब रज़ियल्लाहू अन्हु ने कहा, हाँ! ऐ अल्लाह के रसूल! रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: मैं उम्मीद करता हूँ कि तुम इस दरवाज़े से न निकलने पाओगे कि वो तुम्हें सिखा दी जाएगी। सय्यदना उबई रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझसे बात करने लगे, मैंने धीरे धीरे चल रहा था, इस डर से कि कहीं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बात ख़त्म करने से पहले (दरवाज़े पर) न पहुँच जायें। जब हम दरवाज़े के क़रीब पहुँचे तो मैंने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल! वो कौन सी सूरत है जिसके बताने का आपने मुझसे वादा किया था? रसूलुल्लाह सल्लालाल्हू अलैहि ने फ़रमाया: तुम नमाज़ में क्या पढ़ते हो? सय्यदना उबई रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं, मैंने सूरह फ़ातिहा पढ़ कर सुनाई। रसूलुल्लाह सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है! अल्लाह ने इस सूरत की जैसी न तौरात में कोई सूरत नाज़िल की, न इंजील में, न ज़बूर में और न फ़ुरक़ान (क़ुरआन) में और बेशक वो सबअ मसानी है। *[मुसनद अहमद: 9364, तिरमिज़ी: 2875]*

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Surah Fatiha Part 1 (सुरह फ़ातिहा भाग 1)

 *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 1*

सुरह फ़ातिहा के शाने नुज़ूल के बारे में सय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं, एक दिन जिब्रील अलैहिस्सलाम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास बैठे हुए थे, उन्होंने अपने ऊपर की तरफ़ से बड़े ज़ोर से दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनी, उन्होंने अपना सर उठाया और फ़रमाया: आज आसमान का वो दरवाज़ा खुला है, जो इससे पहले कभी नही खुला था और इससे एक फ़रिश्ता उतरा है। फिर फ़रमाया: इस दरवाज़े से ये फ़रिश्ता ज़मीन पर उतरा है, ये आज के दिन से पहले कभी नहीं उतरा। इस फ़रिश्ते ने (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को) सलाम किया और कहा: आपको इन दो नूरों की ख़ुशख़बरी हो जो आपको इनायत हुए हैं ये आप से पहले किसी नबी को अता नहीं हुए, इनमें से एक सुरह फ़ातिहा है और दूसरा नूर सुरह बक़रह की आख़िरी आयतें। आप जब भी इन दोनों में से कोई हर्फ़ तिलावत करेंगें तो आपको मांगी हुई चीज़ ज़रूर अता कर दी जाएगी। *[मुस्लिम: 1877]*

सुरह फ़ातिहा क़ुरआन मजीद की सबसे ज़्यादा अज़मत वाली सूरत है, जैसा कि सय्यदना अबू सईद बिन मुअल्ला रज़ियल्लाहू अन्हु कहते हैं कि मैं मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहा थे कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे बुलाया, मैं उसी वक़्त हाज़िर न हुआ (बल्कि नमाज़ पढ़ कर गया) और कहा कि या रसूलुल्लाह! मैं नमाज़ पढ़ रहा था (इस वजह से देर हुई) तो आपने फ़रमाया: क्या अल्लाह ने ये नहीं फ़रमाया: { اسْتَجِيْبُوْا لِلّٰهِ وَلِلرَّسُوْلِ اِذَا دَعَاكُمْ } तुम अल्ल्लाह की और रसूल की दावत क़ुबूल करो, जब वो तुम्हें बुलाएं [अनफ़ाल: 24] फिर मुझसे फ़रमाया: तेरे मस्जिद से बाहर जाने से पहले तुझे क़ुरआन की एक ऐसी सूरत बताऊंगा जो (अज्र व सवाब में) सारी सूरतों से बढ़ कर है। फिर आपने मेरा हाथ पकड़ लिया, जब आपने बाहर आने का इरादा किया तो मैंने कहा कि या रसूलुल्लाह! क्या आपने ये नहीं फ़रमाया था कि मैं तुमको एक सूरत बतलाऊँगा जो क़ुरआन की सब सूरतों से बढ़ कर है? आपने फ़रमाया: वो सूरत { اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَ} है। यही सबअ मसानी (यानी सात आयतें हैं जो बार बार दोहराई जाती हैं) और क़ुरआन ए अज़ीम है जो मुझे दिया गया है। *[बुख़ारी: 4474]*

इस सूरह करीमा के पबढ़ कर फूँकने से यानी दम से साँप आदि के ज़हर का असर अल्लाह के हुक्म से ख़त्म हो जाता है, जैसा कि सय्यदना अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाह अन्हु बयान करते हैं कि अरब के एक क़बीले के पास से कुछ सहाबा का गुज़र हुआ, क़बीले वालों ने सहाबा की मेहमान नवाज़ी से इन्कार कर दिया, इसी दौरान में उनके सरदार को बिच्छू (या साँप) ने काट लिया, क़बीले वालों से सहाबा से कहा, तुम्हारे पास कोई दवा हो, या तुम लोगों में कोई दम झाड़ करने वाला शख़्स हो? सहाबा ने कहा, तुमने हमारी मेहमान नवाज़ी नहीं की, लिहाज़ा जब तक तुम हमें कुछ माल न दोगे हम इलाज नहीं करेंगे। इस पर उन लोगों ने कुछ बकरियाँ देने का वादा किया तो एक शख़्स ने सुरह फ़ातिहा पढ़नी शुरू की और साथ साथ वो थूक जमा करता और (काटने वाली जगह पर) थुतकारता जाता, तो इस तरह सरदार अच्छा हो गया, वो बकरियाँ ले कर आये तो कुछ सहाबा ने कहा, हम बकरियाँ नहीं लेंगे, जब तक कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछ न लें, वापसी पर उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि से पूछा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि इस पर मुस्करा दिये और इस शख़्स से फ़रमाया: तुम्हें कैसे मालूम हुआ कि ये सूरत रुक़्या (दम) है? (तुमने ठीक किया) ये बकरियाँ ले लो और अपने साथ मेरा भी हिस्सा निकालो। *[बुख़ारी: 5736, मुस्लिम: 5733]*

इस हदीस से मालूम हुआ कि सुरह फ़ातिहा रुक़्या है, इसके ज़रिये से दम करके इलाज किया जा सकता है और वाज़ेह हुआ कि ज़रुरत के वक़्त क़ुरआन मजीद पर उजरत (मेहनताना) लेना जायज़ है। सहाबा किराम रज़ियल्लाहू अन्हुम ने उजरत इसलिये मांगी थीं क्यूंकि बस्ती वालों ने उनकी मेहमान नवाज़ी से इन्कार कर दिया था, लिहाज़ा जायज़ दम करना और इसकी उजरत लेना जायज़ है लेकिन इसे एक हमेशा के लिए पेशा बना लेना साबित नहीं, फिर बिना मतलब वाले अलफ़ाज़ से तावीज़ लिखना, उन्हें पानी में घोल कर पिलाना, गले में लटकाना या किसी दूसरी जगह बाँधना, तो ऐसे काम शरअन हराम हैं।

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Wednesday, December 23, 2020

Wuzu Ke Baad Mustahab Zikr (वुज़ू के बाद मुस्तहब ज़िक्र)

 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃


🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:    مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ يَتَوَضَّأُ فَيُبْلِغُ أَوْ فَيُسْبِغُ الْوُضُوءَ ثُمَّ يَقُولُ: *أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ* وَفِي رِوَايَةٍ: *أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ* إِلَّا فُتِحَتْ لَهُ أَبْوَابُ الْجَنَّةِ الثَّمَانِيَةُ يَدْخُلُ مِنْ أَيِّهَا شَاءَ


🍁 *तर्जुमा :-*  उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुममें से जो शख़्स वुज़ू करता है और अच्छी तरह पूरी वुज़ू करता है, फिर कहता है: *मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद ए बरहक़ नहीं और यह की मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके बन्दे और उसके रसूल हैं*। और एक दूसरी रिवायत में है: *“मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद ए बरहक़ नहीं वो अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके बन्दे और उसके रसूल हैं*, तो उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, वो जिससे चाहे दाख़िल हो जाए”।


📚 *[मुस्लिम (553), मिशकातुल मसाबीह (289)]*


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Quran Seekhne Aur Sikhaane Ki Fazeelat


 

Tuesday, December 22, 2020

Wuzu Ka Tareeqa (वुज़ू का तरीक़ा)

 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃


🍁 *حدیث:-* وَعَنْهُ أَنَّهُ تَوَضَّأَ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدَيْهِ ثَلَاثًا ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْثَرَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَهُ الْيُمْنَى إِلَى الْمِرْفَقِ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَهُ الْيُسْرَى إِلَى الْمِرْفَقِ ثَلَاثًا ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَهُ الْيُمْنَى ثَلَاثًا ثُمَّ الْيُسْرَى ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ:   رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ نَحْوَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ قَالَ: «مَنْ تَوَضَّأَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ لَا يُحَدِّثُ نَفسه فيهمَا بِشَيْء إِلَّا غفر لَهُ مَا تقدم من ذَنبه» . وَلَفظه للْبُخَارِيّ


🍁 *तर्जुमा :-* उस्मान रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने वुज़ू किया तो तीन मर्तबा अपने हाथो पर पानी डाला, फिर कुल्ली की और नाक झाड़ी, फिर तीन बार अपना चेहरा धोया, फिर तीन मर्तबा कोहनी समेत अपना दायाँ हाथ धोया, फिर तीन मर्तबा कोहनी समेत अपना बायाँ हाथ धोया, फिर अपने सर का मसाह किया, फिर तीन मर्तबा अपना दायाँ पाँव धोया, फिर तीन मर्तबा बायाँ, फिर फ़रमाया: मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा, आपने मेरे इस वुज़ू की तरह वुज़ू किया। फिर फ़रमाया: “जो शख़्स मेरे इस वुज़ू की तरह वुज़ू करता है, फिर दो रकातें पढ़ता है और वो इस दौरान अपने दिल में किसी क़िस्म का ख़याल ना लाया तो उसके पिछले गुनाह बख़्श दिये जाते हैं। बुख़ारी, मुस्लिम, हदीस के अल्फाज़ बुख़ारी के हैं। 


📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (1934), मुस्लिम (538), मिशकातुल मसाबीह (287)]*


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Monday, December 21, 2020

Wuzu Ki Fazeelat (वुज़ू की फ़ज़ीलत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَنْ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ خَرَجَتْ خَطَايَاهُ مِنْ جَسَدِهِ حَتَّى تخرج من تَحت أَظْفَاره»

🍁 *तर्जुमा :-* उस्मान रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जो शख़्स वुज़ू करे और ख़ूब अच्छी तरह वुज़ू करे तो उसकी ख़तायें उसके जिस्म से निकल जाती हैं यहाँ तक कि उसके नाख़ून के नीचे से भी निकल जाती है।

📚 *[मुस्लिम (578), मिशकातुल मसाबीह (284)]*

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Sunday, December 20, 2020

Khataye Maaf Karne Wale Aur Darjat Buland Karne Wale Kaam (ख़तायें माफ़ करने के वाले और दर्जात बुलंद करने वाले काम)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: (أَلَا أَدُلُّكُمْ عَلَى مَا يَمْحُو اللَّهُ بِهِ الْخَطَايَا وَيَرْفَعُ بِهِ الدَّرَجَاتِ؟   قَالُوا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ: «إِسْبَاغُ الْوُضُوءِ عَلَى الْمَكَارِهِ وَكَثْرَةُ الْخُطَى إِلَى الْمَسَاجِدِ وَانْتِظَارُ الصَّلَاةِ بَعْدَ الصَّلَاة فذلكم الرِّبَاط»

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “क्या मैं तुम्हें ऐसा अमल बताऊँ जिसके ज़रिए अल्लाह ख़तायें माफ़ कर देता है और दरजात बुलंद करता है”?  सहाबा ने अर्ज़ किया: क्यूँ नहीं, अल्लाह के रसूल! ज़रूर बताइए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “नागवारी के बावजूद मुकम्मल तौर पर वुज़ू करना, मस्जिदों की तरफ़ ज़्यादा क़दम चल कर जाना और नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ का इंतज़ार करना, यही सरहदी छावनी की हिफाज़त है”। 

📚 *[मुस्लिम (587), मिशकातुल मसाबीह (282)]*

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Saturday, December 19, 2020

Pakeezgi Aadha Iman Hai (पाकीज़गी आधा ईमान है)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* عَن أَبِي مَالِكٍ الْأَشْعَرِيِّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «الطُّهُورُ شَطْرُ الْإِيمَانِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ تَمْلَأُ الْمِيزَانَ وَسُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ تَمْلَآنِ - أَوْ تَمْلَأُ - مَا بَيْنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالصَّلَاةُ نُورٌ وَالصَّدَقَةُ بُرْهَانٌ وَالصَّبْرُ ضِيَاءٌ وَالْقُرْآنُ حُجَّةٌ لَكَ أَوْ عَلَيْكَ كُلُّ النَّاسِ يَغْدُو فَبَائِعٌ نَفْسَهُ فَمُعْتِقُهَا أَوْ مُوبِقُهَا» . رَوَاهُ مُسْلِمٌ

🍁 *तर्जुमा :-* अबू मालिक अशअरी रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “पाकीज़गी आधा ईमान है, अल्हम्दुलिल्लाह मीज़ान को भर देता है, सुबहानल्लाह और अल्हम्दुलिल्लाह दोनो या (इनमें से हर कलमा) ज़मीन व आसमान के बीच को भर देता है, नमाज़ नूर है, सदक़ा करना दलील है, सब्र रौशनी है और क़ुरआन तेरे हक़ मे या तेरे ख़िलाफ़ दलील होगा। हर आदमी सुबह के वक़्त अपने नफ़्स का सौदा करता है, तो वो इसे आज़ाद करा लेता है या हलाक कर देता है”।

📚 *[मुस्लिम (534), मिशकातुल मसाबीह (281)]*

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Friday, December 18, 2020

Ilm Na Hone Par Bewajah Takalluf Karne Se Bachna (इल्म न होने पर बेवजह तकल्लुफ़ करने से बचना)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَ: يَا أَيُّهَا النَّاسُ مَنْ عَلِمَ شَيْئًا فَلْيَقُلْ بِهِ وَمَنْ لَمْ يَعْلَمْ فَلْيَقُلِ اللَّهُ أعلم فَإِن من الْعلم أَن يَقُول لِمَا لَا تَعْلَمُ اللَّهُ أَعْلَمُ. قَالَ اللَّهُ تَعَالَى لِنَبِيِّهِ (قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ وَمَا أَنا من المتكلفين)

🍁 *तर्जुमा :-* अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु ने फ़रमाया: लोगो! जिस शख़्स को किसी चीज़ का इल्म हो तो वो उसके बारे में बात करे और जिसे इल्म न हो तो वो कहे (अल्लाहु आलम) अल्लाह बेहतर जानता है। क्यूंकि जिस चीज़ का तुझे इल्म न हो उसके बारे में तुम्हारा यह कहना कि अल्लाह बेहतर जानता है, यह भी इल्म की बात है। अल्लाह तआला ने अपने नबी से फ़रमाया: “कह दीजिए मैं इस पर तुमसे कोई अज्र नहीं मांगता और मैं तकल्लुफ़ करने वालो में से भी नहीं हूँ”।

📚 *[मुत्तफ़िक़ अलैह, बुख़ारी (4809), मुस्लिम (7066), मिशकातुल मसाबीह (272)]*

Thursday, December 17, 2020

Hadees Yaad Karke Use Aage Pahunchane wale Shaksh ki Fazeelat (हदीस याद करके उसे आगे पहुँचाने वाले शख़्स की फ़ज़ीलत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «نَضَّرَ اللَّهُ عَبْدًا سَمِعَ مَقَالَتِي فَحَفِظَهَا وَوَعَاهَا وَأَدَّاهَا فَرُبَّ حَامِلِ فِقْهٍ غَيْرِ فَقِيهٍ وَرُبَّ حَامِلِ فِقْهٍ إِلَى مَنْ هُوَ أَفْقَهُ مِنْهُ. ثَلَاثٌ لَا يَغِلُّ عَلَيْهِنَّ قَلْبُ مُسْلِمٍ إِخْلَاصُ الْعَمَلِ لِلَّهِ وَالنَّصِيحَةُ لِلْمُسْلِمِينَ وَلُزُومُ جَمَاعَتِهِمْ فَإِنَّ دَعْوَتَهُمْ تُحِيطُ مِنْ ورائهم» . رَوَاهُ الشَّافِعِي وَالْبَيْهَقِيّ فِي الْمدْخل

🍁 *तर्जुमा :-* इब्ने मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अल्लाह उस शख़्स के चेहरे को तरोताज़ा रखे जिसने मेरी हदीस को सुना, इसे याद किया, इसकी हिफाज़त की और फिर इसे आगे बयान किया। कभी कभी अहल इल्म फ़कीह नहीं होते और कभी कभी फ़कीह अपने से ज्यादा फ़कीह तक बात पहुँचा देता है। तीन ख़ूबियाँ ऐसी है जिनके बारे में मुसलमान का दिल ख़यानत नहीं करता: ख़ालिस अमल जो अल्लाह की रज़ा के लिए हो, मुसलमानों के लिए ख़ैरख़्वाही हो , और उनकी जमाअत के साथ लगे रहना, क्यूंकि उनकी दावत उन्हें सब तरफ से घेर लेगी (हिफाज़त करेगी)”।

📚 *[सहीह, शाफ़इ फ़ी अर रिसाला (सफ़ा 401), बैहक़ी फ़ी शोबुल ईमान (1738), तिरमिज़ी (2658), मुसनद अहमद (1/ 436)।, मिशकातुल मसाबीह (228)]*

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Wednesday, December 16, 2020

Gair ullah ke liye ilm hasil karne ki mazammat (ग़ैरुल्लाह के लिए इल्म हासिल करने की मज़म्मत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ تَعَلَّمَ عِلْمًا مِمَّا يُبْتَغَى بِهِ وَجْهُ اللَّهِ لَا يَتَعَلَّمُهُ إِلَّا لِيُصِيبَ بِهِ عَرَضًا مِنَ الدُّنْيَا لَمْ يَجِدْ عَرْفَ الْجَنَّةِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ» يَعْنِي رِيحَهَا. رَوَاهُ أَحْمَدُ وَأَبُو دَاوُدَ وَابْن مَاجَه


🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जो शख़्स ऐसा इल्म जिसके ज़रिये अल्लाह की रज़ामंदी हासिल की जाती है, (लेकिन यह) उसने सिर्फ़ इसलिए हासिल किया ताकि इसके ज़रिये दुनियावी फ़ायदा हासिल करे तो वो क़यामत के दिन जन्नत की ख़ुशबू भी नहीं पाएगा”। 

📚 *[इसकी सनद हसन है, मुसनद अहमद (8438), अबू दावूद (3664), इब्ने माजा (252), मिशकातुल मसाबीह (227)]*

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Tuesday, December 15, 2020

Ilm chupane ki mazammat (इल्म छुपाने की मज़म्मत)

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

🍁 *حدیث:-* وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «من سُئِلَ عَنْ عِلْمٍ عَلِمَهُ ثُمَّ كَتَمَهُ أُلْجِمَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِلِجَامٍ مِنْ نَارٍ» . رَوَاهُ أَحْمَدُ وَأَبُو دَاوُد وَالتِّرْمِذِيّ

🍁 *तर्जुमा :-* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जिस शख़्स से इल्म की कोई बात पूछी जाए, जिसे वो जानता हो, फिर वो इसे छुपाए, तो क़यामत के दिन उसे आग की लगाम डाली जाएगी”।

📚 *[इसकी सनद हसन है, मुसनद अहमद (7561,8035), अबू दावूद (3658), तिरमिज़ी (2649), इब्ने माजा (261), मिशकातुल मसाबीह (223)]*

Tafseer Dawat ul Quran (Hindi Translation) Part 8

 أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم● 🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃 📒 तफ़सीर दावतुल क़ुरआन 📒 ✒️ लेख़क: अ...