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Friday, December 25, 2020

Surah Fatiha Part 4 (सुरह फ़ातिहा भाग 4)

   *أَعـــــــــــــــــــــــوذ بالله من الشيطان الرجيم*●

🍂🍃ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🍂🍃

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*तफ़सीर दावतुल क़ुरआन* 

लेख़क: अबू नोमान सैफ़ुल्लाह ख़ालिद 

तर्जुमा: मोहम्मद शिराज़ (कैफ़ी)

*सूरह फ़ातिहा* 

*भाग 4*

اَعُوْذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ*    

मैं पनाह मांगता हूँ अल्लाह की शैतान मरदूद से

अल्लाह तआला ने क़ुरआन करीम में कई जगह बन्दों को शैतान के शर से पनाह मांगने का हुक्म दिया है, जैसा कि इरशाद फ़रमाया:

*فَاِذَا قَرَاْتَ الْقُرْاٰنَ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ*

तो जब तू क़ुरआन पढ़े तो मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह तलब कर  *[अन-नहल: 98] *   और फ़रमाया:

*وَاِمَّا يَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطٰنِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ ۭاِنَّهٗ سَمِيْعٌ عَلِيْمٌ*

और अगर कभी शैतान की तरफ़ से कोई उकसाहट तुझे उभार ही दे तो अल्लाह की पनाह तलब कर, बेशक वो सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। *[अल-आराफ़: 200]* और फ़रमाया:

*وَ قُلْ رَّبِّ اَعُوْذُ بِكَ مِنْ هَمَزٰتِ الشَّیٰطِیْنِۙ۝۹۷ وَ اَعُوْذُ بِكَ رَبِّ اَنْ یَّحْضُرُوْنِ۝۹۸*

और तू कह ऐ मेरे रब! मैं शैतानों की उकसाहटो से तेरी पनाह मांगता हूँ और ऐ मेरे रब! मैं इससे भी तेरी पनाह मांगता हूँ कि वो मेरे पास आ मौजूद हो। *[अल-मुमिनून: 97,98] *

इन आयतों में अल्लाह तआला ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को शैतान मरदूद से पनाह मांगने का हुक्म दिया है, क्यूंकि शैतान इंसान का ऐसा बुरा दुशमन है जो किसी भी भलाई और अहसान को नहीं मानता और हर वक़्त इसके ख़िलाफ़ साज़िश में लगा रहता है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीसों से भी इसका सबूत मिलता है। सहीह हदीसों में शैतान मरदूद के शर से पनाह मांगने के कुछ जगहें निम्नलिखित हैं:

नमाज़ शुरू करते वक़्त शैतान के शर से पनाह तलब करना, जैसा कि सय्यदना अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब रात को क़याम करते तो नमाज़ शुरू करते हुए अल्लाहु अकबरकहते, फिर ये पढ़ते: *{ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلَا إِلَهَ غَيْرَكَ}* मैं पाकी बयान करता हूँ तेरी ऐ अल्लाह! तेरी ही हम्द व सना के साथ, तेरा नाम बहुत बरकत वाला है, तेरी शान बहुत बुलंद व बाला है और तेरे सिवा कोई और इबादत के लायक़ नहीं। फिर आप तीन बार ला इलाहा इल्लल्लाहपढ़ते, फिर ये पढ़ते: *{{أَعُوذُ بِاللَّهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ مِنْ هَمْزِهِ وَنَفْخِهِ}}* मैं अल्लाह की पनाह लेता हूँ जो सुनने वाला, जानने वाला है शैतान मरदूद से यानी उसके वस्वसे से और उसकी फूँक और उसके जादू से *[मुसनद अहमद: 11479, अबू दावूद: 775, तिरमिज़ी: 242]*

सय्यदना अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहा करते थे:

*{{اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ، وَهَمْزِهِ وَنَفْخِهِ وَنَفْثِهِ}}* ऐ अल्लाह! बेशक मैं तेरी पनाह लेता हूँ शैतान मरदूद से और उसके वस्वसे से, उसके तकब्बुर और उसके जादू से। *[इब्ने माजा: 808]*

जारी है...................................

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