*क़यामत की कुछ निशानियाँ*
1⃣ *पहला भाग*
सहल बिन साद रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा आप अपनी
बीच की उंगली और अंगूठे के करीब वाली उंगली के इशारे से फ़रमा रहे थे कि मैं ऐसे वक्त में भेजा गया हूं कि मेरे और कयामत के बीच सिर्फ इन दो के बराबर फासला है।
बीच की उंगली और अंगूठे के करीब वाली उंगली के इशारे से फ़रमा रहे थे कि मैं ऐसे वक्त में भेजा गया हूं कि मेरे और कयामत के बीच सिर्फ इन दो के बराबर फासला है।
*( सही बुख़ारी : 4936, सही मुस्लिम : 7403)*
हजरत औफ़ बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि मैं गज़वा तबूक के मौक़े पर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास हाज़िर हुआ, आप उस वक़्त चमड़े के एक खे़मे में थे, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : क़यामत की छः निशानियाँ गिनो, मेरी मौत, फ़िर बैतुल मक़दस की फतह, फ़िर एक वबा जो तुम में शिद्दत से फैलेगी जैसे बकरियों में ताऊन फैल जाता है, फिर माल की कसरत इस दर्जा में होगी कि एक शख्स सौ दीनार भी अगर किसी को देगा तो उस पर भी वो नाराज़ होगा। फिर फितना इतना तबाह कुन आम होगा कि अरब का कोई घर बाक़ी ना रहेगा जो इसकी चपेट में ना आ गया होगा, फिर सुलह जो तुम्हारे और बनी असगर (नसराय रोम) के बीच होगी, लेकिन वो धोका देंगे और एक बड़े लश्कर के साथ तुम पर चढ़ाई करेंगे। इस में अस्सी झंडे होंगे और हर झंडे के नीचे बारह हज़ार फौज होगी (यानी नौ लाख साठ हज़ार फौज से वो तुम पर हमला करेंगे)।
*(सही बुख़ारी : 3176)*
➡ *जारी है...........*
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