*आज की हदीस*
सय्यदना अली बिन हुसैन रज़ियल्लाहू अन्हुमा बयान करते हैं कि उम्मुल मोमिनीन सय्यदह साफिया रज़ियल्लाहू अन्हा ने उनको ख़बर दी कि वो रमज़ान के आख़िरी अशरे में जब रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एतिकाफ़ में बैठे हुए थे, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने मस्जिद में आयीं, थोड़ी देर तक बातें कीं, फ़िर वापस होने के लिए खड़ी हुयीं तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी उनके साथ खड़े हुए, जब मस्जिद के दरवाज़े के क़रीब पहुंचे, जहाँ उम्मुल मोमिनीन उम्मे सलमा रज़ियल्लाहू अन्हा का दरवाज़ा था, तो वहां दो अंसारी सहाबी मिले l उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सलाम किया और तेज़ी से आगे गुज़र गए, आपने फ़रमाया : *“ज़रा ठहर जाओ, यह (मेरी बीवी) सफ़िया बिन्ते हय्य हैं l”* वो कहने लगे, सुबहानल्लाह ! या रसूलुल्लाह ! आपका यह फ़रमाना उन पर भारी गुज़रा l आपने फ़रमाया : *“शैतान आदमी के जिस्म में ख़ून की तरह दौड़ता रहता है, मैं डरा कि कहीं तुम्हारे दिल में कोई वस्वसा न डाल देl”*
*[बुख़ारी : 2035, मुस्लिम : 5679]*
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