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Wednesday, August 8, 2018

Qayamat ki baaz nishaniya Part 24 Hindi

🔥 *क़यामत की कुछ निशानियाँ*🔥

2⃣4⃣ *चौबीसवा भाग*

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि हम लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास बैठे थे आपने फ़ितनो के बारे में बारे में बहुत से फ़ितनो का ज़िक्र किया यहाँ तक कि फ़ितना अह्लास का भी ज़िक्र फ़रमाया तो एक शख्स ने अर्ज़ किया: अल्लाह के रसूल! फ़ितना अह्लास क्या है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "वो ऐसी नफ़रत व दुशमनी और क़त्ल ओ ग़ारतगरी है कि इन्सान एक दुसरे से भागेगा और जंग करेगा, फ़िर इसके बाद फ़ितना सर्रा है जिस का फ़साद मेरे अहले बैत के एक शख्स के पैरो के नीचे से शुरू होगा, वह गुमान करेगा कि वो मुझ से हैं हालांकि वो मुझ से न होगा, मेरे औलियाँ तो वही हैं जो मुत्तकी हों, फ़िर लोग एक शख्स पर इत्तिफ़ाक कर लेंगे जैसे सुरीन (चूतर) एक पसली पर (यानी ऐसे शख्स पर इत्तिफ़ाक होगा जिस में इस्तिकामत न होगी जैसे सुरीन पहलु कि हड्डी पर सीधा नहीं होता) फ़िर फ़ितना दुहैमा (अँधेरे) का फ़ितना होगा जो इस उम्मत के हर शख्स को पहुँच कर रहेगा, जब कहा जायेगा कि फ़साद ख़त्म हो गया तो वो और भड़क उठेगा जिस में सुबह को आदमी मोमिन होगा, और शाम को काफ़िर हो जायेगा, यहाँ तक कि लोग दो ख़ेमो में बट जायेंगे, एक ख़ेमा अहले ईमान का होगा जिस में कोई मुनाफ़िक़ न होगा और एक ख़ेमाअहले निफ़ाक़ का जिस में कोई ईमानदार न होगा, तो जब ऐसा फ़ितना हो तो तुम उसी दिन या उस के दुसरे दिन से दज्जाल का इंतज़ार करने लग जाओ" l

📚 *(सुनन अबू दावूद : 4242, सनद सही)*

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "उस ज़ात कि क़सम जिस के हाथ में मेरी जान है, वो ज़माना क़रीब है कि ईसा इब्ने मरयम अलैहिस्सलाम तुम्हारे दरमियान एक आदिल हाकिम की हैसियत से नाज़िल होंगे, वो सलीब को तोड़ देंगे, सुवर को मार डालेंगे और जिज़्या माफ़ कर देंगे, उस वक़्त माल की इतनी कसरत हो जाएगी कि कोई उसे लेने वाला नहीं मिलेगा l उस वक़्त का एक सज्दा दुनया और जो कुछ इसमें हैं से बढ़ कर होगा, फ़िर अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु ने कहा कि अगर तुम्हारा दिल चाहे तो यह आयत पढ़ लो وَإِنْ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلا لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدً"और कोई अहले किताब ऐसा नहीं होगा जो ईसा की मौत से पहले उस पर ईमान न लाये और क़यामत के दिनवो उन पर गवाह होंगे"l

📚 *(सही बुख़ारी : 3448)*

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