*क़यामत की कुछ निशानियाँ*
6⃣ *छठा भाग*
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलिही वसल्लम ने फ़रमाया: उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है दुनया खत्म नहीं होगी यहाँ तक कि लोगो पर ऐसा दिन आ जाये जिस में क़ातिल को यह मालूम न हो कि उसने क्यों कत्ल किया और मक़तूल को यह पता न हो कि उसे क्यों क़त्ल किया गया, पूछा गया कि ऐसा कैसे होगा? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: अँधा धुंध खूंरेजी होगी, क़ातिल और मक़तूल दोनों (जहन्नम की) आग में जायेंगे l
*(सही मुस्लिम : 7304)*
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु बयान करते हैं कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक मजलिस में तशरीफ़ फरमा थे और सहाबा किराम से गुफ्तुगू फरमा रहे थे इतने में एक देहाती आपके पास आया और पूछने लगा कि क़यामत कब आएगी? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी गुफ्तुगू में मसरूफ़ रहे, कुछ लोग जो मजलिस में थे कहने लगे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने देहाती की बात सुनी लेकिन पसंद नहीं की और कुछ कहने लगे कि नहीं बल्कि आपने उसकी बात सुनी ही नहीं, जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी बातें पूरी कर चुके तो मैं समझता हूँ कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यूं फ़रमाया वो क़यामत के बारे में पूछने वाला कहाँ गया उस (देहाती) ने कहा (या रसूलुल्लाह!) मैं मौजूद हूँ, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब अमानत (ईमानदारी दुनया से) उठ जाये तो क़यामत क़ायम होने का इंतज़ार कर, उसने कहा ईमानदारी उठने का क्या मतलब है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब (हुकूमत के कारोबार) नालायक़ लोगो को सोंप दिए जाये तो क़यामत का इंतज़ार कर l
*(सही बुख़ारी: 59)*
➡ *जारी है.....................*
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